भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका इन दिनों बड़े आर्थिक और राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है. पूरे में महंगाई चरम पर है. खाने-पीने की चीज़ों के दाम काफी बढ़ चुके हैं. पेट्रोल पंपों पर लोगों को काबू करने के लिए सेना तैनात करनी पड़ रही है. बिजली गायब है और लोग सड़कों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शन का मुख्य बिंदु, राष्ट्रपति गोतभया राजपक्षे का परिवार है जिसे एक समय में तमिल युद्ध खत्म करने की वजह से देश में नायक का दर्जा प्राप्त था. इन प्रदर्शनों के पहले तक राष्ट्रपति राजपक्षे की कैबिनेट में राजपक्षे परिवार के कुल 5 सदस्य थे जिनमें से 4 अब तक इस्तीफा दे चुके हैं. प्रधानमंत्री महिंद्र राजपक्षे के भी इस्तीफा देने की चर्चा चल रही है. लोगों का मानना है कि देश के बुरे हालात के लिए राजपक्षे परिवार ही जिम्मेदार है. इसकी बड़ी वजह यह है कि पिछले समय में अधिकांश समय देश की सत्ता पर राजपक्षे परिवार ही काबिज रहा है.

वर्तमान प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे इस परिवार के मुखिया हैं और 2005 से 2015 के बीच 10 साल तक देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं. इसके अलावा, प्रधानमंत्री के तौर पर उनका यह चौथा कार्यकाल है. दो बड़ें पदों पर उनका कार्यकाल दिखाता है कि वह कितने शक्तिशाली हैं. महिंद्रा राजपक्षे के राष्ट्रपति रहते ही, 2009 में श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के संगठन लिट्टे का सफाया हुआ था. खास बात यह है कि वर्तमान राष्ट्रपति गोतभया राजपक्षे उस समय देश के रक्षा मंत्री थे. ऐसे में राजपक्षे परिवार ने देश के लोगों के बीच नायक की छवि बना ली थी जिन्होंने तमिल विद्रोहियों का सफाया करके देश के ग्रहयुध्द से आजादी दिलवाई थी.

दरअसल तमिल युद्ध ने श्रीलंका को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया था. 26 साल तक चले इस ग्रहयुद्ध की मुख्य वजह, बहुसंख्यक सिंघली और अल्पसंख्यक तमिलों के बीच टकराव था. तमिल श्रीलंका सरकार पर खुद को लगातार हाशिए पर रखने और अधिकारों के हनन का आरोप लगा रहे थे. इसी टकराव के चलते, वी प्रभाकरण ने लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) की स्थापना की और हथियारों के दम अलग तमिल राष्ट्र की मांग कर दी. लिट्टे ने लगातार आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया जिसके बाद श्रीलंकाई सेना से उसका टकराव होने लगा. ऐसे में राजीव गांधी के नेतृत्व वाली भारत सरकार ने श्रीलंका में शांति सेना भेज दी. हालांकि, यह कदम गलत साबित हुआ और भारतीय सेना को जल्द श्रीलंका से वापस आना पड़ा. इसके बाद, लिट्टे ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रची और 1991 में चेन्नई के पास एक रैली के दौरान आत्मघाती बम हमले में उनकी हत्या कर दी. लिट्टे यहीं नहीं रुका, इसके बाद उसने 1993 में श्रीलंका के राष्ट्रपति प्रेमदास की हत्या भी की. 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंग पर भी हमला किया, हालांकि वह हमले में बच गईं. 2005 में एक बार फिर लिट्टे ने श्रीलंका के विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिरगमार की हत्या कर दी. हमने यहां सिर्फ़ उन बड़ी घटनाओं का जिक्र किया है जिन्हें लिट्टे ने अंजाम दिया था. लिट्टे ने अन्य भी तमाम हमले किए. जिनकी वजह से श्रीलंका में बहुसंख्यक सिंघली और अल्पसंख्यक तमिल दोनों ही प्रभावित हुए. बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापित होना पड़ा. इस ग्रहयुद्ध की वजह से श्रीलंका का विकास भी प्रभावित हुआ और माना जाने लगा कि श्रीलंका की समृद्धि के लिए इस युद्ध का खत्म होना ज़रूरी है.

ऐसे में महिंद्रा राजपक्षे ने 2005 में देश की कमान संभाली और अपने भाई गोतभया राजपक्षे के साथ मिलकर लिट्टे का सफाया कर दिया. माना जाता है कि श्रीलंका ने इस युद्ध के लिए पाकिस्तान और चीन से हथियार लिए थे. इस युद्ध के दौरान, राजपक्षे पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी लगे. हालांकि राजपक्षे ने आरोपों को गलत बताया. इस युद्ध ने ही चीन और श्रीलंका के बीच नजदीकियां बढ़ाईं.

इस युद्ध के खत्म होने के बाद, 2010 में श्रीलंका में चुनाव हुए और राष्ट्रपति राजपक्षे बड़े बहुमत के साथ एक बार फिर देश के राष्ट्रपति चुने गए. जैसा कि उम्मीद थी युद्ध खत्म होने के बाद, श्रीलंका में विकास भी हुआ. चाय और ऐसी ही अन्य कई चीजों का निर्यात करने वाले श्रीलंका का निर्यात बढ़ा और युद्ध खत्म होने के बाद पर्यटक भी वहां जाने लगे. हालांकि, इसी बीच अतंर्राष्ट्रीय बाजार में, उन चीज़ों के दामों में गिरावट आई जिन्हें श्रीलंका निर्यात करता था. लिहाजा, श्रीलंका के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने लगी. हालांकि, स्थितियां इसके बाद सुधरी लेकिन 2019 में ईस्टर पर हुए धमाकों का पर्यटकों पर गलत असर पड़ा और इसने एक बार फिर अर्थव्यवस्था पर गलत प्रभाव डाला.

इन सबके बीच श्रीलंका ने चीन से काफी कर्ज भी लिया जिसे चुकाना मुश्किल होता गया. यहां तक कि कर्ज चुकाने के नाम पर हंबनटोटा बंदरगाह को चीन को लीज पर दे दिया. इसी बीच राजपक्षे परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगने लगें. पैंडोरा पेपर्स के खुलासे में राजपक्षे परिवार के भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ. पेपर के मुताबिक, महिंद्र राजपक्षे की भतीजी निरुपमा राजपक्षे और उनके पति पूरी दुनिया में राजपक्षे परिवार के काले धन को शेल कंपनी बनाकर मैनेज करते हैं. श्रीलंकाई अखबार, कोलंबो टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक 2005 से 2015 के बीच ही राजपक्षे परिवार ने कमीशन और भ्रष्टाचार में 1.2 बिलियन डॉलर की रकम कमाई है. यह भी कहा जाता है कि 2010 में चुनाव जीतने के बाद राजपक्षे ने भारतीय कंपनियों को हटाकर, बड़े पैमाने पर चीनी कंपनियों को ठेके दिए और इनके बदले खुद कमीशन लिए. अभी तक देश के वित्त मंत्री रहे, महिंद्रा राजपक्षे के भाई बासिल राजपक्षे तो भ्रष्टाचार के बड़े पर्याय बन चुके हैं और लोग उन्हें मिस्टर टेन परसेंट भी कहते हैं और कहा जाता है कि वह बगैर कमीशन लिए कोई भी सरकारी काम नहीं करते.

कुल मिलाकर, राजपक्षे परिवार अब युद्ध नायक से खलनायक के तौर पर जाना जाने लगा है. परिवार के 5 में से 3 सदस्यों की कुर्सी जा चुकी है और प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे की भी गद्दी कभी भी जा सकती है. श्रीलंका एक बड़े संकट का सामना कर रहा है उसके 'नायक' ही कठघरे में हैं.