हाल ही में आतंकी संगठन अलकायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी को अमेरिका ने मार गिराया है. अमेरिकी राष्ट्रपति बिडेन के मुताबिक, जवाहिरी को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक घर में ड्रोन हमला करके मार गिराया गया. 2 मई 2011 को ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद से जवाहिरी, अलकायदा का प्रमुख था. वह अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए भीषण हमले (9/11) के मुख्य साजिशकर्ताओं में भी शामिल था. अलकायदा वैसे तो खतरनाक आतंकी संगठन रहा है लेकिन अमेरिकी कार्रवाई और दबाव के चलते बीते कुछ समय से इस संगठन की गतिविधियां शांत थीं. हालांकि, समय-समय पर जवाहिरी के वीडियो जारी होते रहते थे जिनमें वह जिहाद और आतंकी घटनाओं की बात करते हुए दिखता था.

जवाहिरी के साथ इस हमले में 12 आतंकी और मारे गए. ये आतंकी तालिबान के मजबूत धड़े हक्कानी नेटवर्क के बताए जा रहे हैं. इन आतंकियों में से एक हक्कानी नेटवर्क प्रमुख और अफगानिस्तान के गृहमंत्री सिरजुद्दानी हक्कानी का बेहद नजदीकी था और पहले उसकी सुरक्षा का प्रभारी था. अफगानिस्तान के बारे में रिपोर्ट करने वाले कुछ पत्रकारों के मुताबिक जिस इमारत में जवाहिरी को मारा गया है उसे तालिबान राजनयिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करता है.

अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद, कुछ सवाल उठ रहे हैं. तालिबान जिसने आतंकवाद के लिए अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल न होने देने की बात कही थी. उस पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर अलकायदा सरगना वहां क्या कर रहा था. हालांकि, यह सवाल उन मासूम लोगों का है जिन्हें लगता होगा कि तालिबान की कही गई बात पर भरोसा कर लिया जाए. खास तौर पर, तब जब तालिबान खुद एक आतंकी संगठन है और बंदूक के दम पर ही उसने अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा किया है.

दूसरा और अहम सवाल यह है कि अमेरिका ने यह ड्रोन हमला कहां से किया और किसकी खुफिया जानकारी के हिसाब पर किया. कुछ समय पहले जब अमेरिका, पाकिस्तान में ड्रोन हमले करता था तो अपने बेस के तौर पर अफगानिस्तान का इस्तेमाल करता था. फिलहाल, अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं की वापसी हो चुकी है और वहां तालिबान का कब्जा है और वहां अमेरिका का कोई बेस नहीं हो सकता. ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका के इस हमले का बेस, पाकिस्तान था.

पाकिस्तान का इस ड्रोन हमले में शामिल होना और भी सवाल खड़े करता है. दरअसल बीते दिनों पाकिस्तान को IMF से 1 बिलियन डॉलर के लोन की मंज़ूरी मिली है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक IMF से लोन पाने और अमेरिका से अपने संबंधों को बेहतर करने के लिए पाकिस्तान ने ऐसा किया है. अगर हाल फिलहाल के तथ्यों को देखें तो टाइम्स ऑफ इंडिया की बात को नकारा नहीं जा सकता. भारतीय पत्रकार, युसुफ उंझवाला लिखते हैं, "जवाहिरी सालों से पाकिस्तान में था. काबुल में कैसे पहुंचा? शायद बाजवा और उनके साथियों ने अमेरिका से डॉलर लेने के लिए ऐसा किया हो. वैसे भी जवाहिरी का पाकिस्तान में मारा जाना, उनके लिए बड़ी समस्या बनता."

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जा कर लेने के बाद और यूक्रेन पर रूस के हमले से, दुनिया में अमेरिकी की धाक में कमी आई है. ऐसे में अपनी पुरानी धाक को हासिल करने के लिए अमेरिका, पाकिस्तान से समझौता कर सकता है. अलकायदा और जवाहिरी की गतिविधियां बीते कुछ समय में वैसे भी सुस्त थीं ऐसे में उसकी कुर्बानी देना कोई बड़ी बात नहीं है. हालांकि, हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों का हमले में मारा जाना ज़रूर चौंकाता है.

हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का एक और चेहरा ही कहा जाता है और सिराजुद्दीन हक्कानी को अफगानिस्तान का गृहमंत्री बनाने के पीछे ISI की भूमिका मानी जाती है. ऐसे में ISI की खुफिया जानकारी पर हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों का मारा जाना चौंकाता है. हालांकि, पिछले कुछ समय से तालिबान और पाकिस्तान के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं. इनके पीछे अफगानिस्तान के नक्शे में पाकिस्तान के कुछ हिस्से को दिखाना है.

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी जो लिखते हैं वह और भी चौंकाने वाला है. उन्होंने अमेरिका और तालिबान के बीच उज्बेकिस्तान में हुई एक बैठक का जिक्र किया है. जिसमें इस बात पर चर्चा हुई थी कि अफगानिस्तानी लोगों के भले के लिए अमेरिका, अफगानिस्तान सेंट्रल बैंक को 3.5 बिलियन रुपये देगा. ब्रम्हा चेलानी इस बैठक का जिक्र करते हुए सवाल खड़ा करते हैं कि क्या जवाहिरी के मारे जाने के बाद तालिबान को यह 3.5 बिलियन रकम इनाम के तौर पर मिलेगी. जाहिर तौर पर, ब्रम्हा चेलानी का इशारा इस ओर है कि क्या तालिबान ने 3.5 बिलियन के बदले जवाहिरी को अमेरिका के हवाले कर दिया. अगर ऐसा है तो यह एक आतंकवादी के खिलाफ, अमेरिका-तालिबान की डील होगी जो अपने-आप में एक नया प्रयोग है.

फिलहाल, तालिबान और अमेरिका दोनों एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. दोनों ने एक दूसरे पर दोहा समझौता तोड़ने का आरोप लगाया है. पाकिस्तान ने इस मामले पर नपा-तुला बयान दिया है. जवाहिरी का मारा जाना भले ही दुनिया को एक अच्छी खबर लगे लेकिन इसके पीछे जो समझौते हो सकते हैं वो आने वाले समय भारत जैसे देशों के लिए चुनौती साबित हो सकते हैं. निश्चित तौर पर हमारी सरकार और खुफिया एजेंसियों की इस पूरे घटनाक्रम पर नजर होगी.