अफ़गानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो चुका है. तालिबान ने सरकार का ऐलान भी कर दिया है. खबरों के मुताबिक तालिबानी बड़े जोर-शोर से अपनी कथित सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी कर रहे थे. इस शपथ ग्रहण में कई देशों को न्योता भेजा जाने वाला था. फिर, अचानक 11 सितंबर को होने वाला यह शपथ ग्रहण टल गया. कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसे टालने की वजह 11 सितंबर को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रे़ड सेंटर पर हमले की बरसी होना था लेकिन फिर एक और खबर ने सभी को चौंका दिया. यह खबर थी कि तालिबान सरकार में डिप्टी प्राइम मिनिस्टर नियुक्त किए गए मुल्ला अब्दुल गनी बरादर की मौत हो गई. कई खबरों के मुताबिक, बरादर सत्ता संघर्ष की वजह से मारा गया. यह संघर्ष हक्कानी भाईयों और मुल्ला बरादर के बीच हुआ था.

बीती 3 सितंबर को काबुल में जबरदस्त फायरिंग हुई. इस फायरिंग में 17 लोगों की मौत हुई और 41 लोग घायल हुए. तालिबान के मुताबिक यह फायरिंग, पंजशीर में तालिबान के कब्जा करने के जश्न की वजह से हुई. लेकिन खबरों के मुताबिक यह फायरिंग हक्कानी नेटवर्क और अब्दुल्ला गनी बरादर के गुट के बीच हुई थी. इसी फ़ायरिंग में गनी बरादर घायल हुआ था. गनी बरादर के घायल होने की खबर बीबीसी ने भी प्रकाशित की थी.

काबुल से रिपोर्ट करने वाले एक ट्विटर हैंडल काबुल क्रोनिकल ने पीपुल पोस्ट को बताया, "इस बात की चर्चाएं पहले से थीं कि हक्कानी नेटवर्क और गनी बरादर-अंखुजादा ग्रुप के बीच मतभेद थे. गनी बरादर को प्रधानमंत्री बनाया जाने वाला था लेकिन हक्कानी नेटवर्क को यह मंजूर नहीं था. इसी बात को लेकर 3 सितंबर की रात दोनों गुटों में झड़प हुई. हक्कानी नेटवर्क के पास इस समय काबुल का मिलेट्री कंट्रोल है और उसने खुद को मजबूत दिखाने के लिए यह फायरिंग की. माना जा रहा है कि इसी फ़ायरिंग में मुल्ला बरादर घायल हुआ. इस झड़प के अगले दिन सुबह ही आईएसआई चीफ़ फैज हमीद पाकिस्तान पहुंचे जहां मुल्ला हसन अखुंद को प्रधानमंत्री बनाने का ऐलान किया गया. खास बात यह है कि मुल्ला हसन न तो कभी मजबूत सैन्य कमांडर रहा है और न ही उसकी कबायलियों में मजबूती रही है. इसके बाद से मुल्ला बरादर को सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया है."

दूसरी तरफ़, गनी बरादर की मौत की खबरें सामने आने के बाद तालिबान ने सफाई देने की कोशिश की. तालिबान प्रवक्ता नईम के ट्विटर अकाउंट से मु्ल्ला बरादर का एक कथित ऑडियो पोस्ट किया गया. इस ऑडियो में मुल्ला बरादर अपने मरने या घायल होने की खबरों का खंडन करता सुनाई दे रहा है. हालांकि, कुछ देर बाद ही यह ऑडियो डिलीट हो गया, तब तक यह ट्विटर पर वायरल हो चुका था. इस ऑडियो के बारे में काबुल क्रोनिकल कहता है, "ऑडियो से मुल्ला बरादर की मौत की खबरों को बल ही मिलता है. वर्ना इसके बजाय, वीडियो पोस्ट किया जाता. मुल्ला बरादर या को मारा जा चुका है या वह बुरी तरह से घायल है. इन खास दिनों में उसकी गैरमौजूदगी बड़े सवाल खड़े कर रही है.

अफगानिस्तान पर रिपोर्टिंग करने वाले एक और पत्रकार नतीक मलिकजादा, मुल्ला बरादर के कथित ऑडियो पर कहते हैं, "तालिबान प्रवक्ता मुल्ला बरादर की मौत से खबरों को झूठा बता रहे हैं. हालांकि वे ऐसा दावा तालिबान प्रमुख हिब्तुल्लाह अखुंजादा के बारे में करते हैं जिसे 2 साल से देखा नहीं गया है."

इससे पहले भी तालिबान आतंकियों के बीच बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ था. इस ऑडियो में तालिबान आतंकी, पाकिस्तानी हस्तक्षेप पर नाराजगी जा रहे हैं. साथ ही, इस ऑडियो में राष्ट्रपति भवन के अंदर फायरिंग की भी चर्चा है. ऑडियो में एक आतंकवादी को कहते हुए सुना जा सकता है, "मेहमान (ISI चीफ़) ने अफगानिस्तान का पूरा भविष्य बर्बाद कर दिया, अब फिर से लड़ाई की आशंका है."

जिस तरह से मुल्ला बरादर की मौत की खबर के खंडन के लिए ऑडियो का सहारा लिया गया, उससे एक बात तो साफ है कि कुछ गड़बड़ तो है. चाहें मुल्ला बरादर मारा गया हो या वह बुरी तरह से घायल हो. इस बीच भारत के लिए सबसे खतरनाक बात ये है कि काबुल अब पूरी तरह से हक्कानी नेटवर्क के हाथों मे हैं. काबुल क्रोनिकल कहता है, "काबुल पर हक्कानी नेटवर्क की पकड़ मजबूत है और हक्कानी नेटवर्क, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के भाड़े के हत्यारों की तरह है." कुल मिलाकर अफगानिस्तान में आईएसआई का इतना मजबूत होने भारत के लिए बुरी खबर है और भारत को अब बहुत ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत होगी.