हम सब चलते फिरते भगवान राम और हनुमान की तस्वीरें देखते होंगे. ज़्यादातर गाड़ियों-मोटरसाइकिलों पर ये स्टीकर लगे होते हैं. इन स्टीकर में हनुमान जी या भगवान राम को भगवा रंग में बिल्कुल गुस्से में दिखाया जाता है. दोनों भगवान ऐसे गुस्से में नजर आते हैं जैसे कि बस अभी विनाश करने लगेंगे. वैसे तो हमारे भगवानों के अलग-अलग रूप हैं और उन्हें उन रूपों में पूजा जाता है लेकिन यहां जिस परिपेक्ष्य में इन स्टीकरों का इस्तेमाल किया जा रहा है वह थोड़ा अलग है.

दरअसल गुस्से वाले हनुमान जी और भगवान राम कट्टर हिंदुत्व के प्रतीक हैं. इनके ज़रिए कहीं न कहीं यह कहने की कोशिश की जाती है कि अब हिंदू भी गुस्से में है और वो चुप नहीं बैठेगा. भगवान राम को हिंदुत्व की राजनीति में हमेशा से आगे रखा गया है पर बाबरी विध्वंस से लेकर पिछले कुछ साल पहले तक भगवान राम का ऐसा गुस्से वाला स्वरूप कभी नहीं दिखा लेकिन पहले हनुमान फिर भगवान राम दोनों के स्वरुपों में ऐसा बदलाव आया कि उन्हें 'गुस्से में लाल' कर दिया है. कई बार हम कुछ चीज़ों को छोटा बताकर के छोड़ देते हैं लेकिन दरअसल उनके बड़े मायने होते हैं. भगवान राम और हनुमान हमारे धर्म के सबसे बड़े स्तंभों में से एक हैं और हमें उनके आदर्शों पर चलने के बारे में कहा जाता है. इसलिए, ज़रूरी है कि अगर हम अपने धर्म और आपने आराध्यों को जानें. कम से कम अपना गुस्सा या अपनी नफरत बेवजह अपने आराध्यों पर न थोपने लगें. उनसे सीखें कि उन्होंने अपने दुश्मनों को कैसे परास्त किया, अपने माता-पिता से कैसा व्यवहार किया, न कि अपनी सोच का लबादा ओढ़ाकर उन्हें पेश कर दें.

पूरी रामायण में भगवान राम की सौम्यता को उनका सबसे बड़ा गुण बताया गया है. उन्होंने तमाम राक्षसों को मारा लेकिन कभी भी इस बात की चर्चा नहीं आती कि भगवान राम गुस्सा हुए हों. यहां तक कि उनकी पत्नी का हरण करने वाले रावण को भी उन्होंने ज्ञानी बताया और लक्ष्मण को उससे ज्ञान हासिल करने के लिए भेजा. धनुष तोड़ने के बाद जब भगवान परशुराम आकर नाराज हुए और लक्ष्मण से उनका विवाद हुआ तो भी भगवान राम ने सौम्यता से सभी को शांत किया. कुल मिलाकर भगवान राम के चरित्र में ज्ञान, सौम्यता और बल मुख्य चीजें थीं. उन्होंने इंद्र को हराने वाले रावण को हराया लेकिन उनकी सौम्यता बरकरार रही.

भगवान राम की तरह ही हनुमान की भी छवि रही है. मुख्य रूप से उनकी छवि एक रामभक्त की थी जो उनके लिए कुछ भी कर सकता था. भगवान हनुमान का सबसे प्रचंड रूप तब माना जाता है जब उन्होंने लंका जलाई थी, लेकिन उस समय भी चाहें रामचरित मानस हो या टीवी की रामायण उन्हें इस तरह से गुस्से में नहीं दिखाया गया है. कुल मिलाकर हनुमान की छवि भी वही है कि बलशाली बहुत हैं लेकिन उनके अंदर भी सौम्यता है.

आज के दौर में दोनों भगवानों के ये स्टिकर गाड़ियों पर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों की प्रोफ़ाइल पिक्चरों में मिल जाते हैं. ये दिखाता है कि कट्टर हिंदुत्व की वजह से हम अपने धर्म को लेकर ही भ्रांतियां पैदा कर रहे हैं. कम से कम जिस धर्म के नाम पर लड़ने का दावा करते हैं उसकी बुनियादी चीज़ों से तो छेड़छाड़ न करें. बाकी अगर किसी में आपको शत्रु नजर आ रहा है तो उसे भगवान राम की तरह से परास्त करने की कोशिश कीजिए. शांति, धैर्य और बल से न कि गुस्से में पागल होकर.