दया याचिकाओं का भारत में इतिहास

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Nishant Trivedi Mon, 07/03/2017 - 00:00 Pranab Mukherji, Mercy Petition

भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल पूरा होने वाला है। अपने कार्यकाल के दौरान मुंबई बम धमाकों के आरोपी याकूब मेमन की दया याचिका ठुकराने वाले प्रणव ने हाल ही में 2 और याचिकाओं को ठुकराने के साथ ही 30 दया याचिकाओं को ठुकरा दिया। याकूब मेमन के अतिरिक्त अफजल गुरू और अजमल आमिर कसाब की दया याचिकाओं को भी महामहिम ने ठुकरा दिया था। इन दया याचिकाओं के पहले अब्दुल कलाम ने एक बालिका के साथ दुराचार के दोषी धनंजय चटर्जी की दया याचिका को खारिज कर दिया था जिसके बाद ये काफी शब्द चर्चा में आ गया था। हालांकि बाद  में डा. कलाम ने मौत की सजा को खत्म करने की वकालत की थी।
भारत में उस व्यक्ति जिसे मृत्युदंड देने में देर की गई हो या वो मानसिक रूप से विक्षिप्त हो को ये अधिकार है कि राष्ट्रपति के पास मृत्युदंड को आजीवन उम्रकैद में बदलने के लिए अपील कर सके। दरअसल अनुच्छेद 21 के तहत प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार का ये उल्लंघन माना जाता है। इस कारण भारत के राष्ट्रपति को अनुच्छेद 72 के तहत ये अधिकार प्राप्त है वो किसी भी व्यक्ति को क्षमादान दे सकता है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. सथशिवम और न्यायमूर्तिगण रंजन गोगोई तथा शिवकीर्ति सिंह की तीन सदस्यीय पीठ ने 2014 में इस अनुच्छेद की व्याख्या करते हुए इसे राष्ट्रपति के विशेषाधिकार या किसी दया का नहीं बल्कि देश की जनता के प्रति एक संवैधानिक कर्तव्य के रूप में प्रदर्शित किया है। इसके तहत राष्ट्रपति दया याचिका आने के बाद इसे गृह मंत्रालय या राज्य सरकार में भेज देते हैं जिनकी सिफारिश के अनुसार राष्ट्रपति अपना फैसला सुनाता है।
डीएनए डाट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार 1 सितंबर 2015 तक 26 जनवरी 1950 के बाद से 437 दया याचिकाएं आईं थीं जिनमें से 306 को राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार कर लिया गया। इन 306 को मृत्युदंड से उम्रकैद में बदल दिया गया था। 1950 से 1982 के दौरान देश में कुल 6 राष्ट्रपति हुए और इस दौरान कुल 263 दया याचिकाएं दायर हुईं और सिर्फ एक याचिका को ठुकराया गया।
भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के पास कुल 181 दया याचिकाएं दायर हुईं जिनमें से उन्होंने 180 को स्वीकार कर लिया। डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने कार्यकाल दायर हुई सभी 57 दया याचिकाओं को स्वीकार कर उम्रकैद में बदल दिया। राष्ट्रपति जाकिर हुसैन और वीवी गिरी ने सभी दया याचिकाओं को स्वीकार कर उम्रकैद में बदल दिया। फखरूद्दीन अली अहमद और नीलम संजीव रेड्डी ने अपने कार्यकाल के दौरान कोई भी दया याचिका नहीं प्राप्त की।
1982 से 1997 के दौरान तीन राष्ट्रपतियों ने कुल 93 याचिकाओं में से मात्र 7 को उम्र कैद में बदला दिया। ज्ञानी जैल सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान 32 में से 30 दया याचिकओं को ठुकराया जबकि आर वेंकटरमन जी ने सबसे ज्यादा 50 में से 45 दया याचिकाओं को ठुकराया। जबकि शंकर दयाल शर्मा जी ने उनके सामने रखी गई सभी 18 दया याचिकाओं को ठुकरा दिया।
1997 से 2007 के दौरान राष्ट्रपतियों ने प्राप्त की गई अधिकतर दया याचिकाओं पर कोई कारवाई नहीं की और इस दौरान सिर्फ 2 याचिकाओं को निबटाया। राष्ट्रपति के आर नारायण ने अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी दया याचिका पर कोई कारवाई नहीं की जबकि अब्दुल कलाम ने धनंजय चटर्जी की दया याचिका ठुकराई जबकि एक को उम्रकैद में बदला। प्रतिभा पाटिल ने अपने कार्यकाल के दौरान 39 में से 5 को दया याचिकाओं को ठुकरा दिया था।
(लॉ कमीशन के अनुसार कुछ पूर्व राष्ट्रपतिओं के ये ऑकड़ें हो इन्हें अभिलेखागार से निकाला गया है जिसके कारण हो सकता है कि ये पूरे न हो।)

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