मौका पाते ही टोंटी चुराना, हम भारतीय ही नहीं विदेशी भी करते है!

Tue, 07/03/2018 - 02:10

अक्सर भारतीय रेलों में शौचालयों में डिब्बे कहीं न कहीं बंधे नजर आते हैं. कारण होता है कि अगर ये बांधे न जाएं तो लोग इन्हें चुरा ले जाएंगे.इसी तरह खबर आती है कि कई नई ट्रेनें चलाई जाती हैं लेकिन उनकी कई व्यवस्थाएं इसी तरह लोगों द्वारा बर्बाद कर दी जाती हैं.बीते दिनों यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने जब सरकारी बंगले को खाली किया उसके बाद उसमें काफी चीजें टूटी मिलीं और संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा था.

उस घटना की तुलना भी भारतीय रेल से डिब्बे चुराने वालों के साथ की गई.इस तरह भारतीयों की अपने बारे में ही ये एक धारणा बनती है कि भारतीय लोग ही इस तरह की हरकतें करने में माहिर हैं लेकिन जिस घटना का मैं जिक्र करने वाला हूं उसके बाद अगर आप भी इस भ्रम में रहते हैं तो निश्चित तौर पर आपका वो भ्रम टूटेगा.

बीते दिनों अमेरिका के विस्कांसिन प्रांत के वेस्ट बेंड सिटी में वालमार्ट के स्टोर में एक व्यवस्था लागू की गई.दरअसल ये जमाना लगातार मशीनीकरण की ओर बढ़ रहा है.ऐसे में वालमार्ट के स्टोर में लोगों की जगह मशीनों को बिलिंग के लिए लगाया गया. इसके पीछे लोगों को जो वेतन दिया जाता था उसे बचाने का उद्देश्य था.

नई व्यवस्था के तहत खरीददार खुद आए ,सामान खरीदे और मशीन( जिस पर बार कोड रीडर लगा है) के जरिए अपने सामान की बिलिंग करे और चुपचाप चला जाए.ये सिस्टम पढ़ने में आसान है और लगता है कि वाकई इसमें तो कोई दिक्कत नहीं लेकिन एक मशीन आखिर मशीन है.दरअसल ये मशीनें पैंकिंग युक्त सामान के लिए तो ठीक थीं लेकिन खुले सामान की बिलिंग के लिए (जो चीजें तौलकर खरीदी जाती हैं)के लिए सही नहीं थीं.

दरअसल इस सामान की बिलिंग के लिए लोगों को अपने सामान की मात्रा खुद मशीन में दर्ज करनी पड़ती थी. ऐसे में लोगों ने फायदा उठाना शुरू किया. वो चीजें ज्यादा लेते थे और मशीन में दर्ज कम करते थे और ये काम 2-3 लोगों ने नहीं किया बल्कि तमाम लोगों ने करना चालू कर दिया. ऐसे में वालमार्ट को काफी घाटा होने लगा.उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है.कुछ दिन की पड़ताल के बाद अमेरिकियों का यह सच सामने आया. कुछ दिन बाद वो मशीनें स्टोर से हटा ली गईं.अचानक मशीनें गायब होने पर वहां की एक कर्मचारी से पूछने पर पता चला कि आखिर माजरा क्या है.फिलहाल वहां बिलिंग के लिए फिर से लोगों की वापसी हो गई है.

कहा जा रहा है कि मशीनें अपग्रेड होकर वापस आएंगी.हो सकता है आएं और फिर से लोग नौकरियों से हटा दिए जाएं पर ये घटना अपने में कुछ कहती है-

1.भारतीयों को अपनी इस आदत को लेकर खुद को अलबेला नहीं समझना चाहिए.घटनाएं सामने नहीं आतीं वर्ना हालत तमाम देशों की यही होगी. इसलिए मौके का फायदा उठाना सामान्य मानवीय स्वभाव है.

2.तकनीक अपनी जगह है और इंसान अपनी जगह है. जिस तरह लोहा लोहे को काटता है उसी तरह इंसान ही इंसान को पछाड़ सकता है.

(उपयुक्त घटना वेस्ट बेंड में रह रहे एक भारतीय नागरिक द्वारा बताई गई है)

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