व्यंग: "लड़के वाले है" या परचून वाला बनिया

Wed, 07/25/2018 - 01:54

आपको याद होगा कि हमने आपको एक बार भारतीय समाज के फूफा के क्रूर कृत्यों के बारे में बताया था. आज भी हम आपको इसी तरह की क्रूर प्रजाति के बारे में बताने जा रहे हैं. ये भी हमारे आपके बीच की ही है और कभी कभी हम आप भी उस प्रजाति के रोल में आ जाते हैं

दरअसल आज हम आपको मिलवाने वाले हैं 'लड़के वालों' से. ओह्हो लड़के वालों के बारे में बोला क्या कि लिस्ट की याद अपने आप गई. दरअसल घर का कुछ सामान लाना है और बग़ैर लिस्ट के मैं कभी आज तक पूरा सामान ला नहीं पाया. अब आप सोच रहे होंगे की ये लिस्ट का भला लड़के वालों से क्या संबंध. दरअसल ये लड़के वाले हमेशा हाथ में लिस्ट थाम कर रखते हैं.

शुरूआत ये करते हैं अपने सुकुमार बेटे के गुणों की लिस्ट से. लंबाई से लेकर तनख़्वाह तक का ज्ञान ऐसे बताएगें की मिलावटी धनिया बेचने वाला बनिया भी शरमा जाए. पूरा ध्यान इस पर रहेगा की उनका सुकुमार आपकी लड़की से हमेशा 21 ही रहे.

खैर अपने प्रोडक्ट की मार्केंटिंग करने के बाद आपसे डिमांड होती है आपकी बेटी के गुणों की लिस्ट की.वहां फिर नापतौल शुरु.मतलब लंबाई कितनी है, अरे ये फोटो में हीलदार सैंडल पहने हैं तो अपने सुकुमार के कंधे तक ही होगी और रंग में भी 19 ही रहेगी.

इसी बीच लड़के के पिताजी बार बार ये दोहराएँगे की वो धर्म कर्म वाले आदमी हैं.उन्हें पैसे का कोई मोह नहीं है बस लड़की अच्छी होनी चाहिए जो परिवार को साथ रखे

अब इतना होने के बाद मामला असली लिस्ट तक आता है. मचलब वही अपनी शादियों वाली ख़रीद फ़रोख़्त जिसे सभ्य समाज में दहेज के नाम से जाना जाता है.इस लिस्ट में पूरा ज्ञान होगा कि कितना आपको कैश देना है और कितना सामान. लड़के वाले जरूर ये लिस्ट देने से पहले अपने घर का कोना कोना छान मारते होंगे की घर में जो कम हो वो लड़की वालों से मँगवा लो.और हर सामान की अलग क़्वालिटी मतलब अपने पैसे से ख़रीद पाने का दम न हो वो लड़की वालों से मँगवा लो जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट की सेल लगी है कि बटोर पाओ वो बटोर लो वर्ना फिर पता नहीं कब मौक़ा मिले.

अब इतना होने के बाद अग़र लड़की वाले की तथा हुई तो वो बेचारा तैयार हो जाएगा कि चलो ठीक है. अब मामला आया लड़की की दिखाई पर. यहां लड़के वाले फिर अपनी लिस्ट पेश करेंगे. सुकुमार की पसंद, सुकुमार की अम्मा की पसंद , बहन की पसंद अलग,बुआ की पसंद अलग, जीजा हैं तो उनकी पसंद अलग.और मज़े की बात ये है कि अग़र कोई भाभी हैं (जिन्होंने हाल ही में इसी तरह की परीक्षा पास की है) उनकी भी कुछ फ़रमाइश हो सकती है.

लड़की के चाल,ढाल,रंग-रूप और बातचीत की एक लिस्ट बनेगी. घर भर उसमें अपने नंबर देगा आखिर में रिज़ल्ट वही है लड़की तो सुकुमार से 19 है लेकिन चूँकि पैसे पर बात पक्की है तो छोड़ो,लड़के वाले बिचारे ये त्याग करने के लिए तैयार हो गए. मुबारक हो लड़की पसंद है शादी पक्की हो गई.

अब शादी में कितनी साड़ियाँ लगेंगी , मामा के बर्तन अलग हैं, वो कलेवा में कितने लोगों के पैर छुने हैं और सबको कितनी कितनी दक्षिणा देनी है.इसकी लिस्ट भी जल्द पेश होगी. और शादी के बाद तो मान लो लड़की के सामने साल भर में ख़ुशख़बरी देने से लेकर खाने में क़ौन कितना नमक खाएगा ये लिस्ट पेश होनी ही है.
कुल मिलाकर शादी के पहले और शादी के बाद लड़के वालों का काम है प्रिंटिंग प्रेस की तरह डिमांड की लिस्टें छापना और लड़की वालों का काम है कि बग़ैर चू-चपट सारीं लिस्टें क्लियर कर दो. अगर थोड़ी भी गर्मी दिखाई तो लड़की ज़िंदगी भर ताने सुनेगी,

कुल मिलाकर इन लड़के वालों को अग़र 'लिस्ट वाले' कहकर भी बुलाया जाए न तो गलत नहीं होगा.खैर ये सब तो भारत में आम बात है होती रहेगी मैं जा रहा हूँ अपनी लिस्ट के साथ बाज़ार सामान लानें.वैसे भी दादा आजकल कहतें हैं कि आलसी हो रहे हो पता नहीं मोबाइल पर क्या करते रहते हो. नमस्कार

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