कोरोना वायरस से इस समय पूरी दुनिया परेशान है. दुनियाभर के डॉक्टर और नर्स कड़ी मेहनत से लोगों को बचाने में लगे हुए हैं. ऐसे ही ब्रिटेन के एक डॉक्टर डेवि़ड नॉट ने कोरोना को वायरस के संकट में काम करने के अनुभव को युद्धग्रस्त सीरिया में भी काम करने से ज्यादा बुरा बताया है. डेविड नॉट दुनिया के उन कई देशों में काम कर चुके हैं जो युद्ध प्रभावित हैं. नॉट अपना अनुभव बताते हुए कहते हैं, "ये उतना ही बुरा है जितना सीरिया के अलेप्पो में किसी बच्चे को आंखों के सामने मरते देखना".

ब्रिटिश अखबार संडे टाइम्स को इंटरव्यू देते हुए डॉक्टर नॉट ने कोरोना को अब तक उन सभी संकटों में सबसे डरावना बताया जिनका उन्होंने सामना किया है. डॉक्टर नॉट ने कहा कि कोरोना संकट को डॉक्टरों और नर्सों को भावनात्मक रूप से भी तोड़ देता है, ऐसे में उन्हें डिप्रेशन की समस्या भी हो सकती है. वो कहते हैं कि मैंने अपने जीवन में कभी कल्पना नहीं की थी कि ब्रिटेन में डॉक्टरों को इलाज करते वक्त ये तय करना होगा कि किस मरीज का इलाज किया जाए, जिसको बचाने की कोशिश बेकार नहीं जाएगी.

डॉक्टर नॉट संकट के इस दौर में काम करने वाली नर्सों को असली हीरो मानते हैं. वो कहते हैं, "मैंने उन्हें इससे पहले इतना काम करते हुए कभी नहीं देखा. एक एक मरीज का ध्यान रखा जा रहा है और उसे ठीक करने की कोशिश की जा रही है, हांलाकि कई बार हम लोगों को नहीं बचा पाते." डॉक्टर नॉट बताते हैं कि कोरोना हर एक उम्र वर्ग के लोगों को हो रहा है, "मेरी यूनिट में 20,30,40 और 50 हर उम्र वर्ग के मरीज हैं. इनमें से कुछ की हालत तेजी से गंभीर हो जाती है जबकि कुछ बीमारी होते हुए भी ठीक रहते हैं. ऐसा क्यों होता है, ये एक बड़ा रहस्य है." हालांकि बुजुर्ग मरीजों को कोरोना ज्यादा परेशान करता है. इन लोगों को सांस लेने में ज्यादा परेशानी होती है.

भारत के तमाम डॉक्टरों की तरह ही डेविड नॉट ने भी अपनी पत्नी और दो बच्चों को खुद से अलग कर दिया है. हालांकि डॉक्टर नॉट कहते हैं कि कोरोना का संकट लोगों को एक नई सोच के साथ सोचने को मजबूर करेगा. ",लोग महसूस करेंगे कि मानव जाति एक है. हम इस संकट में एक साथ हैं और हम सभी में से कोई भी इसका शिकार हो सकता है.