विकिलीक्स के संस्थापक और व्हिसिल ब्लोअर जूलियन असांजे इन दिनों बुरी हालत में हैं. वो इन दिनों इंग्लैंड की बेलमार्श जेल में बंद हैं. संयुक्त राष्ट्र के विशेष अधिकारी नील्स मेजर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि असांजे को जेल में बुरी तरह से यातनाएं दी जा रही हैं. नील्स के साथ दो डॉक्टरों ने उस जेल का दौरा किया था जहां असांजे को बंद किया गया है. नील्स के मुताबिक असांजे की हालत किसी ऐसे शख्स की तरह है जिसे मानसिक रूप से बहुत ही ज्यादा प्रताड़ित किया गया हो. नील्स ने ब्रिटेन, अमेरिका, स्वीडन और इक्वाडोर पर असांजे की ये हालत करने का आरोप लगाया है. उन्होंने चेताया है कि अगर असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया तो असांजे का हाल और भी ज्यादा बुरा हो सकता है.

नील्स की रिपोर्ट के कुछ अहम पहलू ये हैं-

1. असांजे को महज 2 मीटर लंबी और 3 मीटर चौड़ी जेल में रखा जा रहा है. इसकी ऊंचाई भी 3 मीटर है. वो हफ्ते में 15 पाउंड खर्च कर सकते हैं. ये खर्चा फोन कॉल, पेन और कागज जैसी जरूरतों के लिए है. उन्हें हर दिन अपनी सेल से निकलकर बाहर आने के लिए 30 से 60 मिनट का वक्त मिलता है. हालांकि ये मौसम के मिजाज पर है कि उनको अनुमति मिलेगी या नहीं. आम तौर पर असांजे को और कैदियों के साथ बातचीत करने और काम करने की इजाजत थी लेकिन 18 जुलाई के बाद ये भी रूक गया. खराब स्वास्थ्य की वजह से उन्हें जेल की हेल्थ यूनिट में रखा गया. उनका वजन लगातार गिर रहा था. अब उनके वकील से मिलने और कंम्प्यूटर के इस्तेमाल पर भी पाबंदी है. खासबात है कि कंम्प्यूटर चलाने की अनुमति भी उन्हें बगैर इंटरनेट के थी. इससे उनकी खुद के खिलाफ चल रहे केस की तैयारियों पर असर पड़ रहा है.

2. नील्स के साथ तीन डॉक्टरों ने असांजे की हालत का जायजा लिया था. असांजे सात साल इक्वाडोर दूतावास में रहे. इस दौरान वो बिल्कुल भी बाहर नहीं निकले. इसके बाद वो सीधे बेलमार्श जेल चले गए. डॉक्टरों ने अपने चेकअप में बताया है कि असांजे बुरी तरह से मानसिक रूप से बीमार हैं. उन्हें नींद न आने की समस्या है. भावनात्मक तौर पर भी वो बहुत ज्यादा ही परेशान हैं. डॉक्टरों के मुताबिक असांजे को तुरंत उनकी पसंद के मनोचिकित्सक से इलाज की जरूरत है जो किसी भी तरह से प्रशासन से जुड़ा हुआ न हो. उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है.

3. नील्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्वीडन में असांजे पर रेप का आरोप 2010 में लगा था. उसके बाद असांजे ने जांच में पूरा सहयोग किया. जांच के दौरान असांजे के खिलाफ सबूत नहीं मिले. रेप केस 2010 में आरोप लगने के महज 5 दिन बाद ही बंद कर दिया गया था. जांचकर्ता ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि असांजे ने कोई अपराध नहीं किया. नील्स के मुताबिक बीते 9 सालों में जानबूझकर असांजे को परेशान करने के लिए रेप केस को 3 बार से ज्यादा दोबारा खोला गया. नील्स के मुताबिक इन्हीं फर्जी केसों की वजह से असांजे को इस तरह से जेल में रहना पड़ा. इतना ही नहीं इक्वाडोर के दूतावास में भी असांजे को तमाम तरह की यातनाएं दी गई थीं. जिसकी वजह से आखिर में असांजे को दूतावास से निकलना पड़ा और उनकी गिरफ्तारी हो गई.

4. नील्स अपनी रिपोर्ट में ये आशंका जताते हैं कि अगर असांजे को अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया तो उनकी हालत और भी खराब हो सकती है. वो लिखते हैं कि अमेरिकी असांजे की खराब हालत के जरिए ये संदेश देने की कोशिश करेगा कि जो असांजे की तरह करेगा उसका हाल उन्हीं की तरह बुरा कर दिया जाएगा. वो लिखते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम अमेरिकी अधिकारियों को तमाम पॉवर मिले हैं. हालत ये है कि जब नील्स ने भी अमेरिका की जेलों का दौरा करना चाहा तो संयुक्त राष्ट्र का होते हुए भी उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली.

उधर स्वीडन और अमेरिका ने इन आरोपों का खंडन किया है. अमेरिका ने असांजे के जेल में होने के पीछे अपने हाथ होने को पूरी तरह से गलत बताया है. आपको बता दें कि असांजे की वेबसाइट विकिलीक्स ने 2010 बड़ी संख्या में सेना से जुड़े अमेरिकी गोपनीय दस्तावेजों को पब्लिश किया। इसके अलावा असांजे ने अफगानिस्तान और इराक युद्ध से जुड़े दस्तावेजों को भी सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद अमेरिका में असांजे को बहिष्कृत कर दिया गया. इतना ही नहीं विकिलीक्स के लीक किए गए केबलों ने भारतीय राजनीति में भी उबाल दिया था. उस वक्त की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस इससे बैकफुट पर चली गई थी.