युद्ध से प्रभावित देश लीबिया में एक हथियारबंद समूह ने राजधानी त्रिपोली और इसके आसपास के क्षेत्रों की पानी की सप्लाई बंद कर दी है. ऐसे में 20 लाख की आबादी वाले शहरों के लोगों के सामने भयंकर जलसंकट पैदा हो गया है. भारत की तरह लीबिया में भी गर्मी बढ़ रही है ऐसे में युद्ध से पहले से ही परेशान इस देश के लोगों की समस्याएं और बढ़ने वाली हैं.

रविवार को कुछ हथियारबंद लोग जाफरा नाम के शहर में पहुंचे. यहां वाटर प्रोजेक्ट का पूरा कंट्रोल रूम बना हुआ है. इन लोगों ने वाटर प्रोजेक्ट के तहत बने उन पाइप लाइन में पानी की सप्लाई रोकने के लिए अधिकारियों को मजबूर किया. इस प्रोजेक्ट के तहत पानी की पाइपलाइन का एक लंबा जाल बिछा हुआ है जिनके जरिए सहारा से राजधानी त्रिपोली और उसके आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जाता है. इस वाटर प्रोजेक्ट की शुरुआत लीबिया के तानाशाह कर्नल मोहम्मर गद्दाफी ने की थी.

लीबिया प्रशासन ने इस कदम की आलोचना की है बयान दिया है, "पानी सभी को दिया हुआ ईश्वर का उपहार है और किसी भी हालत में किसी भी कब्जा करने या सौदैबाजी में इसका इस्तेमाल नहीं होना चाहिए." पानी की सप्लाई इस तरह बंद होने से न केवल त्रिपोली बल्कि उसके आसपास के कई पहाड़ी शहर प्रभावित होंगे. अभी तक इस बात की जानकारी नहीं है कि पानी की सप्लाई कब तक दोबारा शुरू की जा सकेगी. प्रशासन पहले भी कह चुका है कि भीषण लड़ाई के चलते पाइपलाइन में लीक ढूंढना और उन्हें ठीक करना मुश्किल है. लीबिया काफी समय से जलसंकट से परेशान रहा है और ये घटना बताती है कि लीबिया की लड़ाई में आम नागरिक किस तरह से फंसे हुए हैं.

माना जा रहा है कि इस कारनामे के पीछे विद्रोही खलीफा हफ्टार के समर्थकों का हाथ है. खलीफा हफ्टार लीबिया के विद्रोही गुट लीबियन नेशनल आर्मी का नेता है. लीबियन नेशनल आर्मी का पूर्वी और दक्षिणी लीबिया में खासा प्रभाव है और वो लगातार राजधानी त्रिपोली पर कब्जा करने की फिराक में है. त्रिपोली पर अभी संयुक्त राष्ट्र समर्थित सेना गर्वनमेंट ऑफ नेशनल एकॉर्ड का कब्जा है. हालांकि कुछ लोग हिफ्टार के इसके पीछे होने को नकारते हैं. उनका दावा है कि ये काम किसी स्वतंत्र रूप से काम कर रहे किसी विद्रोही गुट का है. इनका मानना है कि संयुक्त राष्ट्र समर्थित सरकार समर्थन जुटाने के लिए हिफ्टार की सेना के साथ इसको जो़ड़ रही है.
आपको बता दें कि लीबिया में लंबे समय तक तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी का शासन रहा और 2011 में नाटो सेनाओ के हमलों में गद्दाफी की मौत हो गई. इसके बाद से लीबिया लगातार युद्ध से जूझ रहे हैं.