फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो आजकल इस्लामिक देशों के निशाने पर हैं. फ्रांस में एक टीचर की सिर काटकर हत्या कर दी गई थी, इसके बाद मैंक्रों ने इस्लामिक कट्टरपंथ को लेकर अपनी राय खुले शब्दों में रखी. इसके बाद, वो इस्लामिक देशों के निशाने पर आ गए. मैंक्रों को एक उदारवादी चेहरे के तौर पर जाना जाता रहा है, उनकी हाल की ये प्रतिक्रिया, अब तक की उनकी छवि के विपरीत है. इस सबके बीच, आखिर भारतीय मुस्लिम कहां हैं, उनकी राय देश और दुनिया को कब पता चलेगी.

इस्लामिक देश अब फ्रांस के सामान का बहिष्कार करने की बात कह रहे हैं. इस्लाम और इस्लामिक देशों के साथ, आज के समय की सबसे बड़ी समस्या यही है कि ये लोग अपने अंदर झांकना पसंद नहीं करते. अगर सामने वाला सच कहे तो उस पर उल्टा हल्ला बोल देते हैं. इस्लामिक कट्टरपंथियों को अपनी इस गतिविधि में दुनिया के कथित लिबरल समाज का सहारा भी मिलता है. इनमें से किसी भी देश ने फ्रांस में उस टीचर की निर्मम हत्या की आलोचना नहीं की होगी. वो टीचर जो कुछ दिनों पहले, फ्रांस के दक्षिणपंथियों के खिलाफ जाकर, 'वेलकम रिफ्यूजी' का कार्ड बोर्ड लिए था, उन्हीं रिफ्यूजी के समान धर्म के एक शख्स की धर्मांधता का शिकार हो गया. सोचिए, इस टीचर के परिवार के लोग अब कभी भी फ्रांस में रिफ्यूजी का उस तरह से बाहें फैलाकर स्वागत कर पाएंगे और क्या पूरी इस्लामिक दुनिया को उस भरोसे को दोबारा कायम करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए थी.

बजाय टीचर की हत्या की आलोचना करने, सद्भभाव की बात करने के इस्लामिक देश अब इमैनुएल मैंक्रों के ऊपर हावी होने की कोशिश कर रहे हैं. दुनियाभर से कर्ज लेकर अपनी रोटी चलाने वाला पाकिस्तान भी मैंक्रों की आलोचना कर रहा है. भारतीय मुस्लिम, इस पूरे मसले पर चुप्पी साधे बैठें हैं जबकि ये समय है एक अहम संदेश देने का है. इंसानियत का संदेश देने का समय है. ये समय, ये दिखाने का है कम से कम भारत के मुस्लिम, इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ बोलने को तैयार हैं.

आज इस्लामिक देश भले ही फ्रांस पर एकजुट होकर हमले कर रहे हों लेकिन वास्तविकता में ये देश आपस में ही मारकाट मचाए रहते हैं. यमन और सीरिया की हालत किससे छिपी है. तुर्की इस्लामिक देशों का नेता बनने की कोशिश कर रहा है, सऊदी अरब और ईरान भी प्रभुत्व की लड़ाई में छोटे-छोटे देशों की हालत खराब करते रहते हैं. आज जो शरणार्थी, फ्रांस और यूरोप में हैं वो इन्हीं इस्लामिक देशों के आपसी टकराव के शिकार हैं. तमाम निर्दोषों की मौत के जिम्मेदार देश आज फ्रांस का बायकॉट करके, पूरी दुनिया के मुस्लिमों को कट्टरपंथ के कुएं में घुसे रहने को मजबूर कर रहे हैं. इसी कट्टरपंथ के सहारे, ये देश अपनी नफरत की खेती करके तमाम दाम कमाते रहे हैं. ये देश नहीं चाहते कि इनकी कमाई बंद हो.

आज वक्त है कि भारतीय मुस्लिम, तमाम इस्लामिक देशों से अलग एक परिपक्व राय दुनिया के सामने रखें. जिसमें सद्भाव का संदेश हो और सच को स्वीकार करने की विनम्रता हो. मुस्लिमों का मौन, इस्लामिक देशों के साथ उनकी सहमति को प्रदर्शित करता है. इन देशों में पाकिस्तान जैसा देश का दुश्मन भी शामिल है जहां इस्लामिक कट्टरपंथ के नाम पर ही तमाम नौजवानों को भारत के खिलाफ भड़काया जाता है. भारत को जो कथित बुद्धिजीवी समाज है उसे भी इस बारे में पहल करनी चाहिए. इससे देश के अंदर के तमाम इस्लामिक कट्टरपंथियों को भी उदारवाद की राह पर लाने में थोड़ी मदद मिलेगी.