श्रीलंका ने संडे ईस्टर पर हुए 8 सीरियल बम धमाकों के बाद 200 मौलानाओं को देश से निकाला है. इन मौलाना समेत कुल 600 विदेशी नागरिकों को देश से निकाला जा चुका है. इन लोगों पर आरोप है कि ये लोग वीजा खत्म होने के बाद श्रीलंका में रह रहे थे. उधर धमाकों के बाद लगातार दूसरे हफ्ते श्रीलंका में लोगों ने कैथोलिक चर्च के बजाय घरों में ही प्रार्थना की. आपको बता दें कि रविवार को केरल में भी इन सीरियल बम धमाकों के मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया गया.

श्री लंका के गृह मंत्री वाजिरा अभयवर्द्धने ने 600 विदेशी नागरिकों को निकाले जाने के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इन लोगों पर जुर्माना भी लगाया गया है. उन्होंने कहा, " 'देश में सुरक्षा की ताजा स्थिति को ध्यान में रखते हुए हमने वीजा प्रणाली की समीक्षा की और धार्मिक शिक्षकों के लिए वीजा प्रतिबंध को कड़ा करने का निर्णय लिया. इन 600 विदेशी नागरिकों में 200 मौलाना भी शामिल है." उधर आतंकी हमलों के बाद दो सप्ताह बाद अब श्रीलंका में सोमवार को स्कूल खोले जाएंगे. हमलों के बाद फैली दहशत की वजह से इन्हें बंदकर दिया गया था. सोमवार को सरकारी स्कूलों में दूसरे सत्र की पढ़ाई की शुरूआत होगी.

कोलंबो में 21 अप्रैल को ईस्टर के मौके पर हुए बम धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई थी और 500 से ज्यादा घायल हो गए थे. आतंकी संगठन ISIS ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी. हमले के बाद से लगातार संदिग्धों की गिरफ्तारी वहां जारी है. लंबे समय से मृत माने जा रहे ISIS सरगना अबू बकर अल बगदादी ने भी एक वीडियो जारी किया था जिसमें वो श्रीलंका हमलों के बारे में बात करते हुए दिख रहा था. श्रीलंका आज भले ही इस्लामिक आतंकवाद की चपेट में हो लेकिन इससे पहले वहां तमिल विद्रोहियों के समूह लिट्टे का भी आतंक था. 2008 में लिट्टे के प्रमुख वी प्रभाकरण को मार गिराने के साथ ही लिट्टे का सफाया हो गया था.