2006 में आज ही के दिन इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन को फांसी दे दी गई थी.सद्दाम पर अमेरिका ने रासायनिक हथियार बनाने का आरोप लगाया था.और न नष्ट करने पर इराकपर हमला कर दिया था.सद्दाम हुसैन 1979 से लेकर 2003 तक इराकके राष्ट्रपति रहे.इराकके कुर्द समुदाय के प्रति क्रूरता का रवैया रखने वाले सद्दाम को भारत का समर्थक माना जाता था.कहा जाता है की सद्दाम ने अपने पिता को कभी नहीं देखा था.उनके जन्म के 6 महीने पहले ही उनके पिता गायब हो गए और मां ने दूसरी शादी कर ली.सौतेले पिता के खराब बर्ताव से तंग आकर सद्दाम ने अपना घर छोड़ दिया.वो अपने मामा के घर रहे और उनकी बेटी से ही शादी की.वैसे सद्दाम ने कुल 3 शादियां की थीं.

राष्ट्रपति बनने के बाद आलीशान महल में जिंदगी जीने वाले सद्दाम के पास एक जमाने में खाने के पैसे नहीं थे.लॉ के छात्र रहे सद्दाम ने पढ़ाई पूरी किए बिना ही राजनीति में कदम रखा और बाथ पार्टी ज्वाइन की.इराकएक शिया बहुल देश था जिसमें सद्दाम ने एक सुन्नी होते हुए राज किया.कहा जाता है की इराकमें सद्दाम ने करीब ढाई लाख लोगों को क्रूरता से मौत के घाट उतरवा दिया था.सद्दाम के राष्ट्रपति रहते इराककी ब्रिटेन और अमेरिका के साथ 1991 में भी जंग हुई थी.जिसके बाद सद्दाम के तेवर ढीले पड़ गए थे.लेकिन देश के हालात ठीक होने के बाद सद्दाम ने एक बार फिर अमेरिका और पश्चिमी देशों की आलोचना करना शुरू कर दिया.2003 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और ब्रिटेन के पीएम टोनी ब्लेयर ने इराकपर रासायनिक हथियार रखने और अलकायदा से संबंध होने का आरोप लगाया और हमला कर दिया.

सद्दाम को 2003 में ही तिकरित में पकड़ लिया गया था और मुकदमा चलाया गया.मुकदमे के दौरान सद्दाम बेहद मुखर दिखे और अपने आखिरी भाषण में भी उन्होंने अमेरिका और बुश पर जमकर हमला बोला. बीबीसी हिंदी में रेहान फजल लिखते हैं की इराक की एक मस्जिद में सद्दाम के खून से लिखी कुरान रखी हुई है.जब आप सद्दाम के आखिरी भाषण को देखेंगे तो पाएंगे की सद्दाम इस्लाम को बेहद मानते थे.सुनवाई के दौरान नमाज का वक्त होने पर भी जज ने जब कोर्ट की कार्रवाई नहीं रोकी तो सद्दाम ने अपने भाषण में जज की आलोचना की.

सद्दाम ने कहा,"आप चाहें इराक के उस संविधान के बारे में बात करें जिस पर सद्दाम हुसैन ने भरोसा किया.या उस संविधान पर जिसे अमेरिकियों ने इराक पर थोपा है.लेकिन आप ये नहीं भूल सकते की इराक का कानून इस्लाम है.क्या अल्लाह नमाज के यहां गवाही पूरी होने का इंतजार करेगा ?"

महलों में रहने वाला सद्दाम भले ही मौत के दरवाजे पर खड़ा हो लेकिन उसकी अकड़ में कोई कमी नहीं आई थी.वो खुद को हमेशा तानाशाह ही मानते थे.सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा," उन्होंने मुझसे मेरी बेटी की दी हुई घड़ी छीन ली,वो कपड़े छीन लिए जो मैंने पहन रखे थे.लेकिन सद्दाम हुसैन की शख्सियत को उसके कपड़ो से नहीं तौला जा सकता है.इससे सद्दाम हुसैन और बड़ा होता है.छोटा नहीं." इतना ही नहीं भरी अदालत में सद्दाम ने खुद को शेर कहा.दरअसल जब सद्दाम बोल रहे थे उस दौरान कुछ लोग हंस पड़े जिन्हें जब रोका गया तो सद्दाम ने कहा,"उन्हें हंसने दो.एक शेर पेड़ पर बैठे बंदरों के हंसने की परवाह नहीं करता."

सद्दाम ने अपने भाषण में रासायनिक हथियार इराक में होने का हवाला देते हुए अमेरिका को दुनिया का सबसे बड़ा झूठा करार दिया.उन्होने कहा,"मैं हमेशा खुला बोलना पसंद करता हूं इसलिए अमेरिकी मुझे नापंसद करते हैं.व्हाइट हाउस झूठ बोलता है.वो झूठा है.वो दुनिया का नंबर एक झूठा है.उसने कहा की इराकमें रासायनिक हथियार हैं.इराक आतंकवाद का अड्डा है.और बाद में ये बताता है की इराक में हमें इनमें से कुछ नहीं मिला."

बीबीसी हिंदी के अनुसार जब सद्दाम को फांसी दी गई तो उनकी सुरक्षा में लगे अमेरिकी सैनिक भी रोए थे.ऐसे ही एक सैनिक के हवाले से बीबीसी लिखता है की सद्दाम को देखकर कहीं से भी नहीं लगता था की वो एक हत्यारे थे बल्कि उनमें उसे अपने दादा के नजर आते थे.एक और सैनिक के बारे में बीबीसी लिखता है सद्दाम ने उससे कहा की अगर मुझे मेरे धन का इस्तेमाल करने की अनुमति मिल जाए, तो मैं तुम्हारे बेटे की कालेज की शिक्षा का ख़र्चा उठाने के लिए तैयार हूँ.

कहा जाता है की सद्दाम को जिस रस्सी से फांसी दी गई उसमें किसी विशेष तार का इस्तेमाल किया गया था जिससे उनकी गर्दन कट गई थी.खास बात ये ही की जिस जज ने सद्दाम को फांसी की सजा सुनाई थी उसे भी 2014 में आईएसआईएस आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया था.