चीन पर उइगर मुस्लिमों के मानव अंग निकालने का आरोप लगा है. यह आरोप चीन पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक एनजीओ ने लगाया है. एनजीओ का आरोप है कि चीन उइगर और कई अन्य अल्पसंख्यकों के जिंदा रहते ही उनके शरीर से अंग निकाल रहा है. चाइना ट्रिब्यूनल नाम की संस्था ने ये आरोप लगाया है. हालांकि चीन ने इन आरोपों का खंडन किया है.

चाइना ट्रिब्यूनल के वकील हामिद साबी ने यू्एन में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके संगठन के पास ऐसे पुख्ता सबूत हैं जिनसे पता चलता है कि चीन में धार्मिक रूप से अल्पसंख्यक उइगर और कई प्रतिबंधित समूहों के लोगों के अंग जबरन निकाले जा रहे हैं. हामिद साबी ने सबूत के तौर पर चाइना ट्रिब्यूनल की जून में प्रकाशित आखिरी रिपोर्ट का हवाला दिया. रिपोर्ट के मुताबिक चीन में प्रतिबंधित फालौन संगठन के लोगों को सरकार के आदेश पर मारा गया और उनके शरीर से किडनी, फेफड़े, लीवर, हृदय, कॉर्निया और त्वचा जैसे अंग भी निकाल लिए गए. इन अंगों को सरकार द्वारा बेचा गया. रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन में मानव अंगों के प्रत्यारोपण के लिए अन्य देशों की तुलना में वक्त बहुत कम मिलता है. वेटिंग टाइम बेहद कम है.

साबी ने यूएन में कहा कि ऐसे सैकड़ों- हजारों लोग हैं जिनके मानव अंग निकाले गए हैं. साबी ने इस सदी का सबसे भयंकर अत्याचार बताया है. हालांकि चानना ट्रिब्यूनल ने एक निश्चित संख्या नहीं बताई है. जिन लोगों के मानव अंग निकाले गए हैं. वहीं चीन इन आरोपों से लगातार इनकार कर रहा है. चीन का दावा है कि उसने 2015 के बाद से कैदियों के शरीर से अंग निकालने बंद कर दिए हैं.

हामिद साबी ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात खत्म करते हुए कहा,"यूएन जैसी संस्था का काम है कि वो चाइना ट्रिब्यूनल की जांच में पाए गए तथ्यों की जांच करे और चीन के इस कृत्य को मानवता के खिलाफ अपराध के तौर पर देखा जाए."