अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने खिलाफ महाभियोग की जांच को लिंचिंग जैसा बताया है. व्हाइट हाउस के डिप्टी सेक्रेटरी होगान गिडली ने भी इसे राजनीतिक साजिश बताया है. ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति जो बिडेन के खिलाफ जांच शुरु करने के लिए यूक्रेन पर दबाव डाला. यूक्रेन को आर्थिक मदद रोकने की धमकी भी दी. दरअसल जो बिडेन 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं. ऐसे में ट्रंप पर आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए वो ऐसा कर सकते हैं. अमेरिका में महाभियोग की क्या प्रक्रिया है और क्या इस जांच के बाद डॉनल्ड ट्रंप अपने पद से हट जाएंगे ? ये जानकारी आज हम आपको देंगे-

क्या है महाभियोग की प्रक्रिया-

भारत की तरह अमेरिकी संसद के भी दो सदन हैं. निचला सदन हाउस ऑफ रिप्रेंजेंटेटिव है जबकि उच्च सदन का नाम सीनेट है. महाभियोग की प्रक्रिया निचले सदन यानि हाउस ऑफ रिप्रेंजेंटेटिव से शुरु होती है. निचले सदन में कोई एक सदस्य या पूरा हाउस महाभियोग के लिए जांच को शुरु करने का प्रस्ताव दे सकता है. इसके बाद हाउस की ज्यूडिशरी कमेटी या एक स्पेशल कमेटी आरोपों की जांच करेगी. इसके बाद यह कमेटी तय करेगी कि सदन में महाभियोग का प्रस्ताव वोट के लिए रखा जाए या नहीं. अगर प्रस्ताव रखने पर सहमति बनती है तो हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव में प्रस्ताव पेश किया जाता है. हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव में कुल 435 सदस्य होते हैं. महाभियोग का प्रस्ताव पास करने के लिए सामान्य बहुमत की आवश्यकता होती है. अगर प्रस्ताव यहां से पास होता है तो उच्च सदन यानि सीनेट में जाता है अन्यथा नहीं जाता है. चूंकि इस समय हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव में डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत में है इसलिए ये माना जा रहा है कि वहां यह प्रस्ताव पास हो जाएगा और सीनेट में जाएगा.

सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं. अमेरिकी संसद के इस उच्च सदन में महाभियोग के प्रस्ताव को पास कराने के लिए दो- तिहाई बहुमत की जरूरत होगी. सीनेट में इस समय 53 रिपब्लकन सदस्य हैं. 45 डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं. इसके साथ ही दो स्वतंत्र सदस्य हैं जो अभी डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करते हैं. दो तिहाई बहुमत के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी को कम से कम 20 रिपब्लिकन सदस्यों की जरूरत होगी, जो फिलहाल मुश्किल लग रहा है. ऐसे में डॉनल्ड ट्रंप का पद से हटना मुश्किल है. शायद यही वजह है कि ट्रंप अभी बेफिक्र नजर आ रहे हैं.

अगर ट्रंप हटे तो कौन बनेगा राष्ट्रपति-

अगर किसी हालत में महाभियोग का प्रस्ताव पास हो जाता है तो डॉनल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटना पड़ेगा. ऐसे हालात में उप राष्ट्रपति माइक पेंस को ट्रंप के बाकी बचे कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद संभालना होगा. ट्रंप का कार्यकाल 20 जनवरी 2020 तक है. अमेरिका में मौजूदा राष्ट्रपति पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है लेकिन पद से हटने के बाद केस चलाना संभव हो सकता है. ऐसे में ट्रंप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

किन किन राष्ट्रपतियों पर लगा है महाभियोग-

सामान्य शब्दों में कहें तो अभी तक कोई भी राष्ट्रपति महाभियोग की कार्रवाई से हटा नहीं है. 1868 में अमेरिकी राष्ट्रपति एंड्रूय जॉनसन के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई शुरु हुई थी. उन पर आरोप था कि उन्होंने एक सरकारी अधिकारी को गैरकानूनी तरीके से बर्खास्त कर दिया. अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान उन पर ये कार्रवाई करने का आरोप लगा था. हालांकि सीनेट में उनके खिलाफ प्रस्ताव पास नहीं हुआ और वो अपने पद पर बने रहे.

1974 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर भी महाभियोग की कार्रवाई शुरु हुई थी. निचले सदन ने उनके खिलाफ ज्यूडिसरी कमेटी मे उनके खिलाफ महाभियोग को मंजूरी दे दी थी. हालांकि निक्सन ने कार्रवाई शुरु होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. रिचर्ड निक्सन कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने वाले एकमात्र अमेरिकी राष्ट्रपति हैं.

1998 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ भी महाभियोग की कार्रवाई शुरु हुई थी. मोनिका लेंविस्की के उन पर यौन शोषण का आरोप लगाने के बाद ये प्रक्रिया शुरु की गई थी. हालांकि सीनेट में उनके खिलाफ प्रस्ताव पास नहीं हो पाया और वो भी अपने अपने पद पर बने रहे.