लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला इन दिनों गहरे तनाव से गुजरा रहा है.यहां राष्ट्रपति निकोलस माडुरो के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं.विपक्ष के नेता जुआम गुडो ने खुद को वहां का अंतरिम राष्ट्रपति घोषित कर दिया है.अमेरिका,ब्राजील ने जहां गुआम को मान्यता दे दी है वहीं चीन और रूस ने अमेरिका के इस कदम का विरोध किया है.भारत ने भी गुडो को राष्ट्रपति के लिए मान्यता देने से इंकार कर दिया है.

अमेरिका के खिलाफ एक बड़ी आवाज बने वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर निकोलस माडुरो को चुना था.पूर्व बस ड्राइवर निकोलस माडुरो के शासन में महंगाई अपने चरम पर है.देश भीषण मंदी के दौर से गुजर रहा है.बेरोजगारी और आर्थिक संकट के तले देश की जनता बेहाल है.वेनेजुएला एक बड़ा तेल उत्पादक देश है और माना जा रहा है की दुनियाभर में तेल की कीमतों में गिरावट की वजह से वेनेजुएला को इस आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है.हालांकि कुछ विशेषज्ञों का ये भी मानना है की पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की अति साम्यवादी नीतियों ने भी देश की अर्थव्यवस्था को लंबे समय में नुकसान पहुंचाया है.माना जाता है की गरीबी खत्म करने और समानता लाने के लिए जिन नीतियों को शावेज ने अपनाया उनसे देश की आर्थिक सेहत खस्ताहाल हो गई.वहीं विपक्ष का आरोप है की सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण देश की ये हालत हुई है.

2016 में माडुरो ने देश में नोटबंदी का एलान भी किया था.माडुरो ने इसके लिए वेनेजुएला की मुद्रा के 100 बोलिवयर के नोट को भी बंद कर दिया था.हालांकि इसके बाद वेनेजुएला में फैली अराजकता को देखते हुए माडुरो ने इसे वापस ले लिया था.अगर वेनेजुएला की मुद्रा बोलिवियर की अभी की हालत के बारे में बात करें तो 1000 बोलिवियर अमेरीका के 100 डॉलर के बराबर है.

वेनेजुएला में खाने के सामान और दवाईयों के दाम काफी बढ़ चुके हैं.यहां के बिगड़ते मौजूदा हालात का अंदाजा इस बात से भी हो सकता है कि साढ़े पांच हजार रुपये में एक किलो लहसुन, सात हजार रुपये किलो शकरकंद मिल रही है.बीते साल अगस्त में माडुरो की अपनी पत्नी के साथ एक महंगे रेस्टोरेंट में खाना खाते तस्वीर वायरल होने के बाद उन्हें काफी आलोचना का सामना भी करना पड़ा था.ऐसे हालात में वहां लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं और तमाम लोग देश भी छोड़ रहे हैं.संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 2014 के बाद से तीस लाख से अधिक लोग देश से जा चुके हैं और 2019 के अंत तक 53 लाख लोगों के ऐसा करने का अनुमान है.

लगभग तख्तापलट के जैसे हालात में माडुरो के लिए राहत की बात ये है की वेनेजुएला की सेना और सुप्रीम कोर्ट ने माडुरो का समर्थन किया है.हालांकि सेना में भी निचले स्तर पर माडुरो का विरोध देखने को मिला है.माडुरो को भले ही दुनिया के कई देशों और सेना का समर्थन मिला है लेकिन अगर उन्होंने महंगाई और खराब अर्थव्यवस्था को नियंत्रित न किया तो शायद उन्हें जल्द ही अपने पद से रूखसत होना पड़े.