अमेरिका में आने वाले 4 नवंबर को इलेक्शन डे है यानि वोट डालने का आखिरी दिन. इसके बाद 2-3 हफ्ते में चुनाव नतीजे आ जाएंगे और यह साफ हो जाएगा कि दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स की कुर्सी पर कौन बैठने वाला है. डोनल्ड ट्रंप या डेमोक्रेटिक जो बिडेन. अमेरिका का राष्ट्रपति तमाम ऐसे फैसले करता है जो दुनियाभर को प्रभावित करते हैं, इसलिए इस अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर दुनियाभर की निगाहें टिकी रहती हैं. अभी के पोल के मुताबिक मौजूदा राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अपने प्रतिद्वंदी जो बिडेन से पीछे चल रहे हैं. इस चुनाव के नतीजे और उसका भारत पर क्या असर होगा, इस बारे में हम आज आपको कुछ बताएंगे-

आमतौर पर अमेरिका में राष्ट्रपति रिपब्लिक पार्टी का हो या डेमोक्रेटिक पार्टी, भारत के मामले में दोनों का रुख एक जैसा ही रहता है. भारत के सामने बड़ा मुद्दा पाकिस्तान का रहता है और उसे इस मामले में समर्थन की उम्मीद रहती है. जॉर्ज बुश रिपब्लिकन पार्टी के थे. उनके समय में ईराक में लड़ाई हुई और अफगानिस्तान से तालिबान का शासन उखाड़ फेंका गया. हालांकि ये सब 9/11 के बाद हुआ. फिर भी पाकिस्तान के मसले पर भारत को कोई खास सफलता नहीं मिल सकी. पाकिस्तान को आर्थिक मदद मिलती रही. जनरल परवेज मुशर्रफ लगातार खुराफ़ात करते रहे और उन पर कोई नकेल नहीं कसी गई. उनके बाद बराक ओबामा राष्ट्रपति बने. डेमोक्रेटिक पार्टी के बराक ओबामा के समय में भी हालात वैसे ही रहे. पीएम मोदी उन्हें अपना दोस्त बताते रहे और कई बार दोनों की मुलाकात भी हुई. बराक ओबामा ने भारत की दो बार यात्रा की. वो ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे जिन्होंने भारत की यात्रा दो बार की. लेकिन पाकिस्तान को होने वाली आर्थिक मदद में कोई कमी नहीं आई.

बराक ओबामा के समय पाकिस्तान को F-16 विमान भी दिए गए जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने बीते साल फरवरी में तनाव के दौरान भारत के खिलाफ भी किया. हालांकि पाकिस्तान ने इसे माना नहीं लेकिन भारत के पास इसके पुख्ता सबूत हैं. 70 करोड़ डॉलर की डील बराक ओबामा ने अपने कार्यकाल के आखिर में की थी. 8 F-16 विमानों को बेचने के लिए हुई इस डील से अमेरिकी ससंद खुश नहीं थी. भारत ने भी इस डील का कड़ा विरोध किया था. हालांकि डील के पीछे तर्क था की पाकिस्तान आतंकियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा. 2017 में डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने पीएम मोदी की यात्रा पहले भारत को 22 मानवरहित ड्रोन देने को सौदे को मंजूरी दी थी. बराक ओबामा के हटने के बाद ट्रंप प्रशासन की भारत के साथ ये पहली बड़ी डील थी.

2009 में पाकिस्तान में पीपीपी की सरकार थी.उस वक्त भी वहां के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी थे. कुरैशी ने तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, बराक ओबामा और ब्रिटिश पीएम गोडेन ब्राउन की मौजूदगी में आतंकवाद से लड़ने का एलान किया. ग्रुप फ़्रैंडस ऑफ़ पाकिस्तान के नाम के इस सम्मेलन में बराक ओबामा ने पाकिस्तान को हर साल 1.5 अरब डॉलर की मदद देना मंजूर किया. ये उस वक्त की बात है जब 2008 में भारत में मुंबई में आतंकवादी हमला हुआ था और उसके गुनहगार पाकिस्तान में बैठे थे.

अब अगर हम बात डॉनल्ड ट्रंप की करें तो ट्रंप ने 2018 में पाकिस्तान को दी जाने वाली 255 मिलियन डॉलर की अमेरिकी मदद को रोकने का एलान किया. ट्रंप ने किसी भी तरह की आर्थिक मदद पर रोक लगा दी.आतंकवादियों के खिलाफ पाकिस्तान के कार्रवाई न करने से नाराज अमेरिका ने यह कदम उठाया था.जिसके बाद पाकिस्तान ने हाफिज सईद के जमात उद दावा समेत कई संगठनों पर विदेशी फंडिंग लेने पर रोक लगा दी. फरवरी 2019 में भी भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को खत्म करने में ट्रंप प्रशासन ने पूरा जोर लगाया और विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई के लिए भी दबाव बनाया. हालांकि ट्रंप ने कश्मीर के मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की बात कई बार जरूर की जिसे भारत ने पूरी विनम्रता से ठुकरा दिया.

हालांकि पाकिस्तान के दौरे पर जाने की बात करें तो न तो बराक ओबामा पाकिस्तान गए और न ही अब तक डॉनल्ड ट्रपं. राष्ट्रपति पद पर ट्रंप के निर्वाचन के बाद ओबामा ने जरूर इस बात का जिक्र किया की वो अपने कार्यकाल की शुरूआत में ही पाकिस्तान जाना चाहते थे लेकिन वो जा नहीं सके.ओबामा की भारत यात्रा के बारे में बात करें तो वो दो बार भारत यात्रा पर आए जो की अहम है.बराक ओबामा ने मनमोहन सिंह की सरकार के समय 2010 में पहली बार भारत की यात्रा की. इस दौरे पर उन्होंने 450 अरब रूपए की डील का समझौता किया.इस दौरे पर उन्होंने मालवाहक विमान ग्लोबमास्टर भारत को बेचने का एलान भी किया.

इसके बाद नरेंद्र मोदी की सरकार के समय में ओबामा 2015 में भारत यात्रा पर आए थे.इस समय भी उन्होंने जलवायु परिवर्तन,परमाणु करार और एयरक्राफ्ट संबंधी कई समझौतों पर दस्तख्त किए. अगर ट्रंप की बात करें तो वो इस साल की शुरूआत में ही 24 फरवरी को भारत यात्रा पर आए थे.

कुल मिलाकर भारत और पाकिस्तान के मामले में ट्रंप भारत के लिए ज्यादा मजददगार साबित हुए हैं. उन्होंने भारत की मदद तो ज्यादा नहीं की लेकिन पाकिस्तान पर जो कार्रवाई की हैं वो भारत के लिए बड़ी मदद है. जो बिडेन ओबामा के समय उपराष्ट्रपति थे. हालांकि अपने चुनाव प्रचार के दौरान वो भारतीयों को लुभाते नजर आए और नवरात्र से लेकर कई त्योहारों की शुभकामनाएं भी दीं. भारतीय मूल की कमला हैरिस को उन्होंने अपना उपराष्ट्रपति पद का दावेदार चुना है जो भारत के लिए उनके रुख को काफी कुछ दिखाता है. एक और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बर्नी सैंडर्स की तरह उन्होंने कभी भी कश्मीर के मुद्दे पर कोई राय नहीं रखी है. फिर भी अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद वो इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगे.

चीन इस समय अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश में लगा है. ऐसे में भारत की भूमिका इस क्षेत्र में अहम है. जो बिडेन भी इस बात को समझते होंगे. उम्मीद है बदले हालात में वो भारत के लिए ओबामा जैसा रुख नहीं दिखाएंगे. फिर भी ट्रंप अब तक भारत के लिए मददगार रहे हैं. एक तरफ हमारे सामने एक आजमाया हुआ शख्स है तो दूसरी तरफ ऐसा शख्स जिसके भविष्य में व्यवहार पर संदेह है. ऐसे में जैसे भी हैं बड़बोले ट्रंप भारत के लिहाज से अभी फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति पद पर बैठने के लिए सबसे सही शख्स हैं.