बीते दिनों जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर थे तब अमेरिका की अहम भूमिका देखने को मिली.26 फरवरी को भारत के एयरस्ट्राइक करने से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कह दिया था की भारत कड़ा एक्शन ले सकता है.दूसरी तरफ विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई से पहले भी ट्रंप ने कहा था की जल्द ही अच्छी खबर मिलने वाली है.ऐसे में पता चलता है की भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में अभी भी अमेरिका की भूमिका कितनी अहम है.

डॉनल्ड ट्रंप की अब तक की राजनीति से वो घोर दक्षिणपंथी के तौर पर सामने आए हैं.उनके बयानों को लेकर भारत में उनकी कोई छवि अच्छी नहीं है.वीजा नियमों में बदलाव और रोजगार जैसे विषयों पर ट्रंप के विचारों के कारण आमतौर पर भारतीय उन्हें पसंद नहीं करते हैं लेकिन पाकिस्तान पर ट्रंप की नीति भारत के लिए किस तरह की है.क्या ट्रंप की पाकिस्तान नीति भारत के ज्यादा पक्ष में है.डॉनल्ड ट्रंप ने न केवल पाकिस्तान की मदद रोकी है बल्कि समय समय पर आतंकवाद पर कार्रवाई के लिए दबाव भी बनाया है.इससे पहले भले ही अमेरिका के संबध हाल फिलहाल अमेरिका से अच्छे हों लेकिन पाकिस्तान के मोर्चे पर भारत को सफलता हाथ नहीं लगी है जिसकी भारत को उम्मीद थी.

डॉनल्ड ट्रंप रिपब्लिक पार्टी से राष्ट्रपति हैं.उनसे पहले बराक ओबामा डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति थे.नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित ओबामा को आमतौर पर भारत में पसंद भी किया जाता था.पीएम मोदी के साथ उनका रिश्ता काफी चर्चा में रहा.दोनों ने कई बार मुलाकात भी की.लेकिन क्या ओबामा वाकई भारत के लिए उतने मुफीद साबित हुए जितना उन्हें होना चाहिए था.ट्रंप और ओबामा में से कौन भारत के लिए ज्यादा मुफीद रहा इस पर बात होनी चाहिए.आखिर भारतीयों को पता होना चाहिए की पड़ोस में बैठे पाकिस्तान जैसे दुश्मन को दबाव में रखने में हमें किसने ज्यादा मदद दी है.

बात उसी एफ-16 विमान से शुरू करते हैं जिससे पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया और एक पाकिस्तानी विमान को भारत ने मार भी गिराया.हालांकि पाकिस्तान ने इसे माना नहीं लेकिन भारत के पास इसके पुख्ता सबूत हैं.ये एफ-16 विमान पाकिस्तान को अमेरिका ने दिए थे.70 करोड़ डॉलर की डील बराक ओबामा ने अपने कार्यकाल के आखिर में की थी.इस 8 एफ 16 विमानों को बेचने के लिए हुई इस डील से अमेरिकी ससंद खुश नहीं थी.भारत ने भी इस डील का कड़ा विरोध किया था.हालांकि डील के पीछे तर्क था की पाकिस्तान आतंकियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा.अब जब डील से हटकर पाकिस्तान ने भारत पर हमले के लिए इसका इस्तेमाल किया है तो अमेरिका का ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान पर कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है.

2017 में डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने पीएम मोदी की यात्रा पहले भारत को 22 मानवरहित ड्रोन देने को सौदे को मंजूरी दी थी.बराक ओबामा के हटने के बाद ट्रंप प्रशासन की भारत के साथ ये पहली बड़ी डील थी.

2009 में पाकिस्तान में पीपीपी की सरकार थी.उस वक्त भी वहां के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी थे.कुरैशी ने तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी,बराक ओबामा और ब्रिटिश पीएम गोडेन ब्राउन की मौजूदगी में आतंकवाद से लड़ने का एलान किया.ग्रुप फ़्रैंडस ऑफ़ पाकिस्तान के नाम के इस सम्मेलन में बराक ओबामा ने पाकिस्तान को हर साल 1.5 अरब डॉलर की मदद देना मंजूर किया.ये उस वक्त की बात है जब 2008 में भारत में मुंबई में आतंकवादी हमला हुआ था और उसके गुनहगार पाकिस्तान में बैठे थे.

अब अगर हम बात डॉनल्ड ट्रंप की करें तो ट्रंप ने 2018 में पाकिस्तान को दी जाने वाली 255 मिलियन डॉलर की अमेरिकी मदद को रोकने का एलान किया.ट्रंप ने किसी भी तरह की आर्थिक मदद पर रोक लगा दी.आतंकवादियों के खिलाफ पाकिस्तान के कार्रवाई न करने से नाराज अमेरिका ने यह कदम उठाया था.जिसके बाद पाकिस्तान ने हाफिज सईद के जमात उद दावा समेत कई संगठनों पर विदेशी फंडिंग लेने पर रोक लगा दी.

हालांकि पाकिस्तान के दौरे पर जाने की बात करें तो न तो बराक ओबामा पाकिस्तान गए और न ही अब तक डॉनल्ड ट्रपं.राष्ट्रपति पद पर ट्रंप के निर्वाचन के बाद ओबामा ने जरूर इस बात का जिक्र किया की वो अपने कार्यकाल की शुरूआत में ही पाकिस्तान जाना चाहते थे लेकिन वो जा नहीं सके.ओबामा की भारत यात्रा के बारे में बात करें तो वो दो बार भारत यात्रा पर आए जो की अहम है.बराक ओबामा ने मनमोहन सिंह की सरकार के समय 2010 में पहली बार भारत की यात्रा की.इस दौरे पर उन्होंने 450 अरब रूपए की डील का समझौता किया.इस दौरे पर उन्होंने मालवाहक विमान ग्लोबमास्टर भारत को बेचने का एलान भी किया.की
इसके बाद नरेंद्र मोदी की सरकार के समय में ओबामा 2015 में भारत यात्रा पर आए थे.इस समय भी उन्होंने जलवायु परिवर्तन,परमाणु करार और एयरक्राफ्ट संबंधी कई समझौतों पर दस्तख्त किए.अगर ट्रंप की बात करें तो वो अभी तक भारत यात्रा पर नहीं आए हैं और गणतंत्र दिवस पर मेहमान बनने का न्योता उन्होंने ठुकरा दिया था.

इस तरह से अगर हम दोनों राष्ट्रपतियों के कार्यकालों के बारे में विश्लेषण करें तो पता चलता है की ओबामा ने भारत को मदद दी लेकिन पाकिस्तान की मदद भी रोकी नहीं.उसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझेदार भी बताया.जबकि डॉनल्ड ट्रंप ने बहुत ज्यादा मदद भारत की नहीं की लेकिन पाकिस्तान पर कार्रवाई करना अपने आप में एक बड़ी मदद है.खास तौर पर हालिया तनाव के बीच अमेरिका ने भारत को मदद दी उसे हमेशा ट्रंप की भारत को लेकर एक बड़ी उदारता के तौर पर जाना जाएगा.