श्रीलंका की राजनीति में जबरदस्त उथल पुथल जारी है.प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त करने के बाद अब राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना ने संसद को भी भंग कर दिया है.वो पूर्व राष्ट्रपति महिंद्र राजपक्षे को पीएम पद की शपथ भी दिला चुके हैं.सिरिसेना के संसद को भंग करने का मतलब साफ है की वो किसी भी कीमत पर विक्रमसिंघे को पद पर बने नहीं रहने देना चाहते क्योंकि श्रीलंका में पीएम तभी हट सकता है जो वो संसद में विश्वासमत में हार जाए या वो संसद के सदस्य बनने के नियम ही न पूरा करता हो.विक्रमसिंघे ने बहुमत साबित करने के लिए संसद का आपात सत्र भी बुला लिया था.

श्रीलंका के संविधान में आर्टिकल 19 ऊपर बताई गई स्थितियों के अलावा प्रधानमंत्री तभी हट सकता है जब वो खुद इस्तीफा दे.ऐसे में विक्रमसिंघे के बाद संसद को भंग करके सिरिसेना साफ संदेश दे रहे हैं की वो किसी भी हाल में विक्रमसिंघे पीएम पद पर नहीं बना रहने देंगे.उधर विक्रमसिंघे ने अपने पद से हटने से मना कर दिया था.उनका दावा था की संसद में बहुमत उनके पास है.श्रीलंका में संसद भंग हो चुकी है सुप्रीम कोर्ट सोमवार को खुलेगा ऐसे में वहां आगे ये राजनीतिक टकराव किस हद तक जाएगा ये देखने वाली बात होगी.

दरअसल श्रीलंका भारत और चीन के लिए रणनीतिक रूप से अहम है.2004 में सत्ता संभालने के बाद पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे ने देश में चले आ रहे 25 साल के तमिल सशस्त्र विद्रोह को खत्म कर दिया.ऐसा माना जाता है की भारत उस समय श्रीलंका के मिजाज को भांपने में नाकाम रहा और श्रीलंका ने पाकिस्तान और चीन से मिले हथियारों और मदद के जरिए तमिल विद्रोही संगठन लिट्टे का खात्मा कर दिया और इसके प्रमुख वी प्रभाकरण को मार गिराया.इस युद्ध के खात्मे के बाद राजपक्षे श्रीलंका में एक नायक के तौर पर उभरे और वो चीन के करीब आ गए.इसी बीच अमेरिका ने श्रीलंका को संयुक्त राष्ट्र में युद्ध अपराध के नाम पर घेरना शुरू किया.उन पर तमिल विद्रोहियों का गढ़ रहे जाफना में मानवाधिकार के उल्लंघन के आरोप लगे.ऐसा माना जाता है की श्रीलंका ने आतंकियों को खत्म करने के नाम पर निर्दोष तमिल नागरिकों की हत्या की.

राजपक्षे ने अमेरिका के हर कदम का कड़ा विरोध किया.इसी बीच चीन का हस्तक्षेप श्रीलंका में बढ़ता गया.राजपक्षे ने सामरिक दृष्टि से बेहद महत्‍वपूर्ण हंबनटोटा बंदरगाह को चीन को कई वर्षों की लीज पर दे दिया। यही नहीं तत्‍कालीन श्रीलंकाई राष्‍ट्रपति राजपक्षे ने चीन को राजधानी कोलंबो के बंदरगाह को बनाने और चीनी पनडुब्बियों को श्रीलंका के बंदरगाह तक आने की अनुमति दे दी। भारत के लिए चीन का श्वीलंका में इतना हस्तक्षेप घातक था.

2014 में भारत में सत्ता परिवर्तन हुआ.भारत में नई सरकार ने श्रीलंका को लेकर गंभीर रवैया अपनाया.राजपक्षे के हंबनटोटा बंदरगाह को चीन को देने के बाद भारत के लिए राजपक्षे श्रीलंका में एक मुश्किल बन चुके थे.भारत ने नई रणनीति पर काम किया और खुफिया एजेंसी रॉ को श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन की चाभी सौंपी.राजपक्षे सरकार में स्वास्थ्य मंत्री और वर्तमान राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना को इसके लिए चुना गया.सिरिसेना ,राजपक्षे सरकार से अलग हुए और विपक्ष के साझा उम्मीदवार के तौर पर पेश हुए.

उधर राजपक्षे पर भी भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप लगे.उन्होंने तमाम पत्रकारों को गिरफ्तार कर जेल में डलवा दिया.ऐसे में देश में उनके खिलाफ एक माहौल भी जिसका फायदा सिरिसेना को मिला और वो चुनाव भी जीते.राजपक्षे ने चुनाव हारने के बाद भारत के खिलाफ खुलकर भड़ास निकाली और रॉ को इसके लिए साफतौर पर जिम्मेदार बताया.

सिरिसेना के सत्ता में आने के बाद भी भारत की मुश्किलें कम नहीं हुईं.उनका रवैया भारत के खिलाफ भले ही न रहा हो लेकिन वो चीन के प्रति कड़े कभी नहीं रहे.शुरूआत में उन्होंने वहां चीनी मदद को रद्द किया तो बाद में हल्के सुधारों के साथ फिर से लागू फिर कर दिया.

पीएम मोदी ने इसी बीच श्रीलंका की दो यात्राएं की.इसमें एक बार उन्होंने महिंद्रा राजपक्षे से भी मुलाकात की थी.राजपक्षे भी सुब्रमण्यम स्वामी के बुलावे पर सितंबर में भारत आए थे.
इन सबके बीच चीन ने सिरिसेना के संसदीय क्षेत्र पोनोनारुवा में एक किडनी अस्पताल बनाने का फैसला किया.इस क्षेत्र में किडनी मरीजों की संख्या बेहद ज्यादा है.ये अस्पताल दक्षिणी एशिया का सबसे बड़ा किडनी अस्पताल होगा.इसके अलावा चीन ने सिरिसेना को उनकी किसी भी मनचाही योजना के लिए दो अरब युआन देने का फैसला किया.सिरिसेना ने इस मदद के बारे में कहा की वो चाहते हैं चीन श्रीलंका के सारे जनप्रतिनिधियों के लिए एक एक घर बनवाए.

श्रीलंका में सिरिसेना ने जिस तरह से सत्ता परिवर्तन करने का प्रयास किया है उस पर अमेरिका की भी नजरें टेढ़ीं हैं.अमेरिका ने श्रीलंका में सभी पार्टियों से संविधान के मुताबिक चलने की अपील की लेकिन आज विदेश मंत्री माइक पांपियों ने इस संकट के लिए चीन को जिम्मेदार बताते हुए आड़े हाथों लिया.पांपियो ने साफतौर पर सिरिसेना के संसदीय क्षेत्र में अस्पताल बनवाने और मदद को चीन की घूस करार दिया.उन्होंने राजपक्षे पर भी 7.6 मिलियन डॉलर की कथित चीनी घूस लेने का आरोप लगाया.

श्रीलंका के बर्खास्त पीएम रानिल विक्रमसिंघे हाल ही में भारत यात्रा पर आए थे.उनकी ये यात्रा तब हुई थी जब ये खबरे आईं थी की मैत्रिपाल सिरिसेना ने भारत पर उनकी और महिंद्रा राजपक्षे के भाई की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था.हालांकि राजपक्षे भी भारत यात्रा पर आ चुके हैं.फिलहाल श्रीलंका गहरी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है.अगर बात महिंद्रा राजपक्षे की करें तो उनकी सत्ता वापसी के बारे में ब्रिटेन का अखबार द गार्जियन लिखता है की इससे श्रीलंका में एक बार फिर से राजनीतिक विरोधियों,पत्रकारों और आलोचकों के खिलाफ राजनीतिक हिंसा का दौर वापस आ सकता है.