बीते दिनों तुर्की की वेब सीरीज आर्तग्रुल गाजी काफी चर्चा में रही. तुर्की के अलावा पाकिस्तान और भारत के मुसलमानों ने भी इसे खासा पसंद किया. इस सीरीज के बारे में बीबीसी में कई लेख लिखे गए. इन लेखों में आर्तग्रुल को तुर्की के राष्ट्रपति एदोर्गान की महात्वकांक्षाओं का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया गया. लेखों के मुताबिक इस सीरीज के जरिए, एदोर्गान इस्लाम के पुराने गौरव को दिखाना चाहते हैं और उसके साथ खुद को जोड़कर पेश करना चाहते हैं.

मुसलमानों में इसके जरिए ये संदेश देने की कोशिश की गई कि उनका इतिहास कितना गौरवशाली रहा है. इस वेब सीरीज में काई नाम के कबीले की कहानी दिखाई गई है कि किस तरह से इसने धीरे धीरे अपना विस्तार किया और आगे चलकर ऑटोमन या उस्मानी साम्राज्य की स्थापना की. आर्तग्रुल काई कबीले का सरदार है और योद्धा है जिसके नाम पर ही वेब सीरीज का नाम रखा गया है. नेटफ्लिक्स पर ये वेब सीरीज अंग्रेजी सबटाइटल के साथ तुर्की की भाषा में मौजूद है. शुरूआत में कई बार इस सीरीज को देखने की कोशिश लेकिन वो जान इस सीरीज में नहीं दिखी. हालांकि, जब बीबीसी ने इस बारे में कई लेख निकाले और पाकिस्तान और भारत में इसकी बड़ी चर्चा हुई तो लगा कि आखिर देखना चाहिए कि इसकी कहानी क्या है और कैसे मुस्लिम इससे प्रभावित हो रहे हैं.

चूंकि इस वेब सीरीज को एदोर्गान का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया जा रहा है तो कहीं न कहीं इस वेब सीरीज में उनके मन की छाप और उस इस्लामिक जगत की कल्पना को दिखाया गया होगा जो एदोर्गान चाह रहे होंगे. खास बात यह है कि आर्तग्रुल के बारे में इतिहास में बहुत ज्यादा जानकारी मौजूद नहीं है, हालांकि उसके बेटे उस्मान के बारे में काफी कुछ लिखा गया है. ऐसे में कहीं न कहीं इस पूरी कहानी में काल्पनिकता के होने की उम्मीद बहुत ज्यादा है. मैं इस वेब सीरीज को चौथे सीजन के 37 एपिसोड देख चुका हूं. ये वेब सीरीज आम वेब सीरीज के मुकाबले काफी बड़ी है और एक सीजन में 80 तक एपिसोड हैं. अब तक के सभी सीजन देखने के बाद कुछ आम चीजों के बारे में एदोर्गान क्या सोचते हैं, कैसा तुर्की और इस्लामिक जगत वो देखना चाहते हैं. इसका पता आराम से चल जाता है. उन्हीं कुछ आम मुद्दों के बारे में हम आपको बताएंगे-

दूसरे धर्मों के बारे में सोच- चूंकि हम भारत में हैं और भारत के संदर्भ की बात ज़रूरी है. इस सीरीज में हिंदुओं का कोई जिक्र नहीं है. चूंकि कहानी का परिदृश्य तुर्की का है इसलिए इसमें इस्लाम और ईसाई धर्म के बारे में दिखाया गया है. बर्बर आक्रमणकारियों के तौर पर मंगोलों को भी दिखाया गया है. इसी के सहारे चीन और एक दो बार भारत का जिक्र भी सीरीज में किया गया है. ईसाई धर्म के बारे में बात करें तो इसके ज्यादातर शासकों और पोप को इसमें कपटी और षडयंत्रकारी के तौर पर दिखाया गया है जो इस्लाम को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं और ईसाई धर्म का विस्तार करना चाहते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो इस्लाम और ईसाईयों की टक्कर दिखाई गई है. सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे अलग-अलग ईसाई कमांडर और गवर्नर इस्लाम को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं लेकिन आर्तग्रुल उनकी चालों को असफल करके आगे बढ़ता जाता है. हालांकि आम ईसाई जनता के बारे में बुरी बातें नहीं दिखाई गईं हैं और उन्हें साथ लेकर चलने की बात की जाती है. साथ ही, उनका हर तरीके से ख्याल रखने की बात भी कही जाती है.

सीरीज में जबरन धर्म परिवर्तन नहीं दिखाया गया है लेकिन फिर भी कई ईसाई लड़कियों के तुर्क योद्धाओं से शादी के बाद उनके इस्लाम कुबूल करने को दिखाया गया है. सीरीज में दिखाया गया है कि कैसे ये लड़कियां इस्लाम से प्रभावित हुईं और मुसलमान बन गईं. आज के दौर में धर्म परिवर्तन को जबरन दिखाना मुश्किल है और गलत संदेश भी जाता, शायद इसीलिए थोड़ा लिबरल तरीके से यहां 'अल्लाह सबसे ज्यादा महान है का' संदेश दिया गया है. सीरीज में आर्तग्रुल का साथी बामसी एक डायलॉग बोलता है 'मैंने बहुत दिन से किसी गैर-मुस्लिम को नहीं मारा है'. हो सकता है कि यह तुर्की से अंग्रेजी ट्रांसलेशन के दौरान गलती से लिखा गया हो लेकिन अगर ये सही है तो पता चलता है कि किस तरह की सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है. इब्न अल अरबी नाम के दार्शनिक को भी सीरीज में दिखाया गया है. ये दार्शनिक, आर्तग्रुल को समय-समय पर राह दिखाता है. इस दार्शनिक पर हमला करने आया एक ईसाई, दार्शनिक से प्रभावित हो जाता है और इस्लाम कुबूल कर लेता है. यहां ये दार्शनिक बिल्कुल भी ईसाई हमलावर को धर्म-परिवर्तन से नहीं रोकता है और ईश्वर एक समान होने का संदेश नहीं देता है. कुल मिलाकर पूरी सीरीज में आम ईसाई जनता के हित की बात भले ही की गई हो लेकिन उनको इस्लाम के झंडे के नीचे एक दया याचिका पर रहने देने जैसा संदेश दिया गया है. हालांकि हो सकता है कि ये उस वक्त की ज़रूरत हो लेकिन फिर भी नकारात्मक संदेश जाता दिखता है.

महिलाओं की स्थिति-

इस सीरीज के जरिए एदोर्गान की महिलाओं के प्रति सोच का पता चलता है और कहीं न कहीं इसे काफी अच्छा संदेश देने की कोशिश की गई है. सीरीज में महिलाओं को पुरुषों के जैसा ही बहादुर दिखाया गया है. वो अपने कबीले के लिए दुश्मनों से लड़ने को हमेशा तैयार रहती हैं. कबीले, महिलाओं को अपनी सरदार के तौर पर न केवल मानते हैं बल्कि उनके हर आदेश को मानने को तैयार रहते हैं. सीरीज में आर्तग्रुल की मां, हायमा को कबीले की सरदार के तौर और सशक्त महिला के तौर पर दिखाया गया है जो अपने सेल्जुक साम्राज्य के सबसे बड़े मंत्री के खिलाफ भी तलवार उठा लेती है. हायमा के निर्णय पूरा कबीला मानता है और एक भारतीय साम्राज्य की राजमाता की तरह उनकी पहचान है. इसी तरह एक दूसरे कबीले, चावदार में भी एक महिला असलान अपने कबीले की गद्दी पर बैठती है और अधिकतर लोग उसकी बात को मानते भी हैं. हालांकि, आर्तग्रुल के साथी तुर्गुत से शादी के बाद जिस तरह से वो अपनी गद्दी तुर्गुत के लिए छोड़ देती है वो थोड़ा गलत संदेश भी देता है.

पति का अपनी पत्नी को पीटना गलत हरकत के तौर पर दिखाया गया है और इसका विरोध भी दिखाया गया है. तीन तलाक इस वेब सीरीज में भी है. यहां महिलाओं को कमजोर दिखाया गया है. पति अगर चाहे तो पहली पत्नी की सहमति से दूसरी शादी कर सकता है लेकिन अगर सहमति नहीं है तो पहली पत्नी को तलाक देने का विकल्प पुरुष के पास खुला दिखाया गया है. ऐसे में महिलाओं के सामने शांति से सहमति देने का विकल्प ही दिखाया गया है. महिलाओं के मामले में वेब सीरीज का ये प्वाइंट सबसे ज्यादा नकारात्मक है. महिलाओं का पहनावा भी आम है और इसमें चेहरा ढकना बिल्कुल भी जरूरी नहीं दिखाया गया है.

ऐसे में महिलाओं के बारे में सोच को आधुनिक और तमाम तालिबानी प्रावधानों के मुकाबले काफी संपन्न दिखाया गया है. अगर मुस्लिम समाज इनसे सीखे तो भी महिलाओं को खासी आजादी मिल सकती है. हालांकि तीन तलाक वाली सोच से सावधान रहने की भी ज़रूरत है. आर्तग्रुल सीरीज के बारे में आज हम इन्हीं दो मुद्दों के बारे में बात करेंगे. आगे फिर अन्य मुद्दों पर भी लिखा जाएगा.