अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाकात हो गई है. दोनों के बीच कुछ समझौते भी हुए हैं.फिलहाल तस्वीरें और साझा प्रेस कॉफ्रेंस तो यही कहती दिखती है कि दोनों के बीच मुलाकात अच्छी रही. तकरीबन 50 मिनट तक चली मुलाकात के बाद डॉनल्ड ने किम को व्हाइट हाउस आने का न्योता देने पर भी हामी भरी.
अब आते हैं हम अपने लेख के शीर्षक पर कि लोगों के बारे में कहा जाता है कि इतिहास उनके बारे में क्रूर है. मतलब वो ऐसे थे नहीं लेकिन इतिहास ने उनके बारे में ऐसी बातें कह दीं जिनसे उनकी छवि धूमिल हो गई लेकिन किम के बारे में क्या कहा जाए. क्या वर्तमान ही किम के बारे में क्रूर है.किम को भारतीय मीडिया से लेकर सभी ने पागल,सनकी तानाशाह सब कुछ लिखा लेकिन जो पहल बीते कुछ दिनों में उसने की क्या वो वर्तमान के इस लेखन पर सवाल नहीं खड़े करती ?

किम के बारे में क्या लिखा जाए और क्या नहीं कम से कम शायद अब इस पर विचार करना चाहिए.दरअसल अब उसकी जिंदगी के दो पक्ष तैयार हो चुके हैं. एक वो जो अभी हाल ही में वार्ता का माहौल तैयार होने के वक्त का है और दूसरा उसके ठीक पहले का.
अगर वार्ता के माहौल तैयार होने के पहले का जिक्र करें तो हम वो किम देखेंगे जो दुनियाभर की न के बावजूद लगातार परमाणु परीक्षण करता है.उसके परमाणु परीक्षणों से देश में भूकंप तक आते हैं. देश पर तमाम आर्थिक प्रतिबंध लग जाते हैं और देश की हालत खस्ताहाल हो जाती है.विरोध का स्वर उठाने वाले को वो बुरी तरह से मरवा देता है. जिन लोगों की इस दौरान उसने हत्या करवाई उनमें उसके फूफा भी शामिल हैं जिन्होंने किम के पिता की मौत के वक्त किम को सत्ता पर बैठाने में मदद की थी. किम पर मलेशिया में अपने सौतेले भाई की हत्या का आरोप भी लगता है. वो कथित रूप से दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति को भी कुछ भी बोलने से नहीं डरता है.कुल मिलाकर हमारे सामने बहुत ही क्रूर इंसान की छवि उभरकर सामने आती है.
अगर हम किम के इन कामों के पीछे उत्तर कोरिया के इतिहास पर नजर डालें तो शायद हमें किम की छवि तानाशाही छवि का मिल सके.किम के बाबा और पिता दोनों का रवैया इसी तरह का था.दोनों ने अमेरिका को कभी महत्व नहीं दिया. किम के पिता के वक्त ही पाकिस्तान के बदनाम खान कहे जाने वाले वैज्ञानिक कादिर खान ने उत्तर कोरिया को परमाणु बम बनाने की तकनीक दी. उसी वक्त से उत्तर कोरिया ने परमाणु बम बनाना शुरू कर दिया था. सत्ता के लिए विरोधियों का दमन तो तानाशाहों की स्वाभाविक प्रवृत्ति है. चीन जैसा अमेरिका विरोधी देश भी सहयोगी के रुप में किम को विरासत में मिला. ऐसे में किम को ये तानाशाही ये पागलपान विरासत में मिला और बाप दादों की विरासत को बदलना आसान नहीं होता.
दूसरी वार्ता का माहौल तैयार होने के बाद किम दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से मिला. डॉनल़्ड ट्रंप के वार्ता कैंसल करने के बाद भी किम ने दोबारा दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से मुलाकात की.अपना एक प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन भेजा और दोबारा मुलाकात के लिए एक मंच तैयार हुआ और आज दोनों की मुलाकात भी हुई.

बेशक किम का अपने देश में क्रूर हत्याएं करवाना, आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद धड़ाधड़ परमाणु परीक्षण करना बेशक उसे पागल और सनकी बनाता है लेकिन शायद क्रूर सत्ता की विरासत को संभालने वाले किम ने वक्त गुजरने के साथ शायद कुछ सीखा है. ऐसे में वक्त को भी उसके साथ शायद थोड़ी नरमी बरतनी चाहिए थी आखिर जिन लोगों के विरोध में वो था उन्होंने भी ईराक और सीरिया को बर्बाद किया हुआ है.हालांकि आज एक मुलाकात हुई है. इसके बाद भविष्य में कौन कितनी परिपक्वता दिखाता ये देखने वाली बात होगी लेकिन किम की अब तक की कहानी तो यही कहती है कि वर्तमान ने उसके साथ क्रूरता की है.