बीते दिनों बलोचिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता करीम बलोच, कनाडा के टोरंटो में मृत पाई गईं. बलोच पाकिस्तान सरकार की बड़ी आलोचक थीं और बलूचिस्तान में लोगों के उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघन पर खुलकर अपनी राय रखती थीं. आज हम आपको करीम बलोच के बारे में ज्यादा जानकारी देने वाले हैं.

कौन थी करीम बलोच?

करीम बलोच को 2016 में बीबीसी ने दुनिया की 100 प्रभावशाली महिलाओं में जगह दी थी. उन्हें यह सम्मान बलोचिस्तान में आजादी की लड़ाई के लिए होने वाले आंदोलन की वजह से दिया गया था. बलोच सोशल मीडिया के जरिए बलूचिस्तान में होने वाले अत्याचारों का मुद्दा उठाती रहती थीं. पाकिस्तानी सेना और सरकार बलूचिस्तान में लोगों का अपहरण करते हैं, उत्पीड़न करते हैं और उन्हें गायब कर देते हैं, बलूच इन लोगों के मुद्दे सोशल मीडिया पर उठाती थीं. वो बलूच महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती थीं. पाकिस्तान में किस तरह से धार्मिक संगठन और कानूनी संस्थाएं सरकार और सामाजिक तंत्र का इस्तेमाल करके महिलाओं का उत्पीड़न करते हैं, इस बारे में भी बलोच ने आवाज उठाई. 14 दिसंबर को उन्होंने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक रिपोर्ट को ट्वीटर पर शेयर किया. इस रिपोर्ट में भी बलूचिस्तान में लोगों के अपहरण, हत्या और उत्पीड़न का जिक्र था.

कैसे हुई मौत?

बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, टोरंटो पुलिस ने जानकारी दी कि बलोच को आखिरी बार 20 दिसंबर को देखा गया था. इसके बाद, उनका शव मिला और उनके परिवार ने निजता बनाए रखने की अपील की. बलोच रिफ्यूजी के तौर पर कनाडा में रहती थीं क्योंकि उन्हें पाकिस्तान में निशाना बनाया जाता था.

बलूचिस्तान में किस तरह लोगों को निशाना बनाया जाता है:

बलूचिस्तान में अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को इससे पहले भी निशाना बनाया जाता रहा है. इस साल की शुरूआत में ही, मार्च द बलूचिस्तान पोस्ट के चीफ एडिटर साजिद हुसैन का शव स्वीडन में मिला था. साजिद हुसैन, शव मिलने से पहले काफी दिनों से लापता थे. बलोच की तरह हुसैन भी बलूचिस्तान पोस्ट के जरिए, बलूचिस्तान में होने वाले अत्याचार की जानकारी दुनिया को देते रहते थे. हुसैन 2017 में पाकिस्तान छोड़ने को मजबूर हो गए थे. पाकिस्तान में उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी दी जा रही थी.

जिस तरह से करीम बलोच और हुसैन को कनाडा और यूरोप में निशाना बनाया गया है उससे पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी और उससे जुड़े संगठनों की गतिवितिधियों का अंदाजा लगाया जा सकता है। खासतौर से कनाडा में जिस तरह से भारत विरोधी तत्व लम्बे समय से एक्टिव है और भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते रहते है, उससे यह भी आशंका पुष्ट होती नज़र आ रही है की पाकिस्तानी तत्व खालिस्तानी संगठनों के साथ मिल कर कनाडा में अपनी जड़े जमा रहे है।

भारत में सरकार विरोधी प्रदर्शन में शामिल कई संगठनों को कनाडा से काफी आर्थिक मदद मिली है। पंजाब एंड सिंध बैंक ने पंजाब के कई संगठनों को नोटिस जारी कर खाते में आ रही विदेशी मुद्रा के बारे में पूछताछ के लिए बुलाया है। ऐसे में करीम बलोच की संदिग्ध मृत्यु कनाडा में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया संगठनों की खासी मौजूदगी की पुष्टि करती है।