ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरिजा मे के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। विपक्षी लेबर पार्टी के द्वारा लाया गया यह प्रस्ताव के 325 के मुकाबले 306 वोटों से गिर गया। इससे पहले आपको बता दें ब्रिटिश संसद में ब्रेक्सिट पर पीएम टेरिजा मे का पेश किया समझौते का प्रस्ताव गिर गया था.प्रधानमंत्री टेरिजा मे को ब्रिटिश संसद में अपने इस प्रस्ताव पर संसद के हाऊस ऑफ कामन्स में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था.उनके इस प्रस्ताव के खिलाफ संसद में 400 से ज्यादा वोट पड़े.खास बात है की इनमें से करीब 100 वोट उनकी अपनी कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्यों के थे.इसके बाद ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से बाहर जाना कई तरह की अनिश्चिताओं के बीच फंस गया है.जो विकल्प अब ब्रिटेन के सामने हैं उनमें से एक ब्रेक्सिट पर दोबारा जनमत संग्रह करवाना भी है हालांकि ये विकल्प बेहद बाद का है.हम आपको बताने जा रहे हैं ब्रेक्सिट का वो पूरा घटनाक्रम जिसके बाद पूर्व पीएम डेविड कैमरून ने अपने पद से इस्तीफा दिया और अब टेरिजा मे भी कुछ ऐसे ही हालात का सामना कर रही है.

ब्रेक्सिट पर बहस की शुरूआत-दरअसल बीते समय में ब्रिटने में कंजर्वेटिव पार्टी और यूके इंडिपेंडेंस पार्टी दबाव बना रही थी की ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में रहने पर दोबारा फैसला किया जाए.इनका तर्क था की ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन में कोई दंबाव नहीं है और ब्रिटेन को इसमें रहने के फायदे कम नुकसान ज्यादा है.इनमें रोजगार और सुरक्षा के मुद्दे अहम थे.खुद की पार्टी से पड़े दबाव के बाद डेविड कैमरून ने 2015 में ये वायदा किया की अगर वो सत्ता में आते हैं तो ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन में रहने या न रहने पर जनमत संग्रह करवाएंगे.कैमरून ने चुनाव जीता वो सत्ता में आए और जैसा वायदा किया था. उन्होंनें जनमत संग्रह भी करवाया.खास बात ये थी की कैमरून खुद यूरोपीय यूनियन में रहने के पक्षधर थे और उन्होंने इसी पक्ष में प्रचार भी किया.ऐसे में उनकी कंजर्वेटिव पार्टी दो धड़ों में बंट गई.एक वो जो यूरोपीय यूनियन में बने रहने के पक्षधर थे और दूसरे वो जो इससे निकलना चाहते थे.जो निकलना चाहते थे उनमें थेरेसा मे और बोरिस जानसन जैसे नेता प्रमुख थे.इससे पहले भी 1975 में इसी मुद्दे पर ब्रिटेन में जनमत संग्रह हुआ था जिसमें ब्रिटेन के 67 फीसदी लोगों ने यूरोपीय यूनियन में रहने के पक्ष में मतदान किया था

ब्रेक्सिट पर जनमत संग्रह-
23 जून 2016 का दिन ब्रेक्सिट पर जनमत संग्रह के लिए तय किया गया.जनमत संग्रह के जरिए जनता ने यूरोपीय यूनियन से अलग होने का फैसला किया.हालांकि जनमत संग्रह में हार जीत का अंतर बेहद कम था.51 फीसदी लोगों ने यूरोपीय यूनियन से निकलने के लिए मतदान किया था वहीं 48 फीसदी लोगों ने यूनियन में रहने के लिए मतदान किया था.जहाँ इंग्लैंड और वेल्स ने छोड़ने के लिये मत ज्यादा किया वहीं स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैण्ड ने रहने के लिये मत ज्यादा दिया.इस नतीजे के बाद ब्रिटिश मुद्रा पाउंड धराशायी हो गई और ब्रिटेन गंभीर आर्थिक संकट का शिकार हो गया.चूंकि पीएम डेविड कैमरून ने यूरोपीय यूनियन में बने रहने के पक्षधर थे इसलिए उन्होंने जनमत संग्रह के नतीजों को अपनी हार भी माना और अपने पद से इस्तीफा दे दिया.इस्तीफे के बाद कैमरून की एक फोटो वायरल हुई जिसमें वो अपने ऑफिस से खुद अपना सामान हटाते देखे गए.
कैमरून के कैबिनेट में गृहमंत्री का पद संभालने वाली टेरिजा ने कैमरून की ऑफिस से विदाई के महज एक घंटे बाद ही ऑफिस पहुंचकर पीएम पद संभाल लिया.वो मार्गेट थैचर के बाद ब्रिटेन की दूसरी महिला पीएम बनीं. बोरिस जॉनसन को विदेश मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई.

ब्रेक्सिट की प्रक्रिया-
टेरिजा मे को ये जिम्मेदारी थी की वो ब्रेक्सिट की प्रक्रिया को ठीक तरह से पूरा करें.29 मार्च 2017 को ब्रिटिश सरकार ने एक आर्टिकल 50 लागू किया जिसके तहत अगले दो साल बाद यानि 29 मार्च 2019 को ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन से अलग हो जाएगा.इस बीच यूरोपीय यूनियन के साथ ब्रिटेन को ब्रेक्सिट के लिए एक मसौदे को तैयार करना होगा और इसे ब्रिटिश संसद से पास कराना होगा.मे ने उस मसौदे को तैयार भी किया लेकिन इस पर उनके कैबिनेट में ही मतभेद हुए और ब्रेक्सिट मंत्री डोमिनिक रॉब ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.रॉब का कहना था की समझौते में जो प्रस्ताव तैयार किए गए हैं घोषणापत्र में किए गए दावों से विपरीत हैं.ऐसे में वो पद पर बने नहीं रह सकते.इसी बीच संसद में टेरिजा मे के खिलाफ एक अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया लेकिन मे ने विश्वासमत हासिल किया.ब्रेक्सिट की प्रक्रिया के तहत ही पीएम ने संसद में यूरोपीय यूनियन के साथ समझौते को पेश किया.जो संसद में गिर गया.

अब क्या होगा-
इस प्रस्ताव के गिरने के बाद टेरिजा को प्लान बी पेश करना होगा.इसके लिए उनके पास 3 दिन का वक्त होगा.इसके लिए उन्हें यूरोपीय यूनियन से कुछ मुद्दों पर रियायत लेनी होगी.हालांकि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश हो गया है ऐसे में पहले उन्हें विश्वासमत हासिल करना होगा जिसके बाद ही वो नए मसौदे के साथ संसद में दोबारा पेश हो पाएंगी.अगर वो विश्वासमत हासिल नहीं कर सकीं तो 15 दिनों बाद किसी और या उन्हें दोबारा ऐसा करने का मौका मिलेगा.अगर फिर भी कोई विश्वासमत हासिल नहीं कर सका तो ब्रिटेन में दोबारा चुनाव होंगे.ऐसे में ब्रिटेन के पास दो विकल्प होंगे या तो वो उस 29 मार्च की डेट की आगे बढ़वाए जिसकी अपनी एक प्रक्रिया है अन्यथा बगैर किसी समझौते के ही उसे ब्रिटेन से अलग होना होगा.

कुल मिलाकर ब्रेक्सिट ने ब्रिटेन में भयंकर उथल पुथल मचा दी है.डेविड कैमरून के बाद एक और पीएम इस जाल में है.क्या होगा किसी को पता नहीं है...