जो बाइडन जल्द ही अमेरिका के राष्ट्रपति बनने वाले हैं. वो दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स होंगे इसलिए सभी की निगाहें उन पर टिकी हुई हैं. जो बाइडन अभी अपनी टीम बनाना शुरू कर चुके हैं. उन्होंने एंटनी ब्लिंकेन को अपने विदेश मंत्री के तौर पर नामित किया है. माइक पांपियो की तरह आने वाले समय में ब्लिंकेन भी पूरी दुनिया के लिए अहम शख्सियत बनने वाले हैं. ऐसे में वो भारत के बारे में क्या सोचते हैं, यह बहुत ही ज़रूरी है. ब्लिंकेन, ओबामा प्रशासन में भी उप विदेशमंत्री थे. वो क्लिंटन प्रशासन में भी विदेश मंत्रालय में थे. बीते दिनों ब्लिंकेन ने भारत से जुड़े अलग-अलग मुद्दों के बारे में अपनी राय रखी. इनके ज़रिए काफ़ी हद तक पता चलता है कि आने वाले दिनों में भारत को लेकर अमेरिका की विदेश नीति किस तरह से आगे बढ़ेगी.

बीती 9 जुलाई को ब्लिंकेन ने हडसन इंस्टिट्यूट में भारत के बारे में खुलकर अपनी राय रखी थी. बेशक अमेरिका का विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी प्राथमिकताओं में बदलाव आ सकता है लेकिन फिर भी उनकी एक सोच का पता चलेगा. हडसन इंस्टिट्यूट में बोलते हुए ब्लिंकेन ने कहा, "भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करना और गहराई लाना, बहुत बड़ी प्राथमिकता होने वाली है. यह भारत और प्रशांत महासागर क्षेत्र के लिए बहुत ज़रूरी होने वाला है और ये बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा हम चाहते हैं. यह बेहद साफ़ होगा, स्थिरता लाने वाला होगा, और लोकतंत्र को मजबूत करने वाला होगा. इसके साथ ही यह कई बड़ी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भी मददगार साबित होगा.

ब्लिंकेन ने भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट की वकालत की है. ब्लिंकेन ने कहा कि बाइडन प्रशासन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थाई सीट पाने में मदद करेगा. चीन पर भी ब्लिंकेन की राय भारत के राहत की बात है. ब्लिंकेन ने चीन को भारत और अमेरिका दोनों के लिए चुनौती बताया. उन्होंने कहा कि चीन की भारत के खिलाफ़ एलएसी पर आक्रामता से निपटने की ज़रूरत है. बाइडन प्रशासन के प्रयासों में भारत मुख्य साझेदार होगा.

ब्लिंकेन ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर सीमापार से होने वाले आतंकवाद पर भारत के साथ खड़ा होने की बात कही. ब्लिंकेन ने कहा कि हम भारत की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए साथ काम करेंगे और मैं जोड़ना चाहूंगा कि सीमापार से होने वाले आतंकवाद से निपटना भी शामिल है. आतंकवाद की बात करें तो हम इसे कहीं भी स्वीकार नहीं करेंगे चाहें वो दक्षिण एशिया में हो या कहीं और.

कश्मीर और CAA पर राय- कश्मीर और CAA पर ब्लिंकेन जो कहा वो भारतीयों को वाकई पसंद नहीं आएगा. ब्लिंकेन ने CAA और जम्मू कश्मीर में मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई. ब्लिंकेन ने कहा कि यह वाकई बड़ी चुनौती होने वाली है. ब्लिंकेन ने कश्मीर में आतंकवाद को आज़ादी की लड़ाई बताते हुए कहा, "सरकार ने कश्मीर में जिस तरह से आज़ादी की लड़ाई और बोलने की आज़ादी पर हमला करने वाले कदम उठाए हैं, वो हमारे लिए चिंताजनक है. नागरिकता से जुड़े कुछ कानूनों के मामले में भी ऐसा ही है, लेकिन जब भारत जैसे किसी सहयोगी के साथ बात करना हमेशा आसान होता है, जहां आप खुलकर उन मुद्दों के बारे में बात कर सकते हैं जिन पर आपके बीच मतभेद हो. चाहें आप भले ही संबंधों को बेहतर बनाने के बारे में बात कर रहे हों.