पड़ोसी देश बांग्लादेश में शेख हसीना की एक बार फिर से ताजपोशी की तैयारी हो रही है.रविवार को हुए चुनाव में हसीना की पार्टी आवामी लीग ने बंपर जीत हासिल की है.हसीना की पार्टी ने चुनाव में बहुमत के लिए जरूरी 151 सीटों का आंकड़ा भी पार कर लिया है.खुद पीएम हसीना ने गोपालगंज-4 सीट से चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है.उन्होंने अपने विरोधियों को चुनाव में एकदम नेस्तानाबूद करते हुए 2,29,747 वोट हासिल किए.जबकि उनके प्रतिद्वंदी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के एस एम जिलानी को महज 123 वोट हासिल हुए.विपक्ष ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए दोबारा वोटिंग की मांग की है.

ये चुनाव बांग्लादेश के लिए एतिहासिक रहे हैं क्योंकि इस बार वहां पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल हुआ है.हालांकि सभी सीटों पर नहीं लेकिन 6 क्षेत्रों में ये चुनाव EVM के जरिए हुए हैं.हालांकि चुनाव के दौरान हिंसा भी हुई जिसमें 17 लोगों की मौत हो गई.1971 में पाकिस्तान से आजादी मिलने के बाद से बांग्लादेश में ये ग्यारहवां चुनाव था.पीएम शेख हसीना जहां चौथी बार पीएम बनने के लिए मैदान में थीं वहीं विपक्षी गठबंधन के कमाल हुसैन उनके सामने ताल ठोक रहे थे.देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की प्रमुख खालिदा जिया इस बार चुनाव नहीं लड़ पाईं .क्योंकि भ्रष्टाचार के जुर्म में उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है और वो इन दिनों जेल में हैं.खबरों के मुताबिक वो आंशिक लकवे की शिकार भी हैं.

अगर बात शेख हसीना के पिछले कार्यकाल की करें तो उनके समय में बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है.उनके समय में देश की वृद्धि दर करीब 6 फीसदी रही है.हालांकि भारत की तरह बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बांग्लादेश में भी बड़े चुनावी मुद्दे रहे.अगर भारत के साथ संबंधों की बात करें तो तीस्ता नदी के जल बंटवारे पर जहां दोनों देशों में कुछ सहमति बनी है वहीं सीमा विवाद से जुड़े कुछ मुद्दे हल भी हुए हैं.इस दौरान दोनों देशों के बीच कारोबार में भी करीब 30 फीसदी का इजाफा हुआ है.

भारतीय उपमहाद्वीप में जिस तरह चीन अपनी दादागिरी बढ़ा रहा है उसे देखते हुए भी बांग्लादेश में हसीना की जीत भारत के लिए एक राहत की बात है.दरअसल बांग्लादेश चीन और भारत के लगभग बीच में स्थित है.जिस तरह से चीन लगातार नेपाल, लंका और मालदीव जैसे देशों में अपनी पैठ बना चुका है वो भारत के लिए चिंता की बात है.अगर बांग्लादेश में सत्ता भारत के विरोध वाली आती तो चीन को भारत को घेरने के लिए और मोहरा मिल जाता.आपको बता दें की भारत के पांच राज्यों से बांग्लादेश की सीमा जुड़ी है.असम,पश्चिम बंगाल,मेघालय,त्रिपुरा और मिजोरम वो देश हैं.ऐसे में बांग्लादेश में भारत के साथ अच्छे संबंध रखने वाली सरकार जरूरी है.

भारत में असम में NRC की प्रक्रिया भी चल रही है.अगर वाकई ये पूरी होती है और नियम के मुताबिक सारी कार्रवाई की जाती है तो निश्चित ही भारत और बांग्लादेश के संबंधों की एक बड़ी परीक्षा होगी.क्योंकि भारत से निकाले गए नागरिकों को यहां पनाह देने पर शेख हसीना सरकार किस तरह का का रूख अख्तियार करती है ये देखने वाली बात होगी.