178 साल पुरानी ब्रिटिश ट्रेवल कंपनी थॉमस कुक ने अचानक से अपना कारोबार बंद कर दिया। आर्थिक संकट से जूझ रही कंपनी को $250 मिलियन की जरूरत थी। प्राइवेट इन्वेस्टर्स से रकम जुटा पाने में असफल रहने पर सरकारी मदद ही एक मात्र उपाय था जिससे कंपनी को बचाया जा सकता था।

यूरोपियन यूनियन से बाहर आने के लिए जूझ रही ब्रिटिश सरकार और कंपनी के बीच बात न बन सकने पर रात से कंपनी को काम रोकना पड़ा। अचानक काम बंद होने से यात्रा पर गए करीब डेढ़ लाख लोग अलग अलग जगह पर फंसे हुए है। वंही कंपनी के बंद होने से करीब 22000 लोगों के रोजगार पर भी संकट आ गया है। अकेले ब्रिटैन में 9000 लोग कंपनी के साथ जुड़े हुए थे।

थॉमस कुक इंडिया ने अपना बयान जारी करते हुए कहा है की उनका थॉमस कुक ब्रिटिश कंपनी के डूबने से कोई लेना देना नहीं है। थॉमस कुक इंडिया पूरी तरह अलग एंटिटी है जिसका मालिकाना हक़ कैनेडियन कंपनी फेयरफैक्स फाइनैंशल होल्डिंग्स के पास है।

कंपनी के बंद होने के बाद उसकी सारी बुकिंग निरस्त हो गयी है इसलिए ब्रिटिश सरकार ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है की जिन यात्रियों ने अपनी यात्रा शुरू नहीं की है वो एयरपोर्ट पर न जाये क्यों की उनकी बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार ब्रिटिश सरकार इतने बड़े स्तर पर यात्रियों को वापस ब्रिटेन लाने के लिए काम कर रही है। ब्रिटेन के परिवहन मंत्रालय के अनुसार लगभग 40 जहाजों का बेड़ा काम पर लग चुका है और लगभग डेढ़ लाख लोगों को वापस ब्रिटेन लाने की कवायद शुरू हो चुकी है।

थॉमस कुक के बिज़नेस मॉडल का असफल होना ये दिखाता है की जब आप समय के अनुसार अपने काम के तरीके में बदलाव नहीं लाते है तो मौजूदा समय में आप महत्वहीन हो जाते है। थॉमस कुक के काम करने का तरीका २०वीं सदी के अंत तक अच्छा माना जा सकता है जब लोग छुट्टियां मनाने के लिए ट्रेवल एजेंट पर भरोसा किया करते थे। २१वीं सदी में हर व्यक्ति खुद से इंटरनेट पर हर जानकारी जुटा लेता है और अपनी खर्च करने की क्षमता अनुसार होटल से लेकर कार तक की बुकिंग कर लेता है। ऐसे में वही पुराने बिज़नेस मॉडल का असफल होना बड़ी बात नहीं है।