बीते सोमवार को IPL-12 के इतिहास में वो घटना घटी जिसके बाद भारतीय गेंदबाज आर अश्विन तमाम लोगों के निशाने पर आ गए.दरअसल आर अश्विन ने राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाज जोस बटलर को 'माकंडिंग' के जरिए आउट किया.ये क्रिकेट के नियमों में शामिल है इसलिए है बटलर को आउट भी दिया.बटलर आउट होने के बाद बेहद गुस्से में पवेलियन लौटे.अश्विन को इस घटना के बाद कई क्रिकेटरों और पूर्व क्रिकटरों की आलोचना का सामना करना पड़ा.हालांकि कई खिलाड़ियों ने अश्विन का समर्थन भी किया.

मांकड़िंग का पहला वाकया 1947 में सामने आया था.उस वक्त वीनू मांक़ड़ ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया था.उसके बाद भारत के पूर्व कप्तान कपिल देव ने दक्षिण अफ्रीक के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया.2014 में भी जोस बटलर इसका शिकार बन चुके हैं.श्रीलंका के सुचित्रा सेनानायके ने तब उन्हें इसी तरह से आउट किया था.हालांकि सेनानायके ने उससे पहले उन्हें चेतावनी दी थी. आर अश्विन ने घटना के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "रनआउट पर कोई विवाद नहीं है, यह एक तुरंत लिया फैसला था। मैंने तो गेंद डाली ही नहीं थी कि वह क्रीज़ से बाहर चले गये। बल्लेबाज होने के नाते उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए था। हम सही तरफ खड़े हैं और कई बार ऐसे फैसलों से मैच बदल जाता."

अश्विन के रन आउट करने को तीन पैमानों पर देखा जाना चाहिए.पहला पैमाना खेल का है.खेल नियमों से खेले जाते हैं और खेल का व्यक्तिगत संबंधों पर असर न पड़े इसलिए खेल भावना को तवज्जो दी जाती है.इन सबके बीच खेल को जीतना भी सबसे जरूरी है.अगर अश्विन के आउट करने को देखें तो वो ICC के नियमों के अनुसार है,अगर नहीं होता तो अंपायर बटलर को आउट नहीं देते और अश्विन पर जुर्माना भी होता.हर कोई टीम मैच जीतना चाहती है और हर कोई खिलाड़ी अपनी टीम को मैच जितवाना चाहता है.अश्विन अपनी टीम के कप्तान भी हैं.ऐसे में एक खिलाड़ी के तौर पर अगर नियम के दायरे में अगर अश्विन ने कोई रन आउट किया है तो उसे गलत कैसे कहा जा सकता है.

क्रिकेट जगत से जुड़े तमाम दिग्गज इसे खेल भावना के विपरीत बता रहे हैं.1947 के बाद आज 2019 आ चुका है.तब से अब तक तमाम पूर्व क्रिकेटर ICC का हिस्सा रह चुके हैं.ऐसे में अब तक इसके खिलाफ नियम बन जाना चाहिए था.अश्विन के तरीके को विवादास्दपद बताने वालों की लाइन लगी है लेकिन ICC से इस नियम को हटाने की मांग किसी ने नहीं की है.अगर तमाम क्रिकेटरों और पूर्व क्रिकेटरों को ऐसा लगता है तो उन्हें ICC से इस नियम को हटाने की मांग करनी चाहिए.अश्विन ने जो किया वो कोई योजनाबद्ध नहीं था.अगली बार हो सकता है की कोई और खिलाड़ी भी इस तरह बल्लेबाज को आउट कर दे.उस वक्त फिर से खेल भावना का हल्ला पीटने से बेहतर है की अभी उस नियम को हटा दें जो 'मांकड़िंग' को वैध बनाता है.