बीती 10 जुलाई को टीम इंडिया विश्व कप के सेमीफाइनल में हार गई. न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया को 18 रन से शिकस्त दी. टीम इंडिया की इस हार से भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों में निराशा छा गई. रनआउट होने के बाद मैदान से दुखी होकर लौटते धोनी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. वाकई वो पल और तस्वीरें किसी भी क्रिकेट प्रशंसक को दुखी कर सकती थीं. बेशक भारत का सफर इस विश्व कप में यहीं थम गया है लेकिन क्रिकेट के मैदान ये खेल रूकने वाला नहीं है. ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम देखें कि हमने इस विश्व कप में क्या हासिल किया और किन बिंदुओं पर हमें ध्यान देने की जरूरूत है.

1.भारतीय गेंदबाजी- धोनी और रोहित शर्मा की भावुक तस्वीरों के बीच हम भारतीयों ने और भी कुछ मिस किया और वो भारतीय गेंदबाजी थी. भारतीय गेंदबाजों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार गेंदबाजी की. जसप्रीत बुमराह विपक्षी टीम के लिए पहेली बने रहे. भुवनेश्वर कुमार ने भी बेहतरीन गेंदबाजी की. चोट लगने से पहले और उसके बाद वापसी करके उन्होंने अपना उम्दा खेल जारी रखा. मोहम्मद शमी भले ही कुछ मैचों में महंगे साबित हुए हों लेकिन उन्होंने भी काफी विकेट झटके. हार्दिक पांड्या ने भी गेंद से बढ़िया योगदान दिया. जरूरत के वक्त पर विकेट लिए. स्पिन गेंदबाजी जरूर थोड़ी चिंता का विषय है. कुलदीप यादव और यजुवेंद्र चहल ने भले ही कुछ मौकों पर विकेट निकाले हों लेकिन वो पूरे टूर्नामेंट में पिटते रहे. सेमीफाइनल में भी यजुवेंद्र चहल की पिटाई हुई. इंग्लैंड के खिलाफ भी वो खासे महंगे साबित हुए थे.

एक वक्त में स्पिन गेंदबाजी भारत की ताकत थी. रन रोकना हो या विकेट निकालना भारतीय कप्तान स्पिनरों के पास जाना पसंद करते थे. अगर टीम उपमहाद्वीप के बाहर की हो तो स्पिन गेंदबाज और भी खतरनाक हो जाते थे. इस विश्व कप में भारत की ये ताकत कमजोर हुई और टीम को वो फायदा नहीं मिल पाया जो मिलना चाहिए था. ऐसे में आने वाले वक्त में भारत को स्पिन गेंदबाजी में और विकल्प खोजने होंगे. इस विश्व कप में जहां तेज गेंदबाज भारत के लिए उपलब्धि साबित हुए वहीं स्पिनरों ने अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं किया.

2. टीम का चयन - पूरे विश्व कप में भारत इस नंबर पर बल्लेबाजों के विकल्प के लिए जूझता रहा. शिखर धवन की चोट और राहुल के ओपनिंग पर जाने से समस्या और भी बड़ी हो गई. जिन विजय शंकर को 3D प्लेयर बताकर नंबर 4 के लिए ले जाया गया था वो बुरी तरह फ्लॉप रहे. अंबाती रायडू विजय शंकर से बेहतर बल्लेबाज थे ये सभी को पता है लेकिन चयनकर्ताओं ने शंकर को तरजीह दी.उनके चोटिल होने के बाद टीम में आए ऋषभ पंत ने अच्छी पारियां खेलीं लेकिन उन्होंने अपना विकेट सेमीफाइनल में जिस तरह से गंवाया उससे सभी निराश हुए. सेमीफाइनल में पंत के बाद दिनेश कार्तिक को उतारा गया जो फ्लॉप रहे.

उनके बाद हार्दिक पांड्या को उतारा गया. पांड्या का खेल आक्रामक बल्लेबाजी करने का है. मैच बचाने के लिए धैर्यभरी पारी खेलने की जरूरत थी. पांड्या ने वैसा करने की कोशिश भी लेकिन वो असफल रहे और अपना विकेट गंवा बैठे. अगर पांड्या की जगह तक धोनी को भेजा गया होता तो परिणाम शायद दूसरा होता.

सेमीफाइनल से पहले तक केदार जाधव टीम में रहे लेकिन एक मैच को छोड़कर न तो वो बैटिंग कर सके और न ही उनसे बॉलिंग करवाई गई. उस दौरान रवींद्र जाडेजा टीम से बाहर रहे. जाडेजा गेंदबाजी में काफी बेहतर रहे हैं. अगर आप टीम का चयन देखेंगे तो ये अराजकता का शिकार मालूम पड़ता है. शुरूआती तीन बल्लेबाजों को छोड़कर कोई भी कहीं भी खेल रहा है. टीम के चयन में ये हालत भी कहीं न कही हार की एक कारण है. अगर इस समस्या से भविष्य में पार नहीं पाया गया तो एक टीम बनाने में हम नाकाम रहेंगे.