अक्सर छक्के के साथ मैच को खत्म करने वाले धोनी ने मशहूर गायक मुकेश के गाने 'मैं पल दो पल का शायर हूं' के साथ अतंर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर को खत्म करने का ऐलान कर दिया. 4 मिनट 4 सेकेंड के वीडियो में धोनी ने अपने करियर के तमाम खास पलों को सजाकर, अपने चाहने वालों का दिल तोड़ दिया. धोनी ने क्रिकेट के मैदान पर अपने कौशल से सबको चौंकाया और आखिर में फिर से लंबी शांति के बाद संन्यास का ऐलान करके एक बार फिर सबको चौंका दिया. वर्तमान भारतीय कोच और रवि शास्त्री के शब्दों में कहें, तो 'एमएस धोनी फिनिशेस ऑफ इन स्टाइल'. विकेट के पीछे या विकेट के आगे, धोनी ने पता नहीं कितनी बार अनहोनी को होनी में बदला और भारत के तमाम लोगों को खुश होने का मौका दिया.

जब धोनी नए नए आए थे, तो लंबे बाल रखते थे. खेलने का अंदाज भी एकदम धुआंधार था. युवाओं और बच्चों के चहेते तो वो बड़ी जल्दी बन गए थे लेकिन फिर भी एक शंका रहती थी मन में, कहीं धोनी आगे फुस्स न हो जाएं. वक्त आगे बढ़ा और भारतीय क्रिकेट एक बार फिर विवादों में आ गया. ग्रैग चैपल के साथ, सौरव गांगुली की तकरार और फिर टीम का खराब प्रदर्शन. टीम को लड़ना सिखाने वाले 'दादा' की कप्तानी जा चुकी थी और थोड़े वक्त बाद चैपल साहब भी ने भी विदाई ले ली. मिस्टर वॉल कहे जाने वाले राहुल द्रविड़, कप्तानी में वो करिश्नमा नहीं दिखा पाए जिसकी उम्मीद दादा के उत्तराधिकारी से की जा रही थी. ऐसे वक्त में कमान मिली, कैप्टन कूल को. 2007 का टी-20 विश्व कप धोनी की पहली बड़ी परीक्षा थी और धोनी ने उसे सौ में सौ नंबर से पास किया. भारतीय क्रिकेट को धोनी ने बतौर कप्तान वो खुशियां दी जिनका इंतजार क्रिकेट प्रेमी एक लंबे अर्से से कर रहे थे.

धोनी के तमाम फैंस के मन में बस एक ही सवाल है, क्या वो वापस आएगा?

वर्ल्ड कप 2011 को ही ले लीजिए, फाइनल तक धोनी का बल्ला कुछ खास नहीं कर पाया था और फाइनल में सचिन-सहवाग जल्दी ही पवेलियन लौट गए. एक जमाने में सचिन के आउट होने का मतलब भारत की हार हुआ करता था, वो भी फाइनल मैच लेकिन गंभीर और कोहली ने पारी को संभाला. गंभीर ने उस मैच में खूंटा गाड़ बैटिंग की. कोहली आउट हुए, लगा कि ये क्या हुआ और फिर मैदान में आए धोनी. छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले धोनी उस दिन खुद ऊपर बल्लेबाजी करने आ गए. गंभीर-कोहली ने जिस नींव को तैयार किया था उस नींव पर धोनी ने जीत की एक शानदार इमारत खड़ी कर दी. घरों में टीवी पर नजरे गड़ाए बैठे, बच्चे-बूढ़े सब एक साथ अपनी जगह पर उछल पड़े. धोनी ने छक्का मारकर वो मैच जिताया था. उस रात को याद करके एक अलग ही खुशी मिलती है. 2003 के फाइनल की हार, 2007 में वर्ल्ड कप से जल्दी बाहर होने का गम, उस रात धोनी ने सब कुछ धो दिया.

महेंद्र सिंह धोनी, एक ऐसा खिलाड़ी जो खेल अपने हिसाब से ख़त्म करता है

अक्सर धोनी को देखकर लगता था कि ये कर क्या रहे हैं. 2007 के टी-20 विश्व कप फाइनल में, धोनी ने आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा से करवाया. ऐसा लगा कि, हम हार जाएंगे लेकिन धोनी में खुद पर और अपने खिलाड़ियों पर भरोसा करने की ताकत थी. भरोसे की इस ताकत से ही वो अपने खिलाड़ियों से बेहतरीन प्रदर्शन करवाने में कामयाब रहते थे. बांग्लादेश के खिलाफ टी-20 विश्व कप का मैच. सभी मुख्य गेंदबाजों के ओवर खत्म हो गए थे, ऐसे में आखिरी ओवर फेंकने आए, हार्दिक पांड्या. उस मैच में भी लगा कि भारत हार जाएगा. यहां तक बांग्लादेशी खिलाड़ी भी एक एक रन लेने के बाद जीत की खुशी मना रहे थे. उस दिन भी बांग्लादेश और जीत के बीच धोनी खड़े हो गए. बेहतरीन फील्ड सेटिंग और पांड्या को विकेट के पीछे से गेंद सही जगह फेंकने का नसीहतें. उस ओवर में दो बांग्लादेशी खिलाड़ी कैच आउट हुए. आखिरी गेंद में बांग्लादेश को जीत के लिए 2 रन चाहिए थे. धोनी ने अपना एक ग्लव्स उतार दिया. पांड्या को गेंद बाहर फेंकने को कहा. धोनी को पता था कि बांग्लादेशी खिलाड़ी हर हाल में रन के लिए भागेंगे. हुआ भी वही, एक तरफ बांग्लादेशी खिलाड़ी रन के लिए भागे तो दूसरी तरफ धोनी गेंद लेकर विकेटों की तरफ. विकेट को बिना देखे गेंद को मार देने वाले धोनी ने उस दिन अपनी दौड़ पर भरोसा किया और वो कामयाब भी हुए. धोनी ने वो मैच बांग्लादेश के जबड़े से खींचकर निकाला था. कहा जाता है कि उस दिन धोनी, दुनिया के सबसे तेज धावक यूसैन बोल्ट से भी तेज भागे थे.

एक ऐसा मौका जब सचिन तेंदुलकर पाकिस्तान की तरफ से क्रिकेट खेले

विडंबना मानव जीवन का एक अहम हिस्सा है और भला धोनी भी उससे कैसे बच सकते थे. जो धोनी पूरे करियर में विकेटों के बीच सबसे तेज दौड़ के लिए जाने जाते रहे वो अपने आखिरी मैच में रन आउट हो गए. वो रन आउट शायद भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे दुखद रन आउट होगा. विपरीत हालात में भी शांत रहने वाले धोनी उस दिन रोते हुए पवेलियन लौट गए. सच में, उस दिन भारत की हार से ज्यादा दुख धोनी की उस तस्वीर को देखकर हुआ था. आज कोई ये बात नहीं कर रहा कि धोनी ने अपने करियर में कितने रन बनाए, कितने शतक बनाए. दरअसल धोनी ने अपने खेल और कप्तानी से वो खुशियां भारत को दीं जिनके आगे कोई रिकॉर्ड की बात नहीं करना चाहता. लोग धोनी के बारे में याद करेंगे तो उनका वो आखिरी ओवरों में मैच जिता देना, उनकी वो तेज स्टंपिंग जिसने लोगों को 'चीते की चाल, बाज की नजर और धोनी की स्टंपिंग पर संदेह नहीं करते' कहने को मजबूर कर दिया. लोग धोनी के उस भरोसे को याद करेंगे जिसके बूते कप्तान कोहली DRS ले लिया करते थे. जिस DRS को 'धोनी रिव्यू सिस्टम' कहा जाने लगा.