सफेद दाढ़ी,ऑस्ट्रेलिया की भयंकर गर्मी,करोड़ो भारतीयों की उम्मीदों का बोझ और फिर खराब फॉर्म के बाद आलोचकों का दबाव लेकिन जैसा शास्त्री जी कहते थे एमएस धौनी फिनिस्ड इन हिज ओन स्टाइल. वैसे तो आलोचना क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने भी खूब सुनी.आलोचकों ने न जाने कितनी बार उनका रिटायरमेंट करवाया लेकिन धोनी के मामले में तो गजब ही हो गया.आलोचक कहने लगे की टीम अब धोनी को ढो रही है.धोनी की बल्लेबाजी से टीम हार रही है,लेकिन धोनी ने अपने खेल से फिर से दिखाया की उनका विकल्फ ढू्ंढना शायद मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.ऑस्ट्रेलिया की धरती धोनी के शानदार खेल और आलोचकों को माकूल जवाब की गवाह बनी.

हममें से हर कोई किसी न किसी प्रोफेशन में है.हमारे माता पिता भी हैं.क्या आप अपने पिता से ये उम्मीद करते हैं की वो आपके बच्चों को भी गोद लेकर उतने ही उत्साह से खिलाएं जैसे वो आपको खिलाते होंगे.उम्र का प्रभाव हर किसी पर पड़ता है.कोई भी हर दिन एक जैसा नहीं कर सकता.हमें समय के हिसाब से बदलना पड़ता है खुद को ढालना पड़ता है.ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे वनडे में एडिलेड की भयंकर गर्मी में बल्लेबाजी करते हुए धोनी परेशान हो गए.वो मैदान पर ही लेट गए.उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी लेकिन थोड़े से इलाज के बाद वो वापस उतरे.धोनी ने 55 रन की उस पारी में कोई चौका नहीं मारा.सिर्फ 2 छक्के लगाए.लेकिन उन्होंने टीम को बिखरने नहीं दिया और जीत दिलाई.

धोनी का अभी बल्लेबाजी का तरीका,तीन अर्द्धशतक,सीरीज में भारत की जीत और धोनी का वो बीमार होना सबको एक साथ देखने की जरूरत है.ये सही है की हमने धोनी को विस्फोटक अंदाज में विरोधी गेंदबाजी को तहस नहस करते देखा है.अपने उस भरोसे को पूरा करते देखा है की धोनी है तो आखिरी गेंद पर भी छक्का मार देगा.लेकिन 14 साल के क्रिकेट करियर और 37 साल की उम्र में विकेट के पीछे मुस्तैद दिखने वाले धोनी से अब इसकी उम्मीद करना क्या बेईमानी नहीं होगा.बेशक इसके पीछे ये तर्क दिया जा सकता है की ये भारतीय क्रिकेट टीम का सवाल है जिसमें हमेशा सबसे फिट खिलाड़ी होना चाहिए.लेकिन क्या धोनी के अपने बल्लेबाजी के तरीके को बदल देने भर से वो अनफिट हो जाते हैं.

वो कोहली की कप्तानी में मदद करते हैं.विकेटकीपर के तौर पर आलोचक भी उनकी स्टंपिंग के मुरीद हैं.बस धोनी वैसी बल्लेबाजी अब नहीं करते जैसे आप उन्हें देखना चाहते हैं.लेकिन वो विदेशी धरती पर अपनी बल्लेबाजी से जीत दिलाते हैं.तो धोनी नहीं बल्कि खुद के बारे में सोचने की जरूरत आपको है की आप कितने जिद्दी हैं.आलोचना के अपने दायरे हैं.आप धोनी के किसी एक मैच में खराब प्रदर्शन की आलोचना कर सकते हैं लेकिन उनके पूरे खेल पर सवाल खड़े कर देना और टीम में जगह न देने की बात करना अतिवाद है.

खैर जैसा की हमने ऊपर भी लिखा है की आलोचना सचिन की भी हुई लेकिन उन्होंने अपनी पारी शानदार अंदाज में पूरी की.धोनी की भी आलोचना होती रहेगी लेकिन धोनी का खेल दिखाता है की हम उन्हें यूं ही नकार नहीं सकते. इंग्लैंड में होने वाले विश्वकप के लिए हमें अभी उनकी जरूरत है....