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सुविधाओं के अलावा सामान चोरी में भी नंबर एक है दिल्ली का आईजीआई एयरपोर्ट

Sat, 06/29/2019 - 01:36

अगर आप दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे से फ्लाइट पकड़ने जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए. आप का सामान चोरी हो सकता है. जी हां इंदिरा गांधी हवाई अड्डा चोरी के मामले में देश में नंबर एक है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक मई 2016 से 2019 के बीच इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर चोरी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. मुंबई एयरपोर्ट इस मामले में दूसरे नंबर पर है.

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ग्राम पंचायत स्तर पर महिला सशक्तिकरण की क्या है सच्चाई

Fri, 06/28/2019 - 01:48

देश में महिला राष्ट्रपति और महिला पीएम, सीएम से लेकर खिलाड़ियों तक की बात खूब की जाती है. उनके जरिए महिला सशक्तिकरण की कहानी भी गढ़ी जाती हैं. इन कहानियों के बीच महात्मा गांधी के बेहतर पंचायती राज का सपना याद आता है. पंचायतें शासन की सबसे छोटी ईकाई हैं और इनके जरिए शासन समाज से सबसे बेहतर ढंग से जुड़ता है. इन पंचायतों की नजर से महिला सशक्तिकरण को देखने पर तस्वीर कितनी साफ होती है?

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जेल में बंद भारतीयों की संख्या में अरब देश टॉप पर, इजराइल सबसे नीचे

Thu, 06/27/2019 - 02:48

जब जब भारत के दुश्मनों की बात आती है तो पाकिस्तान का नाम सबसे पहले दिमाग में आता है. जब विदेश में जेल में बंद भारतीयों की बात की जाती है तो भी ऐसा लगता है कि पाकिस्तान में ही भारत के सबसे ज्यादा कैदी बंद होंगे लेकिन ऐसा नहीं है. जब विदेशों में जेल में बंद भारतीयों की बात की जाती है तो सऊदी अरब इस मामले में सबसे ऊपर है. भारत के मित्र देश इजरायल और जापान इस सूची में सबसे नीचे है.

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यूपीए-2 की तुलना में मोदी सरकार नक्सलियों पर लगाम लगाने में सफल रही

Thu, 06/27/2019 - 02:23

नक्सल समस्या से बीते समय में हमारा देश बुरी तरह से प्रभावित रहा है. लगातार नक्सली हमलों में नागरिकों और जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. नक्सली हमलों में राजनेता भी बच नहीं पाए हैं और कांग्रेस, बीजेपी और टीडीपी सभी पार्टियों के नेताओं से लेकर अधिकारी तक नक्सली हमलों का शिकार बने हैं. हालांकि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में यूपीए 2 की तुलना में नक्सली घटनाओं में काफी कमी आई है. साथ ही मारे जाने वाले नक्सलियों की संख्या भी बढ़ी है.

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कैसे है अब हालात गर्मी में प्यास से बदहाल चेन्नई के और कौन है इसका जिम्मेदार

Tue, 06/25/2019 - 02:37

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई इन दिनों जल संकट से जूझ रही है. लोगों को पीने के पानी के लिए मोहताज होना पड़ रहा है. राज्य में विपक्षी दल डीएमके ने अपने प्रमुख एमके स्टालिन नेतृत्व में प्रदर्शन किया. इस जल संकट को 30 साल का सबसे गंभीर जल संकट बताया जा रहा है. राज्य सरकार एक और जिले वेल्लूर और केरल से ट्रेन के जरिए पानी चेन्नई लाने पर विचार कर रही है. आज हम आपको चेन्नई के इसी जल संकट के बारे में बताने जा रहे हैं-

कैसे हैं अभी हालात-

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इंदिरा गाँधी से लेकर मोदी तक सोनभद्र के पानी की यह समस्या दूर नहीं कर पाये

Mon, 06/24/2019 - 00:50

यूपी में एक सोनभद्र जिला है. इस जिले में कई गांवों के लोग फ्लोरोसिस नाम की बीमारी से काफी ज्यादा प्रभावित हैं. जवान लोग बूढ़े दिखते हैं. बीमारी की वजह से बेरोजगार हैं. फ्लोरोसिस से ग्रसित व्यक्ति के दांत ख़राब हो जाते हैं और हाथों व पैरों की हड्डियां टेढ़ी हो जाती हैं, जिसके कारण वह चलने फिरने से लाचार हो जाता है.यह बीमारी बच्चों से लेकर अधिक उम्र वाले व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेती है. बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को ये बीमारी होने का कारण पानी में फ्लोराइड की मात्रा का ज्यादा होना है और ये मात्रा सोनभद्र में औद्योगिक कचड़े की वजह से ज्यादा है.

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संजीव भट्ट कभी उस बैठक का हिस्सा नहीं थे जिसे लेकर उन्होंने मोदी पर दंगो के आरोप लगाए

Sat, 06/22/2019 - 23:04

गुजरात के पूर्व IPS संजीव भट्ट ने दावा किया था कि वो नरेंद्र मोदी के गुजरात के सीएम रहते एक खास मीटिंग का हिस्सा थे. ये मीटिंग 2002 में हुई थी. मीटिंग के बारे में दावा किया जाता है कि उस समय नरेंद्र मोदी ने कई पुलिस अधिकारियों को देर रात बुलाकर दंगा करने वाले हिंदुओं पर कार्रवाई न करने का कहा था. संजीव भट्ट दावा करते हैं कि वो इस मीटिंग में शामिल हुए थे. संजीव भट्ट के दावे को एक वरिष्ठ पत्रकार मनु जोसेफ ने नकारा है. संजीव भट्ट को हाल ही में एक शख्स की हिरासत में मौत के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

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कौन लोग है जिन्होंने बिहार में अपना काम किया होता तो बच्चों को बचाया जा सकता था

Fri, 06/21/2019 - 23:38

बिहार में अब तक चमकी बुखार से 156 बच्चों की मौत हो चुकी है. मुजफ्फरपुर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है. यहां सबसे ज्यादा बच्चों की मौत हुई है. स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठ रहे हैं. बिहार में इस बुखार का कहर नया नहीं है 2012, 2014 के बाद एक बार फिर से बुखार से बच्चे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. ऐसा नहीं है कि बीच के सालों में बुखार का असर नहीं रहा है लेकिन ऊपर बताए गए सालों की अपेक्षा कम जरूर है. आखिर बिहार में इस त्रासदी के गुनहगार कौन कौन लोग हैं. वो कौन कौन लोग हैं जिन्होंने अगर अपना काम ठीक से किया होता तो इस त्रासदी से बचा जा सकता था और कम से कम इसके प्रभाव को कम किया जा सकता था.

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मुज्जफरपुर मास मर्डर: माफ करना बच्चों तुमने बिहार में जन्म लिया

Tue, 06/18/2019 - 02:38

लोहिया ने कहा था 'जिंदा कौमें बदलाव के लिए 5 साल इंतजार नहीं करती वह किसी भी सरकार के गलत फैसले का फौरन विरोध करती है'. बिहारियों को तो मुर्दों की जमात भी नहीं कहा जा सकता, ये बदलाव तो चाहते हैं लेकिन दूसरे के घर में.

पता नहीं किस ने तमगा दे दिया कि यहां राजनीतिक रूप से जागरूक लोग रहते हैं. जब तुम्हारे अपने सैकड़ों मासूम बच्चे चमकी बुखार से मर रहे हों, तुम्हारे अपने लोग लू से जान गंवा रहें हो, बाढ़ से तुम मरते हो, कुपोषण सबसे ज्यादा तुम्हारे यहां है और फिर भी तुम सड़कों पर उतरने की जगह ट्रंप और किम जोंग की पॉलिटिक्स पर डिस्कस कर रहे हो तो काहे का राजनीतिक जागरूकता बे.

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करोड़पति आशिक की जहाज अपहरण की धमकी पड़ी भरी अब जिंदगी बीतेगी सलाखों के पीछे

Wed, 06/12/2019 - 02:20

कई बार हम अखबार में खबर पढ़ते है की किसी शख्स ने हवाईजहाज के अपहरण की या जहाज में बम होने की झूठी खबर फैला दी। ऐसा करने के पीछे जो कारण सामने आते है वो भी अजीबोगरीब होते है। कई बार लोग सिर्फ शरारत में ऐसा कर देते है। कई बार सामने आया है की कोई शख्स को एयरपोर्ट पहुंचने में देरी हो रही थी तो ऐसा करके प्लेन रोकना चाह रहे थे।

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आपराधिक घटना चाहे बड़ी हो या छोटी अब धर्म के चश्मे से क्यों देखी जाने लगी है?

Mon, 06/10/2019 - 03:00

अलीगढ़ में ढाई साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की सीमा पार कर दी गई. स्वाभाविक है कि इसको लेकर लोगों में गुस्सा है लेकिन सवाल उठता है कि इस घटना के बाद लोगों ने समुदाय विशेष के खिलाफ मोर्चा क्यों खोल दिया है? उन्हें नफरत और हिकारत भरी नजरों से क्यों देखा जाने लगा है? और उससे भी बड़ा सवाल कि हर घटना के बाद लोग उसे धार्मिक रंग क्यों देने लगे हैं?

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निर्भया की तरह अलीगढ़ पर आक्रोश, शोर खूब है पर नतीजा??

Sat, 06/08/2019 - 03:40

यूपी के अलीगढ़ में एक बच्ची से दरिदंगी की वारदात हमारे सामने है. महज तीन साल की बच्ची के साथ आरोपियों ने हैवानियत की सारे हदें पार कर दीं. बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि आरोपियों ने बच्ची का दाहिना हाथ काट दिया, दोनों आंखों में जख्म दिए, पसलियां तोड़ दीं, पैर भी तोड़ दिया, सर में गहरी चोट की, नाक की हड्डी तोड़ दी और इसके बाद बच्ची को कूड़े में फेंक दिया. जहां कुत्ते उसके शव को नोचते मिले. इस सबसे अलग बच्ची के साथ रेप की पुष्टि के लिए स्लाइड भेजी गई है जिसका परीक्षण होना बाकी है.

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जम्मू कश्मीर में परिसीमन के जरिये दूरगामी परिणाम की कोशिश में है अमित शाह

Wed, 06/05/2019 - 01:42

मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में जम्मू कश्मीर को लेकर जिस योजना पर काम कर रही है उससे जल्द ही राज्य में सीएम की कुर्सी पर एक हिंदू बैठा नजर आ सकता है. दरअसल गृहमंत्री अमित शाह जम्मू कश्मीर को लेकर लगातार बैठकें कर रहे हैं. उन्होंने सबसे पहले राज्यपाल सत्यपाल मलिक से चर्चा की थी और अब वो गृह सचिव और आईबी प्रमुख के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो सरकार जम्मू कश्मीर में फिर से विधानसभा सीटों के परिसीमन पर विचार कर रही है. इसके लिए सरकार जम्मू कश्मीर के लिए नया परिसीमन आयोग गठन कर सकती है.

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मायावती के सभी सीटों पर उपचुनाव लड़ने के ऐलान के बाद क्या होगा अखिलेश का दांव

Tue, 06/04/2019 - 01:27

कल बीएसपी प्रमुख मायावती ने दिल्ली में पार्टी एक बड़ी बैठक बुलाई. बैठक में उन्होंने लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए एसपी को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अखिलेश अपने कोर वोटर यादवों का वोट ही गठबंधन को ट्रांसफर नहीं कर पाए. यही वजह रही की उनके परिवार के सदस्य भी चुनाव हार गए. इसी के साथ मायावती ने यूपी में 10 साल बाद पहली बार उपचुनाव लड़ने का एलान किया. अब बीएसपी यूपी की 11 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लड़ेगी. एसपी के लिए ये जोरदार झटका है. अखिलेश यादव के लिए तो झटका है ही और साथ ही राजनीति के एक बड़े प्रयोग के लिए भी झटका है.

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शिशु मृत्यु दर में सुधार, पहले के मुकाबले 42 प्रतिशत की कमी

Mon, 06/03/2019 - 02:53

भारत में बीते 11 सालों में शिशु मृत्यु दर में 42 फीसदी की कमी आई है. सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में अभी जन्म लेने वाले 1000 शिशुओं में से 33 की मौत हो जाती है. हालांकि ये ताजा आंकड़े 2017 तक के हैं. 2006 में जन्म लेने वाले शिशुओं में से 57 की मौत तुरंत हो जाती थी. शिशु मृत्यु दर में कमी के बावजूद भारत में शिशु मृत्यु दर दुनिया भर के औसत से कहीं ज्यादा है. भारत में शिशु मृत्यु दर अभी 29.4 फीसदी है. ये गरीब अफ्रीकी देशों सेनेगल के बराबर है. अगर पड़ोसियों में बात करें तो पाकिस्तान और म्यांमार ही इस मामले में भारत से पिछड़े हैं.

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