राहुल गांधी इन दिनों राफेल डील को लेकर खासे आक्रामक हैं.वो लगातार राफेल डील में भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठा रहे हैं.उनका आरोप है कि डील में रेट बाद में बढ़ाए गए जिसके कारण उद्योगपति अनिल अंबानी फायदा पहुंचा.अबानी नाम और राहुल के हमले नए नहीं हैं अगर मोदी सरकार के 4 साल के दौरान सरकार के निशाने पर कोई और रहा तो दो नाम हैं एक अंबानी और गौतम अडानी.फिलहाल राहुल के रवैये को देखकर लगता है कि अगर आज वो सत्ता में आ जाएं तो तुरंत ही अंबानी-अडानी को जेल में डाल देंगे.केजरीवाल जी के सत्ता में आने से पहले भी ऐसा ही लगता था और जेल भेजना तो नहीं लेकिन चुनाव प्रचार में अंबानी अडानी के खिलाफ सख्त रवैया बीजेपी का भी दिखा था.

इन सबके हाल देखकर लगता है कि अंबानी-अडानी भी भारतीय राजनीति के कश्मीर और मुस्लिम वोट बैंक की तरह हो गए हैं जो समस्याएं कभी हल नहीं की जाती क्योंकि अगर की जाएंगी तो राजनीति करने के लिए कुछ बचेगा ही नहीं.दरअसल एक वक्त था राहुल गांधी के पास,मौका भी था.लेकिन तब उन्होंने जो किया उसकी कहानी हम आज आपको बताने जा रहे हैं.

दरअसल 28 अक्टूबर 2012 में यूपीए सरकार में मंत्रिमंडल में फेरबदल किया गया.ये फेरबदल विवादों में घिर गया. विवाद की वजह थी की सरकार ने जयपाल रेड्डी को पेट्रोलियम मंत्री के पद से हटा दिया था.दरअसल मंत्रालय से हटने से पहले रेड्डी ने कई ऐसे फैसले लिए थे.जिससे रिलायंस इंड्रस्ट्रीज ग्रुप को नुकसान पहुंचा था.ऐसा कहा जाता है कि रेड्डी के सख्त फैसलों से नाराज रिलायंस के दबाव में सोनिया ने उन्हें पद से हटा दिया.इस फैसले को लेकर सरकार पर ये आरोप विपक्ष ने लगाए थे लेकिन अगर हम रेड्डी के फैसले देखेंगे तो वाकई हमें पता चलेगा की वो आरोप सही हैं.

रिलायंस ने मांग की थी नैचुरल गैस के दाम बढ़ा दिए जाएं.रेड्डी ने रिलायंस की इस मांग को अस्वीकार कर दिया.रेड्डी ने तर्क दिया की EGOAM ने पहले दाम तय कर दिए हैं और अब दोबारा इन पर कोई विचार 2014 में ही हो सकता है.रिलायंस ग्रुप के लिए ये बात बड़ा झटका थी.

रिलायंस के पास केजी बेसिन के जी D6 से गैस निकालने का ठेका था.रिलायंस को एक निश्चित सीमा दी गई थी जहां तक उसे कम से कम उत्पादन करना था लेकिन रिलायंस ग्रुप ऐसा करने में नाकाम रहा लिहाजा रेड्डी ने जांच के आदेश दे दिए.रिलायंस ने 1.46 अरब डॉलर का खर्च दिखाया था.रिलायंस के अनुसार केजी बेसिन से गैस निकालने में ये खर्चा हुआ था,रेड्डी ने रिलायंस के इस खर्चे को नामंजूर कर दिया और ये बात रिलायंस के लिए बड़ा झटका थी.माना जाता है कि इसी वजह से रिलायंस ने रेड्डी को पद से हटवा दिया.

रेड्डी की जगह वीरप्पा मोइली को दी गई.रेड्डी को विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्रालय सौंप दिया गया.रेड्डी नाराज हुए वो भी इतने ज्यादा कि मोइली को मंत्रालय का पदभार सौंपने भी नहीं आए.चुनाव में 2 साल का वक्त बाकी था विपक्ष मुद्दों की तलाश में हमलावर रहता था.बीजेपी ने मुद्दे को जोरशोर से उठाया.अरविंद केजरीवाल तब इंडिया अंगेस्ट करप्शन चलाते थे.उन्होंने भी ट्वीटर से लेकर टीवी तक पर खूब तीर चलाए.कुल मिलाकर अंबानी नाम का इस्तेमाल दोनों ने किया.

2014 में चुनाव हुआ बीजेपी ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई.सरकार बनने के कुछ दिन बाद ही विपक्ष यानि कांग्रेस ने अंबानी चालीसा पढ़नी शुरु कर दी.इस बार खास ये था कि अंबानी के साथ गुजरात के कारोबारी गौतम अडानी का नाम भी जुड़ा था.हालांकि मोदी सरकार ने 2014 में लोकसभा में दिए गए जवाब में बताया था की सरकार ने केजी बेसिन से गैस के कम उत्पादन के कारण रिलायंस पर 35 अरब का जुर्माना लगाया है.बाकी अगर उद्योगपतियों से करीबी की बात की जाए तो जिन अनिल अंबानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं वो पीएम के साथ रूस दौरे पर भी गए थे जहां कुछ रक्षा सौदे हुए थे.इन समझौतो के तहत तय हुआ था की अनिल की मदद से मेक इन इंडिया प्लान के तहत भारत में रक्षा सामग्री का उत्पादन होगा.

जयपाल रेड्डी प्रकरण से लेकर आज तक के राहुल गांधी में जो अंतर है सवाल उस पर खड़े होते हैं.एक तरफ जब आप सत्ता में होते हैं तब अपने ही मंत्री को अंबानी ग्रुप पर कार्रवाई करने के लिए हटा देते हैं दूसरी तरफ जब आप सत्ता से बाहर होते हैं तो उन्हीं पर सवाल खड़े करते हैं.शायद बात ये है कि राहुल गांधी को लगता है कि अंबानी अडानी का नाम सीधा भारत की आम जनता के जहन में तीर की तरह चुभता है जिसके जरिए आसानी से वोट बटोरे जा सकते हैं और ठीक यही बातें बीजेपी के ऊपर भी लागू होती है.अगर 2014 चुनाव के पहले ये अंबानी इतने ही बुरे थे तो आखिर क्यों सत्ता में आने के बाद इनका हर व्यापारिक गतिविधि में साथ लिया जाने लगा.ये दोहरा रवैया रखकर देश की जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है.