आज विश्व महिला दिवस है और आपको महिलाओं से जुड़े गर्व करने वाले तमाम लेख पढ़ने को मिले होंगे.ये सच भी है पहले के मुकाबले महिलाओं के लिए मौके अब बढ़े हैं.वो तमाम क्षेत्रों में पुरूषों से आगे हैं लेकिन इन सबके बीच हम तमाम जमीनी तथ्यों को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते.विवाहित महिलाओं से जुड़ी एक रिपोर्ट हम आपके सामने रखने जा रहे हैं जो बताती है की भारत में आज भी समाज को जन्म देने वाली मां किस तरह आत्महत्या करके अपनी जान गंवा देती है.

भारत में विवाहित महिलाओं की मौत के पीछे आत्महत्या सबसे बड़ा कारण है.समाज और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर रिसर्च करने वाली संस्था द लैंसेट के एक रिसर्च में ये बात सामने आई है.1990 से 2016 के बीच किए गए रिसर्च के मुताबिक दुनियाभर में आत्महत्या करने वाली महिलाओं में 37 फीसदी भारतीय हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी इस रिसर्च में बताया गया है की भारतीय महिलाओं में आत्महत्या की दर विश्व की आत्महत्या दर से ठीक दोगुनी है.भारत में जहां 1 लाख महिलाओं में 15 महिलाएं आत्महत्या करती हैं वहीं विश्व में हर 1 लाख में से 7 महिलाओं को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है.अगर सीधे तौर पर कहें तो दुनिया भर में आत्महत्या करने वाली 10 महिलाओं में से 4 महिलाएं भारतीय हैं.खास बात ये है की इनमें से अधिकतर 40 साल से कम उम्र की महिलाएं हैं.

रिसर्च से जुड़ी एक विशेषज्ञ राखी दंडोना के मुताबिक जल्दी शादी होना,जल्दी मां बनना,घरेलू हिंसा,निम्न सामाजिक स्तर और आर्थिक स्वंत्रता न होना इसके अहम कारण हैं.उनके अनुसार भारतीय महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की खासी कमी है.भारत में मेंटल हेल्थ से जुड़े मुद्दे पर बातचीत होना भी इसका एक अहम कारण है.जल्दी शादी और मां बनने ही शायद वो कारण हैं की आत्महत्या करने वाली अधिकतर महिलाओं की उम्र 15 साल से 39 साल के बीच है.

ये आंकड़े बेहद दुखद हैं और जरूरी है की इसे रोकने के लिए कदम उठाए जाएं.अपने घर की महिलाओं का ध्यान रखा जाए.उन्हें परेशान देखकर उसे यूहीं न छोड़ा जाए बल्कि उनकी भी समस्या को जाना जाए और जल्दी शादी जैसे कदमों को रोका जाए.