हरियाणा के पानीपत से पुलिस और महिला समाज कल्याण विभाग ने एक ऐसी महिला को मुक्त कराया है जिसे उसके ही पति ने पिछले डेढ़ साल से घर एक शौचालय में बेहद ही अमानवीय तरीके से बंद कर रखा था।

सनोली थाने के इंचार्ज सुरेंदर दहिया ने कहा की महिला के पति नरेश कुमार के खिलाफ उचित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। पति पत्नी की शादी को 17 साल हो चुके है और उनके तीन बच्चे भी है। सबसे बड़े लडके की उम्र 16 वर्ष जबकि दो लड़कियां जिनकी उम्र 15 वर्ष और 11 वर्ष है।

जिला महिला कल्याण विभाग की अधिकारी रजनी गुप्ता का कहना है की उन्हें यह सूचना मिली थी की महिला को अमानवीय तरीके से कैद कर रखा जा रहा है जिसके बाद पुलिस के साथ उन्होंने मकान पर छापा मारा। शुरुआत में पति ने महिला के बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। सख्ती से पूछताछ करने के बाद उसने ऊपरी मंजिल के शौचालय के तरफ इशारा किया।

पुलिस बल द्वारा शौचालय का दरवाजा खोलने पर सभी पूरी तरह से दंग रह गए। महिला का शरीर कंकाल जैसा हो गया था। उसे खाना और पानी तक सही तरीके से नहीं दिया जा रहा था। पूछताछ करने पर पता चला की बीते डेढ़ साल से महिला शौचालय के अंदर ही बंद थी। महिला ने बाहर निकलते ही सबसे पहले खाने की मांग की।

रजनी गुप्ता ने बताया की उसके बाद महिला को जांच के लिए सिविल हॉस्पिटल ले जाया गया और वंहा से उन्हें एक रिश्तेदार के घर रखा गया है। महिला के पति ने पूछताछ में महिला को मानसिक रोगी होना बताया है, हालांकि महिला घर के सभी सदस्यों को पहचान रही थी और टीम के पूछे सभी सवालों का सही सही जवाब दे रही थी। पति ने बताया की करीब 10 साल पहले उसकी पत्नी के पिता और भाई की मृत्यु हो गयी थी उसके बाद से ही उसकी मानसिक हालत सही नहीं है। पर टीम के द्वारा पूछताछ करने पर वो किसी भी डॉक्टर द्वारा किये जा रहे मानसिक रोग इलाज का कोई सबूत पेश नहीं कर सका।

महिला सुरक्षा अधिकारी के अनुसार महिला के बच्चों का व्यवहार भी महिला के प्रति सही नहीं था, इस बात की जाँच की जाएगी की क्या बच्चे भी पिता के साथ इस अमानवीय कृत्य में शामिल थे। अगर जाँच में बच्चों का भी रोल पाया जाता है तो उनकी काउन्सलिंग कराई जाएगी।