नागरिकता कानून में किये गए बदलाव के बाद से देश के अलग अलग इलाको में विरोध प्रदर्शन की खबरे आ रही है। पूर्वोत्तर के राज्यों को अगर छोड़ दिया जाये जंहा पर मुख्यता विरोध स्थानीय पहचान और भाषा के मुद्दे पर हो रहा है तो बाकी राज्यों में ज्यादातर प्रदर्शन करने वाले लोग मुस्लिम धर्म के है। पूर्वोत्तर में भी पहले कुछ दिन हिंसक प्रदर्शन की खबरे आयी पर अब ज्यादातर इलाकों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है।

लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और उसका विरोध करने का अधिकार होता है। बशर्ते आप अपनी बात शांतिपूर्वक बिना किसी को नुकसान पहुचाये करें। बंगाल से लेकर अलीगढ और दिल्ली तक जंहा भी मुस्लिम समाज के लोग प्रदर्शन कर रहे है वंहा पर हिंसा जरूर हुई है। हर राज्य चाहे वो उत्तर प्रदेश हो या बंगाल हो या दिल्ली हो सभी जगह सार्वजानिक सम्पति को नुकसान पहुंचाया गया। ट्रेनों को जला दिया गया, रेलवे स्टेशन आग के हवाले कर दिए गए, सरकारी बसें और निजी वाहनों को तोड़फ़ोड़ा गया और इनमे आग लगा दी गयी।

ये किस तरह का विरोध प्रदर्शन है जो आपको गुंडागर्दी करने और आगजनी करने का अधिकार देता है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में कुछ बच्चों को ट्रेन पर पथराव करते देखा जा सकता है। शायद ये बच्चे नए बने कानून के बारें में जानते भी नहीं होंगे पर पहुंच गए टोपी लगाकर पत्थर फेंकने। आप अपने बच्चों ये सीखा रहे है, कल जब नौकरी नहीं मिलेगी तो सरकार पर बेरोजगारी का आरोप लगाएंगे।

हर जगह जंहा पर भी प्रदर्शन करते है वंहा पर आज़ादी के नारे लगाए जाते है। किस बात की आज़ादी चाहिए आपको और किससे आज़ादी चाहिए। आपका जब मन करता है जंहा मन करता है आप बीच सड़क पर ट्रैफिक रोक कर नमाज पढ़ते है। वन्दे मातरम कह देने से आपका धर्म संकट में आ जाता है। राष्ट्रगान के समय खड़े होने पर आपको समस्या है। और कितनी आज़ादी चाहिए।

आप पुलिस पर पेट्रोल बम फेंके, पत्थर बरसाए और यूनिवर्सिटी कैंपस में छिप जाए तो पुलिस क्या आप पर फूल बरसाएगी। यही विरोध अगर शांतिपूर्ण तरह से हो रहा होता और फिर पुलिस इस तरह से छात्रों को मारती तो पुलिस का विरोध हर नागरिक को करना चाहिए था। पर आप बसों में आग लगाए, शहर में दंगे जैसे माहौल पैदा करें उसके बाद भी पुलिस अगर कार्यवाही नहीं करती तो शायद पुलिस का कुछ काम ही नहीं बचता।

और अगर यूनिवर्सिटी में सभी छात्र इतने ही शांति प्रिय थे और बाहरी लोगों ने पत्थरबाजी और हिंसा की थी तो ऐसे लोगों को अपने बीच से निकाल कर पुलिस को सौप देना चाहिए था।

क्या वो कारण है जिस वजह से मुस्लिम नागरिक इसका विरोध कर रहे है। नागरिकता सरकार किसे दे य किसे न दे इससे आपकी नागरिकता पर तो कोई असर पड़ता नहीं है। आपके जो अधिकार पहले थे वैसे ही बाद में रहेंगे। कुछ विद्वान ये कह रहे है की एनआरसी और नागरिकता बिल को एक साथ मिला कर मुस्लिम की नागरिकता ले ली जाएगी। जिस देश में आप की आबादी 17-18 करोड़ हो वंहा आपको लगता है की कोई सरकार किसी बिल से आपकी नागरिकता ख़त्म करके आपको जेल में डाल देगी तो फिर आपको अपनी सोच सही करने की जरूरत है।

देश के मुस्लिम समुदाय को अब तथाकतिथ भय से बाहर निकल कर अपने विकास और शिक्षा के बारें में सोचना चाहिए। जिससे आपकी आने वाली पीढ़ियां पढ़ लिख कर तर्रक्की कर सकें। बाकी सोशल मीडिया पर किसी धर्म के बारें में उल्टा सीधा लिखने और गाली गलौज करने से न आपका भला होने वाला है न किसी दूसरे धर्म का होने वाला है। रही बात उग्र और हिंसात्मक प्रदर्शन की तो सरकार को आप इस तरह से झुका नहीं पाएंगे। सरकार के पास एक पूरी मशीनरी और सुरक्षाबलों की फ़ौज है जो उग्रता को मिनटों में ख़त्म कर देंगे।