बीते दिनों बॉलीवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर कांग्रेस में शामिल हो गईं.उन्हें मुंबई उत्तर सीट से कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है.उनसे पहले भोजपुरी स्टार दिनेश निरहुआ बीजेपी में शामिल हो गए थे.चर्चा है की पार्टी उन्हें आजमगढ़ में पूर्व सीएम अखिलेश यादव के खिलाफ मैदान में उतारेगी.एक तरफ जहां निरहुआ के आने से अखिलेश के लिए चुनाव कठिन हो जाएगा वहीं उर्मिला ने भी मुंबई में कांग्रेस का असमंजस थोड़ा कम कर दिया.दरअसल मुंबई नॉर्थ सीट से कोई भी कांग्रेस नेता चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं था.इस तरह राजनीति में इन कलाकारों की एंट्री ने कई बार राजनीतिक दलों का काम आसान कर दिया.इसी कड़ी आज हम आपको ले जाएंगे 2014 में जब पश्चिम बंगाल में अभिनेत्री मुनमुन सेन ने 9 बार के कम्युनिस्ट सांसद वासुदेव आचार्य को लोकसभा चुनाव में मात दे दी थी.

हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल की बांकुरा लोकसभा सीट की.कम्युनिस्टो की गढ़ रही इस सीट पर सांसद वासुदेव आचार्य ने कब्जा जमा रखा था.1980 में इस सीट पर पहली बार सीपीएम ने कब्जा किया.1984 में पीएम इंदिरा गांधी के निधन के बाद कांग्रेस के पक्ष में देश में गजब की लहर थी.उस लहर में भी वासुदेव आचार्य ने वो सीट अपने नाम की.इसके बाद 1989, 1991,1998, 19999 और 2004, 2009 में वासुदेव आचार्य ने इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा.2009 के चुनाव में वासुदेव आचार्य ने यहां करीब 1 लाख वोटों से जीत हासिल की थी.वासुदेव आचार्य की गिनती उन सांसदों में की जाती है जो अपने क्षेत्र के लोगों की आवाज बड़े उग्र तरीके से संसद में रखते थे.

ऐसे में कॉमरेडों के इस गढ़ को जीतने के लिए ममता बनर्जी ने एक कलाकार पर भरोसा जताया.75 साल के वासुदेव के खिलाफ 64 साल की मुनमुन मैदान में थीं.मुनमुन सेन की दोनों बेटियां रिया और राइमा जहां उनके लिए प्रचार कर रही थीं तो दूसरी ओर वासुदेव आचार्य बजाय बड़ी रैलियों के गांव गांव में घूमकर वोट मांग रहे थे.इस बीच मुनमुन का चुनाव प्रचार विवादों में भी घिरा जब एक गांव की 3 किलोमीटर लंबी सड़क को धोया गया.बांकुरा के उस गांव के लोग उस वक्त भयंकर पानी के संकट के शिकार थे.ऐसे समय में भी मुनमुन और बेटियों को धूल से बचाने के लिए ये फैसला किया गया.इस विवाद के बीच मुनमुन सेन ने वहां परिवर्तन का नारा दिया और बांकुरा के लोगों को ये पसंद भी आया.

2014 के चुनाव में मुनमुन सेन ने वासुदेव आचार्य को 97,511 वोटों से हराया था.मुनमुन सेन इस बार भी चुनाव के मैदान में हैं लेकिन सीट अलग है.इस बार वो केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के खिलाफ आसनसोल से मैदान में हैं.सुप्रियो एक मजबूत उम्मीदवार हैं.वो भी पहले कलाकार रहे हैं.आसनसोल में बाबुल के आने के बाद विकास भी हुआ है.ऐसे में मुनमुन के लिए इस बार मैदान आसान नहीं होने वाला है.

मनोज तिवारी,रवि किशन,क्रिकेटर गौतम गंभीर इस समय बीजेपी में हैं.हेमा मालिनी यूपी के मथुरा से सांसद हैं.पश्चिम बंगाल में ही ममता बनर्जी ने कई अभिनेत्रियों को मैदान में उतारा है.हर बार की तरह इस बार भी ये कलाकार कठिन चुनाव को आसान कर पाने में राजनीतिक दलों की मदद कर पाते हैं या नहीं ये देखने वाली बात होगी.