भारतीय जनता पार्टी आज अपना उन्तालीसवाँ स्थापना दिवस मना रही है. बीजेपी को शून्य से शिखर तक ले जाने में दो नेताओं की अहम भूमिका थी.अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी.अटल बिहारी वाजपेयी का बीते दिनों निधन हो चुका है जबकि आडवाणी इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रहे.बीजेपी के बीते 30 साल के इतिहास में ये पहला मौका है जब पार्टी का लौहपुरुष कहा जाने वाला शख्स चुनाव नहीं लड़ रहा.यूं तो आडवाणी 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही हाशिए पर चले गए थे लेकिन इस बार जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो ये साफ हो गया की आडवाणी की राजनीतिक पारी अब लगभग खत्म हो चुकी है.2014 का चुनाव आडवाणी का आखिरी चुनाव था.आज हम आपको लेकर चल रहे हैं 1989 में जब आडवाणी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े थे और जीते भी हासिल की थी.

देश में नौंवे आम चुनाव होने थे.बोफोर्स तोप घोटाले को लेकर राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार बुरी तरह घिरी थी.विश्ननाथ प्रताप सिंह के अभियान की वजह से कांग्रेस के खिलाफ एक लहर खड़ी हो गयी थी.दूसरी तरफ मंडल और कमंडल की राजनीति भी जोर पकड़ रही थी.ऐसे में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने देश की राजधानी दिल्ली की नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया.1984 में बीजेपी महज 2 सीटों पर सिमट चुकी थी.ऐसे में इन चुनाव बेहतर करने का मौका उनके पास था.

लालकृष्ण आडवाणी के सामने इस चुनाव में चुनौती कम नहीं थी.उनके सामने पूर्व राष्ट्रपति वाई वी गिरी के परिवार की सदस्य मोहिनी गिरी थीं.आडवाणी जहां बीजेपी जैसी नई पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे वहीं मोहिनी गिरी कांग्रेस से मैदान में थीं.चुनाव लड़ने के लिए महंगे संसाधनों को जुटाना बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती थी.कुछ वक्त पहले बीजेपी नेता एन गोविंचार्य ने की इस समस्या के बारे में एक किस्सा शेयर किया.

गोविंदाचार्य बताते हैं की चुनाव के वक्त मोहिनी गिरी के पोस्टर और होर्डिंग खूब लगे थे.वोटिंग में महज 10-12 दिन बचे थे और बीजेपी के पोस्टर,बैनर कहीं भी नजर नहीं आ रहे थे.ऐसे में बीजेपी का चुनाव प्रचार कमजोर नजर आ रहा था.जब गोविंदाचार्य ने इस बारे में आडवाणी से पूछा तो उन्होंने पैसों की कमी होने का हवाला दिया.आडवाणी ने कहा की जो पैसे आए हैं उन्हें पूरे भारत में बांटा जाना है.भला उसे वो अपने प्रचार के लिए कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं.गोविंदाचार्य ने ऐसे में अरूण जेटली से बात की और उन्हें समस्या के बारे में बताया.अरुण जेटली ने एक रात के वक्त में पैसों का इंतजाम किया और अगले दिन से आडवाणी के लिए चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ा.

आडवाणी ने इस चुनाव में मोहिनी गिरी को शिकस्त दी.आडवाणी को जहां 129256 वोट मिले वहीं तमाम समर्थन और प्रचार के बावजूद मोहिनी गिरी को 97415 वोट हासिल हुए.इस चुनाव में दिल्ली में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा.दिल्ली में बीजेपी ने 4 सीटें जीतीं.दो सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की वहीं एक सीट जनता दल के खाते में गई.