लोकसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े हमारे देश के लिए एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जो सरकार और जनता दोनों को परेशान करने वाली है.दरअसल अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाली संस्था सेंटर फॉर मोनेटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की रिपोर्ट में सामने आया है की भारत में 2018 में करीब 11 मिलियन यानि 1 करोड़ 10 लाख लोगों को बेरोजगार होना पड़ा है.रिपोर्ट में जो सबसे चिंताजनक बात सामने आई है वो ये है की इन नौकरियों को गंवाने वाले लोगों में अधिकांश महिलाएं,दिहाड़ी मजदूर और छोटे व्यापारी शामिल हैं.इस तरह संगठित क्षेत्र के बजाय असंगठित क्षेत्र के लोगों ने ज्यादा नौकरियां गंवाई हैं..रिपोर्ट के अनुसार बेरोजगारी दर 2018 में 7.4 फीसदी रही जो बीते 15 महीनों में सबसे ज्यादा है.

भारत में खेती रोजगार का बड़ा जरिया है और नौकरियां गंवाने वाले में ज्यादातर लोग इसी से जुड़े हैं. रिपोर्ट का कहना है कि साल 2018 में करीब 91 लाख नौकरियां ग्रामीण इलाके में गई. ग्रामीण इलाके में ज्यादातर लोग कृषि और असंगठित क्षेत्र से जुड़े होते है. लिहाजा इसका सीधा आंकलन लगा पाना काफी मुश्किल है. वहीं रिपोर्ट कहती है कि बीते साल शहरी क्षेत्र में भी करीब 18 लाख लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा.

CMIE की रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 के दिसंबर तक मिलने वाले कुल रोजगारों की संख्या 3 करोड़ 97 लाख रही. जो पिछले साल 2017 के मुकाबले 10.9 मिलियन कम है. रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2017 में 4 करोड़ 79 लाख लोगों को रोजगार मिला था. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बेरोजगारी की समस्या बढ़ी है. इसमें ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र के कामगार प्रभावित हुए है.

रिपोर्ट के मुताबिक नौकरियां जाने का महिलाओं पर भी खासा असर पड़ा है.इस दौरान कुल 88 लाख महिलाओं को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है.ग्रामीण क्षेत्रों में जहां 65 लाख महिलाओं की नौकरी चली गई वहीं शहरी क्षेत्र की भी 23 लाख महिलाओं को रोजगार से दूर होना पड़ा है.रिपोर्ट के मुताबिक तनख्वाह पाने वाले करीब करीब 37 लाख लोगों की नौकरी 2018 में चली गई.

बेरोजगारी के मुद्दे पर मोदी सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर रही है ऐसे में CMIE की ये रिपोर्ट सरकार को घेरने के लिए विपक्ष का एक बड़ा हथियार बन सकती है.