दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद जंहा एक तरफ अरविन्द केजरीवाल को बधाई देने वालों का ताँता लगा हुआ है तो दूसरी तरफ लगातार दूसरी बार चुनाव में अपना खाता न खोल पाने वाली कांग्रेस में आपसी मतभेद सामने आने लगे है। कांग्रेस इस बार के चुनाव में न सिर्फ अपना खाता नहीं खोल पायी बल्कि पिछले चुनाव के अपेक्षा वोट प्रतिशत में भी धराशायी हो गयी।

70 सीट पर होने वाले इस चुनाव में 67 सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में असफल रहे। जंहा आम आदमी पार्टी को कुल मतदान का 53% वोट हासिल हुआ वंही बीजेपी ने भी पिछले चुनाव के मुकाबले लगभग 5 % की बढ़ोत्तरी करते हुए लगभग 38% वोट हासिल किये। वंही लगातार 15 साल दिल्ली में राज करने वाली कांग्रेस 4.26% वोट ही हासिल कर सकी।

चुनाव नतीजे आने के बाद कांग्रेस के लिए शर्मसार करने वाली स्तिथि तब और भी बन गयी जब कांग्रेस की सीनियर लीडरशिप पार्टी की बुरी तरह हुई हार पर चिंतन करने की बजाय बीजेपी की हुई हार से ज्यादा खुश नजर आये। ट्विटर पर पी चिदंबरम और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी और दिल्ली कांग्रेस की सीनियर लीडर शर्मिष्ठा मुखर्जी के बीच मतभेद खुल कर सामने आ गए। पी चिदंबरम ने 'आप' की जीत और बीजेपी की हार पर ख़ुशी जाहिर की। इसके जवाब में शर्मिष्ठा ने लिखा की क्या अब कांग्रेस पार्टी को जीत की ख़ुशी मनाने की लिए राज्य स्तरीय पार्टियों को आउटसोर्स करना पड़ेगा। और अगर ऐसे है तो कांग्रेस को दिल्ली में अपनी दुकान बंद कर देनी चाहिए।

कांग्रेस की चुनाव प्रचार के तौर तरीके और दिल्ली कांग्रेस की सीनियर लीडरशिप के बातचीत की तरीके से ऐसा लग रहा है जैसे कांग्रेस से पहले ही ये मान लिया था की उसका खाता खुलने वाला नहीं है। चुनाव की दौरान कभी भी कांग्रेस का प्रचार अभियान न तो मीडिया में ही आया और न ही सोशल मीडिया पर कंही दिखाई दिया। ऐसा लग रहा था की कांग्रेस ने सिर्फ इलेक्शन में प्रत्याशी सिर्फ खड़े करने के लिए खड़े कर दिए थे। मीडिया में ये भी चर्चा है की प्रशांत किशोर की कहने पर राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने कांग्रेस की प्रचार अभियान बिलकुल ही निम्न स्तर का रखा जिससे की मुस्लिम वोट कांग्रेस और 'आप' में न बट कर 'आप' को ट्रांसफर हो जाये।

अगर वाकई ऐसा है तो राहुल गाँधी ने दिल्ली में कांग्रेस को अगले 20-25 साल के लिए ख़त्म कर दिया है। कांग्रेस के दिल्ली प्रभारी पी सी चाको का मानना है की 2013 से ही शीला दीक्षित की समय ही कांग्रेस का पतन शुरू हो चुका था और मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का सारा वोट बैंक हड़प लिया है जिससे अब कांग्रेस का दिल्ली में जीतना नामुमकिन है।

उत्तर प्रदेश में भी कुछ इसी तरह अपना वोट बैंक गँवा चुकी कांग्रेस दो दशक से भी ज्यादा समय से सत्ता से दूर है और आने वाले समय में पतन की तरफ ही अग्रसर है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य से सत्ता से बहार होने और अब दिल्ली जैसे राज्यों से भी वोट प्रतिशत गँवा चुकी कांग्रेस की केंद्र की सत्ता में वापसी की डगर आसान नहीं मालूम पड़ती। बीजेपी को हराने के लिए किये गए हवन में कांग्रेस ने खुद की आहुति देकर स्वाहा कर लिया है।