बीते कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल में कट मनी का मुद्दा छाया हुआ है. कट मनी को कमीशन या घूस भी कह सकते हैं जो सरकारी काम कराने के बदले लिया जाता है. कट मनी लेने के आरोप सत्ताधारी टीएमसी के नेताओं पर हैं. सीएम ममता बनर्जी ने कुछ दिनों पहले टीएमसी नेताओं को सख्त संदेश दिया था कि या तो कट मनी लेना बंद करें या पार्टी से बाहर जाएं. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव नतीजों और 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव ने ममता बनर्जी को ये कदम उठाने को मजबूर किया है.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने पश्चिम बंगाल के हुगली ,बर्धमान और बीरभूम में 13 गांवों का दौरा किया. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक उज्जवला से लेकर मनरेगा तक के लिए मिलने वाली सरकारी रकम में टीएमसी नेताओं ने भ्रष्टाचार किया है. अलग अलग सरकारी योजनाओं में कमीशन या घूसखोरी के अलग अलग दाम तय हैं. रिपोर्ट के अनुसार फ्री एलपीजी गैस कनेक्शन देने वाली स्कीम उज्जवला योजना में हर एक लाभार्थी से 500-600 रूपये लिए जाते हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर एक लाभार्थी को 1 लाख 20 हजार से 1 लाख 35 हजार तक की राशि मिलती है. इस योजना के लिए 10 हजार से लेकर 25 हजार तक की कट मनी तय है. इसी तरह स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनाने के लिए लाभार्थी को 12 हजार रूपये मिलते हैं. इसके लिए 900 से 2 हजार रूपये तक की कट मनी तय है.

यूपीए सरकार की योजना मनरेगा भी टीएमसी के भ्रष्टाचार से अछूती नहीं है. यहां भी हर दिन मजदूरी के मिलने वाले 190 रूपये में से 20-40 रूपये कट मनी के तौर पर काट लिए जाते हैं. इस मामले में एक और अहम बात सामने आई. माना जाता है कि डायरेक्ट बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की वजह से मजदूरों को लाभ मिल जाएगा और सरकारी धन की बर्बादी रूकेगी लेकिन यहां सारे मजदूरों का पैसा एक सुपरवाइजर लेने जाता है. ये सुपरवाइजर मजदूरों की हर दिन की मजदूरी से काटकर ही पैसे देता है.

टीएमसी नेताओं ने जनता को इस तरह समझाया था कि जैसे जो पैसा जनता से लिया जा रहा है वो योजना का लाभ लेने के लिए उन्हें देना ही होगा. जनता के भोलेपन का लाभ टीएमसी नेताओं ने खूब उठाया. अब जब इन नेताओं की पोल खुली है तो जनता नाराज हो रही है. वो अपना वापस मांग रही है. बीते कुछ दिनों में बंगाल में अगर हिंसा की खबरों पर नजर डालें तो वो कट मनी से भी जुड़़ी हुई होती हैं. जनता नाराज होकर नेताओं के घरों पर हल्ला बोल रही है. कहीं घर पर पथराव हो रहा है तो कहीं मारपीट हो रही है.

ममता बनर्जी सरकार ने बंगाल में केंद्र की योजनाओं के नाम बदल दिए हैं. योजनाओं के नाम बंगाल सरकार ने अपने हिसाब से दिए हैं. खैर नाम का मसला दो सरकारों और पार्टियों के बीच का मामला है लेकिन जनता के साथ भ्रष्टाचार करना बिल्कुल ही गलत है. ममता बनर्जी आज ये बात भले ही सख्ती की बात कर रहीं हों लेकिन इतने दिनों तक सत्ता में रहने के बाद अब उनकी नींद खुली है. बड़ी बात नहीं कि कट मनी का ये पैसा टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व तक जा रहा हो.