चलिए शुरू से शुरू करते हैं. TIME ने अपने नवीनतम अंक में मोदी को फीचर करते हुए दो आर्टिकल लिखा है, पहला- India's Divider In chief और दूसरा Modi the reformer. हम दोनों पर बात करेंगे लेकिन सबसे पहले जिस पर सबसे ज्यादा विवाद है मतलब India's Divider in chief की बात.

आतिश तासीर बड़े लेखक हैं. लेकिन यहां उन्होंने हेडिंग लिखते समय कॉपी-पेस्ट का सहारा लिया है. और मजे की बात है कि वो भी ठीक से नहीं किया है. अगर आप अमेरिकी मीडिया फॉलो करते हों तो आपने अक्सर CNN को डोनाल्ड ट्रम्प के लिए ये टर्म यूज करते हुए देखा होगा. न्यूयॉर्क टाइम्स भी ट्रम्प को इस उपाधि से नवाज चुका है. लेकिन TIME ने इसे कॉपी-पेस्ट करने के चक्कर में गलती कर दी. दरअसल अमेरिका का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं का Commander In Chief होता है, इसलिए CNN वगैरह ट्रम्प को कमांडर इन चीफ की जगह डिवाइडर इन चीफ लिखते थे. भारत में ऐसा नहीं है, यहां मोदी कमांडर इन चीफ नहीं हैं बल्कि रामनाथ कोविंद तीनों सेनाओं के कमांडर इन चीफ हैं. खैर...

आर्टिकल में तासीर लिखते हैं कि मोदी ने 2014 में अपना पूरा कैंपेन (populist) लोक-लुभावन के इर्द-गिर्द रखा था. वेल, इसमें कुछ नया नहीं है और इसके लिए सिर्फ मोदी जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि सभी पार्टियां इस लोक-लुभावनवाद को बढ़ावा देती हैं.

आतिश तासीर ने इसके बाद जो लिखा है उसे पढ़कर लगता है कि उन्हें सिर्फ मोदी से समस्या नहीं है बल्कि बतौर एक मुल्क भारत से भी उतनी ही समस्या है. तासीर लिखते हैं कि मोदी का 2014 में जीत कर आना ये दर्शाता है कि इस देश की सोसाइटी में पहले से ही एन्टी मुस्लिम सेंटिमेंट्स थे, धार्मिक राष्ट्रवाद था. तासीर यहीं नहीं रुकते वो लिखते हैं कि भारत को लेकर जो इलीट धारणा थी वो बिल्कुल गलत थी. असल में यहां के लोगों में मुसलमानों के प्रति नफरत और धार्मिक उन्माद पहले से ही था.

देखिये इसमें दो बातें हैं, पहली कि किसी नेता के चुन कर आने से किसी देश की संस्कृति के बारे में राय नहीं बनती. तासीर से कोई पूछे कि ट्रम्प के चुन कर आने मात्र से पूरे अमेरिका को एन्टी मुस्लिम और कम्युनल देश घोषित करना कहां तक सही रहेगा?

दूसरी बात कि शायद तासीर भारत की संस्कृति को समझते नहीं. ये देश सत्तर सालों से निर्बाध विकास कर रहा है तो उसके पीछे इसकी एकजुटता और एक दूसरे के प्रति प्रेम और सौहार्द ही है. हजारों मोदी आएंगे-जाएंगे लेकिन इस देश के मूल, इस देश की आत्मा के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकेंगे. कुछेक लोगों की राय को पूरे देश की राय बता देना कहीं से भी जस्टिफाइड नहीं है. और ये भी कहना जस्टिफाइड नहीं है कि मोदी सिर्फ एन्टी मुस्लिम सेंटिमेंट्स की वजह से चुनकर आये हैं...

इसके बाद आतिश तासीर मोदी सरकार पर अपनी विचारधारा के लोगों को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते हैं. जिसमें वो एस. गुरुमूर्ति पर विशेष फोकस करते हैं. अब देखिए कोई भी सरकार उसी को कार्यभार सौंपती है, जो उसे अपने काम का बंदा लगता है. इसमें कोई हाय-तौबा मचाने वाली बात नहीं है. एस. गुरुमूर्ति ने नीति आयोग का कांसेप्ट दिया, एस. गुरुमूर्ति मुद्रा योजना लेकर आये इसलिए सरकार ने उन्हें प्रमोशन देकर आरबीआई का बोर्ड मेम्बर बना दिया. अब पता नहीं आतिश तासीर को इससे क्या प्रॉब्लम है.

आतिश तासीर आगे बढ़ते हैं और योगी आदित्यनाथ और प्रज्ञा सिंह ठाकुर का उदाहरण देते हैं और ये सिद्ध करने की कोशिश करते हैं कि मोदी इन लोगों को आगे बढ़ाकर समाज में दरार डाल रहे हैं. और योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते हुए तासीर उन्हें Hate Mongering priest बताते हैं. वेल, ये अपने आप में काफी ऑब्जेक्सनेबल है. किसी राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री को जिसपर कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ है, आतिश तासीर जज बनकर तुरंत फैसला सुना देते हैं और उन्हें एक तमगे से नवाज देते हैं. ठीक उसी तरह वो प्रज्ञा सिंह ठाकुर के लिए भी कड़े शब्द यूज करते हैं जो कि एक बड़े और मंझे हुए लेखक की बायसनेस दिखाता है.

(अगली पोस्ट में इस चीज का विश्लेषण करेंगे कि आर्टिकल को लेकर उछलनेवाली कांग्रेस के लिए आतिश तासीर ने क्या लिखा है, भारत में पश्चिमी सभ्यता के बढ़ते दखल पर क्या कहते हैं और मोदी द रिफॉर्मर लिखकर क्या TIME ने बैलेंस बनाने की कोशिश की है?)

(विश्लेषण जारी रहेगा)

(ये लेख विवेक सिंह के फेसबुक पेज से लिया गया है, विवेक ZEE Media Corporation में पत्रकार है।)