पिछले लेख में हमने उन प्रमुख मुद्दों से आपको रूबरू करवाया जो 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रमुख थे.इन मुद्दों ने कांग्रेस के लिए चुनाव मुश्किल कर दिया था और आखिर में उसे हार का सामना भी करना पड़ा था.आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन मुद्दों के बारे में जो इस चुनाव में बीजेपी के लिए अहम चुनौती साबित होंगे और विपक्ष के लिए बड़े हथियार साबित हो सकते हैं.किसानों की समस्या,रोजगार की समस्या वो मुद्दे हैं जो पिछले समय में लगातार मोदी सरकार के लिए मुश्किल साबित हुए हैं और अगर विपक्ष इन मुद्दों पर अपना चुनाव प्रचार केंद्रित रखता है तो बीजेपी को चुनाव में बड़ी चुनौती दे सकता है.इन मुद्दों के अलावा भी हालांकि राम मंदिर और अनुच्छेद 370 हटाने जैसे मुद्दे भी हैं लेकिन विपक्ष के वोट बैंक को देखते वो इन मुद्दों से बचना चाहेगा.तो आइए एक नजर डालते हैं उन मुद्दों पर विस्तार से जो बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे-

1.रोजगार- बीते लोकसभा चुनाव के वक्त पीएम मोदी ने सरकार बनने पर हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया था.उनका ये वादा चुनावी साल तक पूरा होता नहीं नजर आया.कई आंकड़े आए जिनमें कहा गया की नोटबंदी की वजह से रोजगार में कमी आई है.सरकारी नौकरियों में भी परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी से परीक्षाएं कराना मुश्किल हुआ ऐसे में युवाओं के सामने रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हुआ.बीते दिनों राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की एक रिपोर्ट सामने आई जिसमें दावा किया गया की रोजगार की हालत बीते 45 साल में भारत में सबसे खराब है.हालांकि नीति आयोग ने इन आंकड़ो का बाद में खंडन भी किया.राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के प्रमुख ने भी ये कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था की सरकार आंकड़ों को गंभीरता से नहीं ले रही और रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़ों को जारी नहीं कर रही है.उनके इस्तीफे के बाद रोजगार के मुद्दे पर सरकार घिरी गई.राहुल गांधी समेत पूरा विपक्ष इस मुद्दे को उठाता रहा है और देखना होगा की देश की जनता को रोजगार के मुद्दे पर बीजेपी किस तरह से साध पाती है.

2.किसानों की समस्या- मोदी सरकार अपने शासनकाल में जिन मुद्दों पर सबसे ज्यादा घिरी रही उनमें किसानों की समस्याएं अहम हैं.उनके शासनकाल में कई बार किसान दिल्ली तक आंदोलन करते हुए आए.किसानों की समस्या देश में उनकी फसलों का सही मूल्य न मिलना है जिसकी वजह से किसानों की आय पर फर्क पड़ता है.इसके साथ ही किसान कर्ज के बोझ के तले भी दब जाते है.महाराष्ट्र के नासिक में एक किसान को 750 किलो प्याज के मिले महज 1064 रुपए मिले.नाराज किसान ने ये कमाई पीएम राहत कोष में भेज दी.चुनावी साल में अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने किसानों के लिए साल में 6000 रुपए की मदद देने का एलान किया.ये धनराशि 3 किश्तों में किसानों तक पहुंचेगी.चुनावी साल में सरकार के इस एलान ने बेशक किसानों की नाराजगी थोड़ी कम की होगी लेकिन बगैर स्थायी समाधान के ये विपक्ष के लिए अहम मुद्दा साबित हो सकता है.

3.राममंदिर और अनुच्छेद 370- ये वो मुद्दे हैं जो बीजेपी ने पिछले चुनाव के वक्त खूब उठाए थे.राममंदिर तो हमेशा ही बीजेपी के एंजेंडे में रहा है.मगर इन दोनों ही मुद्दों पर पिछले 5 साल में कोई खास प्रगति नहीं हुई.विपक्ष का वोट बैंक हालांकि उसे इन मुद्दों को उठाने की इजाजत नहीं देता लेकिन सावधानी के साथ उठाने और हिंदू वोट वर्ग को धोखे में रखने के आरोप पर कांग्रेस को थोड़ा सा फायदा भी हो सकता है.जिस तरह से एमपी और गुजरात में कांग्रेस ने साफ्ट हिंदुत्व का कार्ड खेलने की कोशिश की और फायदा भी उठाय़ा उससे बीजेपी को हल्की मुश्किल हो सकती है.

इन मुद्दों के अलावा कांग्रेस राफेल विमान सौदा का मुद्दा उठाती रही है.इस मामले में सबसे अहम बात ये है की अभी तक ये घोटाला साबित नहीं हो पाया है.सुप्रीम कोर्ट एक बार सरकार को क्लीन चिट भी दे चुका है.पीएम मोदी की छवि भी अब तक भ्रष्टाचार के मामले में साफ सुथरी रही है ऐसे में चौकीदार चोर है का नारा जनता को कितना शूट करता है ये देखने वाली बात होगी.