गणेश उत्सव का त्यौहार पूरे देश में हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। 11 दिनों तक मंदिरो, घरों और चौक चौराहो पर खूब धूम रहती है। धार्मिक उत्सव का माहौल तो रहता ही है साथ में तमाम लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी पैदा होते है।

वैसे 11 दिनों तक गणेश उत्सव और उसके बाद गणेश मूर्ति का विसर्जन ये पूरा पर्व महाराष्ट्र में ज्यादा मनाया जाता था और बाकि देश में गणेश चतुर्थी की धूम ज्यादा रहती थी। अब धीरे धीरे ये पर्व लगभग पूरे भारत में मनाया जाने लगा है। यंहा तक की छोटे छोटे कस्बों में भी गणेश जी की धूम रहती है।

गणेश उत्सव के पूरा होने पर जब मूर्ति विसर्जन का समय आता है उसके दो बड़े ही दुखद पहलु है। एक पहलु पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। कई बार प्लास्टर ऑफ़ पेरिस से बनी हुई मूर्तियां उपयोग में लायी जाती है और ये निकट के नदी या तालाब में विसर्जित कर दी जाती है। हालांकि सरकार की तरफ से प्लास्टर ऑफ़ पेरिस की मूर्तियों पर रोक है पर वो जमीनी स्तर पर कितना कारगर है ये अलग ही बात है। प्रदुषण वाले पहलु पर अगर आम जनता सिर्फ मिट्टी से बनी मूर्तियां ख़रीदे तो काफी नुकसान से बचा जा सकता है।

दूसरा बड़ा मुद्दा है मूर्ति विसर्जन करते समय होने वाली दुर्घटनाओं में मौतें। इस साल देश भर से अब तक 40 लोगों के डूब के मरने की खबरें आ चुकी है। भोपाल में अकेले एक ही दुर्घटना में 11 लोग डूब कर मारे गए। इन दुर्घटनाओं को प्रसाशन और आम जनता दोनों की थोड़ी सी जागरूगता से रोका जा सकता है।

बड़ी बड़ी मूर्तियों को छोटी सी नाव पर रख कर गहरे पानी में जाना, नाव में क्षमता से ज्यादा लोग होना, बिना किसी जीवन रक्षक जैकेट के और साथ में तैरने का शून्य ज्ञान। अगर आप इन बातों पर बिना गौर किये बस उन्माद में गहरे पानी में जा रहे है तो फिर आप मूर्तियों के साथ खुद को ही विसर्जित करने जा रहे है । कम से कम अपने जीवन की चिंता तो कर ही सकते है।

प्रशासन को चाहिए जब इस तरह के हादसे हर साल होते है तो बाद में लाखों रूपये मुआवजे के नाम पर बांटने के बजाय उन्ही रुपयों का उपयोग करके कुछ ऐसे व्यवस्था करे की इन हादसों पर रोक लगे। गहरे पानी में जाने पर रोक लगायी जाये, बड़ी मूर्ति के बजाय प्रतीकात्मक रूप में छोटी मूर्ति का विसर्जन करें। और तमाम तरह के उपाय सरकार कर सकती है क्यों की उसके पास मशीनरी है।

भोपाल में हुए हादसे में डूब कर मरने वाले लोगों में 15 वर्षीय परवेज खान भी है। जिस दौर में दिन प्रतिदिन धार्मिक कटटरता बढ़ रही है उसी समय में एक मुस्लिम लड़का गणेश मूर्ति विसर्जन में डूब का मारा जाता है। परवेज के बारे में लिखा जा रहा है की वो हिन्दू धार्मिक उत्सवों में धूम धाम से भाग लेता था।

जरा सोचिये जिस परिवार का कोई व्यक्ति मूर्ति विसर्जन में डूब के मारा गया होगा वो अगली बरस बाप्पा फिर जल्दी आना इसको कैसे लेगा।