बीते कुछ दिनों में पंजाब में कर्ज की वजह से जान देने वाले किसानों की संख्या काफी बढ़ी है. कई किसान समूह, राज्य विश्वविद्यालय और राज्य सरकार का खुद का डाटा बताता है कि 97 फीसदी किसान पंजाब के मालवा क्षेत्र में आत्महत्या करते हैं. मालवा में पंजाब के 22 में 14 जिले शामिल हैं. पंजाब यूनिवर्सिटी, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और लुधियाना और गुरुनानद देव यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट बताती है कि 1990 के बाद से पंजाब में किसानों की आत्महत्या के मामले बढ़े हैं.

मालवा में छोटे और औसत आय वाले किसान ज्यादा हैं. इन किसानों के पास 1 से 5 एकड़ तक जमीन है. संगरूर (22.63 प्रतिशत), मानसा( 21.30 प्रतिशत), भठिंडा( 17 प्रतिशत). बरनाला(11.95 प्रतिशत), मोगा(9.89प्रतिशत) और लुधियाना(5.46 फीसदी) ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें किसान आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं. पटियाला(2.36 प्रतिशत), मुक्तशर साहिब(4.47 प्रतिशत) भी प्रभावित हैं.

पंजाब सरकार के मुताबिक राज्य में सन 2000 के बाद 3,330 किसान कर्ज की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं. जिनमें से 698 ने पिछले 4 साल में अपनी जान दी है. खास बात ये है कि इनमें से अधिकतर मालवा क्षेत्र से हैं. 2016 के आंकड़ों के मुताबिक 97 किसानों ने अपनी जान कर्ज की वजह से दी है. हालांकि विश्वविद्यालयों के आंकड़ें सरकार से अलग हैं. ये बताते हैं कि 2000 से 2015 के बीच कुल 16 हजार से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की. इनमें से 9 हजार किसान जबकि बाकि 7 हजार से ज्यादा मजदूर थे.

मालवा में क्यों सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं किसान ?

1.मालवा में एक एकड़ जमीन की लीज की कीमत 50 हजार से 65 हजार के बीच है जबकि दोआब और माझा में यही 30 हजार से 65 हजार के बीच है. एक किसान एक एकड़ जमीन से एक फसल में 32 हजार से 36 हजार तक पैदा कर पाता है. अगर कोई किसान दो फसलें कर पाता है 64 हजार से 72 हजार रुपये एक एकड़ में कमा पाता है. इस तरह किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा जमीन का किराया देने में ही चला जाता है. लगभग 73 से 95 फीसदी तक की कमाई किसान जमीन के किराए में दे देते हैं. ऐसे में किसान कम आय के संकट से जूझ रहे हैं.

2.पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर किशोर सिंह के मुताबिक मालवा में किसानों के पास खेती के अलावा आय के दूसरे साधन नहीं हैं. ऐसे में अगर फसल खराब होती है तो किसानों के ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है और इसे कम करने का कोई साधन किसानों के पास नहीं होता.

2. मालवा क्षेत्र में कैंसर की समस्या बहुत ही विकराल है. यहां से एक कैंसर ट्रेन चलती है जो कैंसर के मरीजों को लेकर राजस्थान जाती है. ऐसे हालात में किसान अपनी आय का बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में गंवा देते हैं.

कैसे लगाई जा सकती है रोक-

यूनिवर्सिटी का अध्ययन मालवा में किसानों आत्महत्या पर रोक लगाने का सुझाव भी देता है. इसके मुताबिक जमीन को लीज पर देने की व्यवस्था ठीक करने की जरूरत है. कम से एक बार सभी किसानों की कर्ज माफी की जरूरत भी है. आत्महत्या करने वाले किसान के परिवार को 10 लाख का मुआवजा दिया जाए. किसानों और फसलों का इंश्योरेंस किया जाए. डेयरी सेक्टर का विकास किया जाए. किसानों और मजदूरों को वृद्धावस्था पेंशन दी जाए. इनके परिवार के किसी एक सदस्य को कम से कम अच्छी आय वाला रोजगार मिले और साहूकारों और कर्ज देने वाली निजी संस्थाओं पर भी रोक लगाई जाए.