सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या के बाद देश भर में आत्महत्या को लेकर एक बहस छिड़ गई. डिप्रेशन पर तमाम बातें हुईं. इन सबके बीच टीवी इंड्रस्ट्री से जुड़े कई और लोगों ने भी आत्महत्या की. सुशांत राजपूत की कथित आत्महत्या पर चर्चा हुई, लोगों ने भी चिंता जताई, पर सवाल उठता है कि हमारे आस-पास के लोग भी तो आखिर आत्महत्याएं करते हैं. हम उस वक्त इतनी गंभीरता से बात क्यों नहीं करते. मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वो जब कोई हरकत करता है, तो उसका पूरे समाज पर असर पड़ता है. ऐसे में कहीं, हमारे पास कोई घटना-दुर्घटना होती है, तो वो किसी न किसी तौर पर हमें प्रभावित करती है.

मीडिया संस्थान DW ने भारत में आत्महत्या पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. रिपोर्ट के मुताबिक में 2019 में 1.39 लाख से भी ज्यादा लोगों ने आत्महत्या की. ये संख्या 2018 के मुकाबले 3.4 फीसदी ज्यादा है. मरने वाले लोगों में 97,613 पुरुष थे, जबकि 41,493 महिलाएं थीं. इन महिलाओं में 21,359 गृहणी थीं, 4,772 छात्र थीं और 3,467 महिलाएं दिहाड़ी पर काम करने जाती थीं. रिपोर्ट के मुताबिक दहेज और शादी की वजह से पैदा हुई समस्याओं की वजह से, भारत में सबसे ज़्यादा महिलाओं आत्महत्या करती हैं. हालांकि, नपुंसकता और बच्चे पैदा करने में सक्षम न होना भी महिलाओं के आत्महत्या का एक कारण है.

रिपोर्ट के मुताबिक पारिवारिक कलह की वजह से भारत में सबसे ज्यादा लोग (32.4 फीसदी) आत्महत्या करते हैं. आत्महत्या के दूसरे कारणों में बीमारी दूसरे नंबर पर (17.1 फीसदी) है. इसके अलावा ड्रग्स की लत (5.6 फीसदी), शादी से जुड़ी समस्याएं (5.5 फीसदी) , प्रेम प्रसंग में असफल होना (4.5 फीसदी) 4.2 फीसदी मामलों के पीछे आर्थिक तंगी को आत्महत्या की वजह माना गया है.

भारत में इस समय बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है और 2851 के आत्महत्या करने के पीछे बेरोजगारी को वजह माना गया है. खास बात ये है कि आत्महत्या करने वाले लोगों में से 14,019 बेरोजगार थे. DW के मुताबिक आत्महत्या करने वाले लोगों में 42,480 किसान और दिहाड़ी पर काम करने वाले लोग थे. इनमें से 10,281 किसान थे.

पूरी रिपोर्ट का एक बड़ा प्वाइंट ये है कि आत्महत्या करने वाले 1.39 लाख लोगों में से 67 फीसदी संख्या युवाओं की है. 2018 के मुकाबले 2019 में 4 फीसदी ज्यादा युवाओं ने आत्महत्या की. आम तौर पर यूपी और बिहार को बीमारू राज्य के तौर पर देखा जाता है लेकिन यहां हालात उल्टे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा लोगों ने 2019 में आत्महत्या की. रिपोर्ट के मुताबिक, आत्महत्या करने वालों के कुल मामलों में 50 फीसदी मामले अकेले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के हैं. दक्षिण भारत को भी आम तौर पर प्रगितिशील माना जाता है लेकिन दक्षिण भारत के 4 राज्यों केरल, कर्नाटक, तेलांगना और तमिलनाडु में आत्महत्या की दर सबसे ज्यादा है. बिहार में आत्महत्या की दर सबसे कम है लेकिन चिंता की बात ये है कि 2018 के मुकाबले यहां 44.7% फीसदी बढ़ गए