मध्य प्रदेश में राजनीतिक उठापटक जारी है। राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री को सदन में बहुमत साबित करने को लेकर पत्र लिखे जाने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बहुमत साबित करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा की उनकी सरकार बहुमत है और अगर बीजेपी को शक है तो अविश्वास प्रस्ताव लेकर आये।

वंही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा की वो सभी पक्षों को सुनना चाहते है। कांग्रेस ने चतुरता दिखाते हुए एक दिन और जैसे चुरा लिया हो। कांग्रेस की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कोई भी पेश नहीं हुआ जिस वजह से कोर्ट ने राज्य सरकार, स्पीकर को नोटिस जारी कर कल तक का समय दिया है। कल मामले पर दोबारा सुनवाई होगी।

इससे पहले हुए घटना क्रम में कांग्रेस के २२ विधायकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मिलकर सरकार के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था। उसके बाद से कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ गयी है। हालांकि कांग्रेस का अभी भी यही दावा है की सरकार बहुमत में है। ज्योतिरादित्य ने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी और अब राज्यसभा के उम्मीदवार है।

पिछले कई बार इसी तरह के कई घटनाक्रम में स्पीकर का रोल गवर्नर से ज्यादा महत्तपूर्ण हो गया है। कई बार ऐसा देखा गया है की स्पीकर गवर्नर को नजरअंदाज कर बहुमत साबित करने के लिए सत्र बुलाने में आना कानी करना या विधायकों के इस्तीफे मंजूर न करना जैसे तरकीब अपनाते है। ऐसा लग रहा है जैसे राजनीतिक पार्टियों ने दल बदल कानून का तोड़ निकाल लिया है।