जम्मू कश्मीर में चल रहे तमाम तरह के प्रतिबंधों से जुड़ी हुई कई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। कांग्रेस के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने भी याचिका दाखिल करते हुए कहा था की कश्मीर में लोगों को तमाम तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है और आज के आधुनिक जीवन में मूलभूत जरूरत बन चुका इंटरनेट अभी भी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है।

सरकार की तरफ से जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा की प्रतिबन्ध जैसे आरोप लगाना बेबुनियाद और तथ्यहीन है। घाटी में पोस्टपेड मोबाइल सेवा बहाल की जा चुकी है। उचित माहौल बनने पर प्रीपेड मोबाइल सेवा भी चालू कर दी जाएगी। सभी स्कूल खुल चुके है और बच्चे स्कूल जा रहे है। यंहा तक की 914 स्कूल ऐसे है जो 370 हटने के तुरंत बाद भी बंद नहीं किये गए थे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा की घाटी में माहौल को देखते हुए स्थानीय प्रशासन अपने स्तर पर प्रतिबन्ध लगाने या हटाने पर निर्णय ले रहा है। कल सरकार ने संसद में सवालों के जवाब देते हुए कहा था की धारा 370 के हटने के बाद कश्मीर में पत्थरबाजी में काफी कमी आयी है। साथ ही आतंकी घटनाओं पर भी काफी विराम लगा है।

नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर जरूर गोलीबारी की घटनाएं काफी बढ़ी है। पर भारतीय सेना की जबरदस्त कार्यवाही के बाद पाकिस्तानी सेना को युद्ध विराम उलंघन करने से पहले सोचने पर मजबूर कर दिया है। कई हफ्तों की शांति के बाद कृष्णा घाटी में पाकिस्तान ने अकारण गोली बारी की जिसमे भारतीय सीमा सुरक्षा बल का एक जवान घायल हो गया। घायल जवान की हालत खतरे से बाहर बतायी जा रही है।