दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले 40 दिनों से ज्यादा से CAA और NRC के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. महिलाओं की अगुआई में हो रहे है इस प्रदर्शन की वजह से लाखों लोग प्रभावित हैं. ये प्रदर्शन सड़क जाम करके हो रहा है. ऐसे में तमाम लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है. बीते दिनों इस प्रदर्शन के खिलाफ भी कई प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि देश के गृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी ससंद में ये एलान करें कि एनआरसी नहीं होगी. इसी बीच दिल्ली चुनाव भी नजदीक आ गया है. ऐसे में बीजेपी ने शाहीन बाग के मुद्दे को जोर शोर से उठाना शुरु कर दिया है. बीजेपी इसे साफ साफ हिंदू मुस्लिम का मुद्दा बना रही है.

एमसीडी और लोकसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद अरविंद केजरीवाल ने अपनी चाल बदली थी. उन्होंने नरेंद्र मोदी पर हमले कम कर दिए. उन्होंने अपने काम का प्रचार करना शुरु किया. फ्री पानी- बिजली के अलावा बसों में महिलाओं को फ्री यात्रा का एलान भी किया. ऐसे में दिल्ली की हवा काफी कुछ केजरीवाल के पक्ष में थी. दिल्ली में सभी आम वोटर सीधे तौर पर केजरीवाल को वोट करने की बात कह रहे थे. कई जगह तो ये भी कहा गया कि पीएम के लिए मोदी और सीएम के लिए केजरीवाल. ऐसे में केजरीवाल की पार्टी ने अबकी बार 67 पार का नारा भी दिया लेकिन शाहीन बाग से निकली हवा ने दिल्ली की फिजा को बदल दिया है. शाहीन बाग और शरजील इमाम के जहरीले वीडियो ने केजरीवाल की मुसीबत थोड़ी बढ़ाई है. शरजील इमाम ने जिस तरह से जहर उगला और उसे पूरे शाहीन बाग से जोड़ा गया, उससे दिल्ली के वोटरों में उहापोह हुई. CAA के खिलाफ हिंसा की वजह से थोड़ा ध्रुवीकरण वैसे भी होने वाला था, बाकी बचा काम शाहीन बाग और शरजील इमाम ने कर दिया है.

दिल्ली चुनाव के इस सफर में केजरीवाल और उनकी पार्टी CAA और शाहीन बाग के खिलाफ बोलने से बचती रही. शाहीन बाग पर तो खासतौर पर चुप्पी साधे रही लेकिन बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह की अगुआई में हुए हमलों के बाद मजबूरी में केजरीवाल को शाहीन बाग के बारे में बोलना पड़ा. हालांकि इसकी शुरुआत केजरीवाल के ही पूर्व सहयोगी कपिल मिश्रा ने दिल्ली में भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबले की बात कहकर की थी. उन्होंने दिल्ली में कई शाहीन बाग खड़े होने की बात कही थी.केजरीवाल की दिक्कत ये है कि अगर वो शाहीन बाग के खिलाफ बोलते हैं तो मुस्लिम नाराज होंगे और समर्थन में बोलते हैं तो हिंदू नाराज होंगे. शरजील की गिरफ्तारी की बात कहकर वैसे भी मनीष सिसोदिया ने थोड़ी नाराजगी तो मोल ले ही ली है. हालत ये है कि अमित शाह एक रैली में केजरीवाल से सवाल करते हैं तो ट्विटर पर या किसी रैली में केजरीवाल को उसका जवाब देना पड़ता है. न चाहते हुए भी केजरीवाल शाहीन बाग पर बोलने को मजबूर हैं. उधर बीजेपी के अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा जैसे नेताओं के बयानों से भी दिल्ली में फर्क पड़ सकता है. ऐसे बयानों की नैतिक तौर पर तो निंदा की जाती है लेकिन वोटर के ऊपर उनका असर कुछ और होता है. कई न्यूज चैनल पर रिपोर्टर जनता के बीच जाकर उनकी राय पूछते हैं. अभी से 10 दिन पहले तक हर जगह केजरीवाल का नाम छाया था लेकिन अब हालात वो नहीं रहे. अब बीजेपी का कोर वोटर फिर से बीजेपी की तरफ लौट सकता है.

अरविंद केजरीवाल दिल्ली की रेस में आज भी सबसे आगे हैं और ये कहना कि बीजेपी सत्ता में आ सकती है शायद अतिशयोक्ति ही है, लेकिन शाहीन बाग ने दिल्ली में बीजेपी को ऑक्सीजन दी है और निश्चित तौर पर अब बीजेपी लड़ने वाली हालत में आ चुकी है.