प्रोटेम स्पीकर बनने की लिए ये जरूरी है की वो सदन के सबसे सीनियर सदस्यों में से एक हो, उसे सदन चलाने के लिए महत्पूर्ण नियमो का ज्ञान हो
इसके अलावा उसकी छवि एक साफ़ सुथरे ईमानदार सदस्य की हो।
प्रोटेम स्पीकर के पास स्थायी स्पीकर जैसे अधिकार नहीं होते।
सदन को भंग करने जैसे अति महत्त्पूर्ण निर्णय प्रोटेम स्पीकर के द्वारा नहीं लिए जा सकते।
ये प्रोटेम स्पीकर पर निर्भर करता है की वो बहुमत साबित करने के लिए किये जा रहे वोटिंग में कौन से तरीके का इस्तेमाल करे।