मोदी सरकार ने अपना आखिरी बजट पेश कर दिया है.औपचारिक तौर पर इसे अंतरिम बजट कहा गया लेकिन इसमें जो एलान किए गए हैं वो मोदी सरकार के बीते 4 सालों के आम बजट से कहीं ज्यादा लोकलुभावन हैं.कुल मिलाकर जैसा तमाम लोग कह रहे हैं ये बजट मैच की लास्ट गेंद पर मारे गए छक्के की तरह है.आपको बता दें की हाल ही में जारी किए गए 4 ओपिनियन पोल में बीजेपी जिस तरह से पिछड़ रही थी उसे देखते हुए ये उम्मीद भी की जा रही थी आने वाला बजट लोकलुभावन होगा.

बजट में दो किए गए दो प्रमुख एलानों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं-

किसानों के खाते में साल में 6000 रूपये देने का एलान- सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत 2 हेक्टेयर जमीन वाले किसानों को साल में 6 हजार रूपये सीधे मदद देने का एलान किया है.ये धनराशि 2000 की तीन किश्तों में किसानों के अकाउंट में आएगी.चूंकि इसे दिसंबर 2018 से लागू किया गया है.इसलिए लोकसभा चुनावों के एलान के साथ ही 31 मार्च तक 2000 रूपयों की पहली किश्त किसानों को मिल जाएगी.किसानों के मुद्दे पर सरकार घिरी थी.तीन राज्यों में बीजेपी की हार की एक वजह किसानों की नाराजगी को भी बताया जा रहा था ऐसे में किसानों को खुश करने के लिए सरकार का ये बड़ा माना जा रहा है.राहुल गांधी किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे को उठाते रहे हैं.चूंकि कर्ज माफी से खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ता और महंगाई जैसी विसंगतिया पैदा हो सकती थीं.ऐसे में कांग्रेस के एलान की काट के लिए शायद सरकार ने ये कदम उठाया है.हालांकि स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव ने इसे किसानों के लिए नाकाफी बताया है.

तमाम प्रतिक्रियाओं के बीच सरकार से नाराज किसान वर्ग अपने लिए होने वाले इस एलान को किस तरह से देखता है ये तो चुनाव में ही पता चलेगा.जैसा की उम्मीद की जा रही थी की हो सकता है कर्जमाफी का एलान हो.ऐसे में किसानों ने भी कहीं न कहीं उम्मीद भी यही रही होगी लेकिन निश्चित आय और जिस तरह से चुनाव के पहले पहली किश्त देने का एलान किया गया है उसे देखते हुए हो सकता है की किसान मो दी सरकार के लिए अपना दिल खोल दे.

5 लाख तक की आय को टैक्स मुक्त करने का एलान-बीते साल बजट के बाद हर जगह चर्चा यही थी की सरकार ने अपने टारगेट वोटर मिडिल क्लास को कुछ नहीं दिया.इस बार सरकार ने अपने इस कोर वोटर की नाराजगी को दूर करने भरपूर प्रयास किया है.सरकार ने टैक्स स्लैब में बगैर बदलाव किए 5 लाख तक की आय को हर तरह के टैक्स से मुक्त कर दिया है.अगर आप निवेश करते हैं तो करीब 6.50 लाख तक की आय अब टैक्स से मुक्त हो चुकी है.कुल मिलाकर सरकार ने सीधे तौर पर मिडिल क्लास को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया.10 फीसदी गरीब सवर्ण आरक्षण के जरिए जहां सरकार ने मिडिल क्लास को लुभाने के लिए पहला कदम चला था वहीं अब सरकार ने इस कदम के जरिए समूचे मिडिल क्लास को कवर किया है.चूंकि गरीब सवर्ण आरक्षण में आय सीमा 8 लाख रूपये रखी गई है इसलिए इस आय वर्ग तक के लोगों को सरकार ने साध लिया है.सरकार के इस कदम से उसे चुनावों में मिडिल क्लास का बड़ा सपोर्ट मिलने वाला है और एक बड़े वोटर वर्ग को साधकर सरकार ने कहीं न कहीं आगामी लोकसभा चुनावों के लिए खुद की संभावनाओं को मजबूत किया है.